उत्तर प्रदेश

वाराणसी में दोहरी हार पर अखिलेश ने कसा तंज

Ratna Netam
30 Oct 2026 3:51 PM IST
वाराणसी में दोहरी हार पर अखिलेश ने कसा तंज
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लखनऊ : 30 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वाराणसी में भारतीय जनता पार्टी की हार को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार चलाने का दावा करने वाली भाजपा को वाराणसी में दोहरी हार का सामना करना पड़ा है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा पहले मतगणना में हारी और इसके बाद दोबारा हुई मतगणना में भी उसे हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने इन चुनावी नतीजों को वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत बताया है।
अखिलेश यादव ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वाराणसी में पहले मतगणना और फिर पुनर्मतगणना में भी भाजपा को हार मिली। उन्होंने इसे डबल इंजन सरकार की डबल हार बताया। सपा अध्यक्ष ने भाजपा के चुनावी प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक दिशा के संकेत दे दिए हैं।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कुल 11 सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने छह सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि समाजवादी पार्टी को पांच सीटों पर सफलता मिली है। इन सीटों में पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। चुनाव के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था और मतगणना के बाद 29 अक्टूबर को अंतिम परिणाम घोषित किए गए।
वाराणसी में समाजवादी पार्टी ने स्नातक और शिक्षक दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सपा उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा निर्वाचित हुए। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, उन्हें कुल 55,046 मत मिले। वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। इन परिणामों के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया।
वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र भी है। ऐसे में यहां विधान परिषद की दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी की जीत ने राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है। हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता संरचना विधानसभा और लोकसभा चुनावों से अलग होती है। इसलिए इन चुनावों के परिणामों को व्यापक जनमत का सीधा प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता।
अखिलेश यादव ने चुनावी नतीजों को शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षा से संबंधित भाजपा की नीतियों के खिलाफ जनादेश बताया। उन्होंने दावा किया कि शिक्षित बेरोजगार युवाओं ने भी अपने मतदान के माध्यम से सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त किया है। सपा अध्यक्ष का कहना था कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों के बीच नाराजगी है, जिसका असर चुनाव परिणामों में दिखाई दिया है।
उन्होंने भाजपा पर विभिन्न सामाजिक वर्गों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के मुद्दों को लगातार उठाती रही है। उन्होंने अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीतिक अभियान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि समाज के विभिन्न वर्ग समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए शिक्षकों, स्नातक मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मतदान और मतगणना के दौरान सक्रिय रहने वाले समर्थकों की भी सराहना की। अखिलेश यादव ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में सतर्कता और एकजुटता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली पांच सीटों की जीत के बाद पार्टी नेतृत्व इसे राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि, कुल सीटों के लिहाज से भाजपा छह सीटें जीतकर आगे रही है। इस चुनाव में दोनों दलों के प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना ने समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को छह सीटों पर सफलता मिली है, जबकि सपा ने पांच सीटें जीती हैं। खन्ना के अनुसार, इन परिणामों को किसी एक दल की नीतियों के पक्ष या विपक्ष में व्यापक जनादेश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीदवारों के व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय प्रयासों को चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण बताया।
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी विधान परिषद चुनाव के परिणामों को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ने के सपा के दावों से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग विधानसभा चुनाव के सामान्य मतदाता वर्ग से अलग है। उनके अनुसार, इन चुनावों के नतीजों को विधानसभा चुनाव के परिणामों का संकेत मानना उचित नहीं होगा।
राजनीतिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा। भाजपा लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाने का प्रयास करेगी, जबकि समाजवादी पार्टी सत्ता में वापसी के उद्देश्य से अपनी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ा रही है। कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों की भूमिका भी आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकती है।
विधान परिषद चुनाव के परिणामों के बाद शिक्षक भर्ती, शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों से जुड़े सवाल फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। समाजवादी पार्टी इन मुद्दों को आगामी विधानसभा चुनाव में उठाने के संकेत दे रही है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों को जनता के सामने रखने पर जोर दे रही है।
वाराणसी में मिली जीत से समाजवादी पार्टी को राजनीतिक उत्साह मिला है, जबकि भाजपा के सामने इन निर्वाचन क्षेत्रों में अपने प्रदर्शन की समीक्षा करने का अवसर है। अब दोनों दलों की नजर 2027 के विधानसभा चुनाव पर बनी हुई है। फिलहाल अखिलेश यादव का डबल इंजन की डबल हार वाला बयान उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस में प्रमुख विषय बन गया है।
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