उत्तर प्रदेश

वोटर लिस्ट को लेकर अखिलेश का बड़ा बयान बोले फिर होगी SIR की तैयारी

Ratna Netam
29 Aug 2026 4:37 PM IST
वोटर लिस्ट को लेकर अखिलेश का बड़ा बयान बोले फिर होगी SIR की तैयारी
x
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने SIR को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव से पहले एक बार फिर ऐसा कदम उठाया जा सकता है, जिससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ा अधिकार वोट का होता है और इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा।
अखिलेश यादव ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावी लाभ के लिए ऐसे कदम उठा सकती है, जिससे कुछ वर्गों के मतदाताओं को परेशानी हो। सपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मतदाता सूची पर नजर रखें और किसी भी मतदाता का नाम हटने न दें।
SIR को लेकर क्यों मचा है विवाद
SIR यानी **Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण)** चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची की जांच और सुधार किया जाता है। इसका उद्देश्य सूची में नए मतदाताओं को जोड़ना, गलत नाम हटाना और रिकॉर्ड को अपडेट करना होता है।
हालांकि राजनीतिक दल इस प्रक्रिया को अपने-अपने नजरिए से देखते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव से पहले SIR का इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। वहीं चुनाव प्रक्रिया से जुड़े पक्षों का कहना है कि मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाए रखना जरूरी है।
अखिलेश ने भाजपा पर लगाया आरोप
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति का वोट छीन लिया जाता है तो उसके अधिकारों पर असर पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण के साथ जनता के बीच जाएगी और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।
भाजपा का क्या पक्ष है
भाजपा लगातार विपक्ष के आरोपों को खारिज करती रही है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और सही रखना चुनाव आयोग की सामान्य प्रक्रिया है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि फर्जी नाम हटाना और नए मतदाताओं को जोड़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
भाजपा का कहना है कि विपक्ष बिना आधार के चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक गर्मी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ही दल अपने-अपने मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहे हैं। अखिलेश यादव लगातार भाजपा सरकार को बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक मुद्दों पर घेर रहे हैं।
वहीं भाजपा योगी सरकार के विकास कार्यों और कानून व्यवस्था को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
मतदाता सूची पर रहेगी सभी दलों की नजर
चुनाव के दौरान मतदाता सूची सबसे अहम दस्तावेज होती है। किसी भी उम्मीदवार या पार्टी के लिए यह जरूरी होता है कि उनके समर्थक मतदाताओं के नाम सूची में मौजूद रहें।
इसी वजह से चुनाव से पहले SIR जैसी प्रक्रिया राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन जाती है। सभी दल अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुट जाते हैं।
सपा की रणनीति क्या है
अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर मजबूत होने का संदेश दिया है। पार्टी का कहना है कि वह मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चलाएगी।
सपा आगामी चुनाव में पीडीए के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है और भाजपा पर आरोप लगा रही है कि वह कमजोर वर्गों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
Next Story