उत्तर प्रदेश

PDA के मुद्दे पर अखिलेश का सरकार पर बड़ा आरोप

Ratna Netam
19 Sept 2026 4:10 PM IST
PDA के मुद्दे पर अखिलेश का सरकार पर बड़ा आरोप
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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा और राज्य सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोधी और निषाद समाज के नेताओं तथा जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाकर सरकार ‘पीडीए’ समाज को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है। अखिलेश ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके के बजाय कथित तौर पर बल प्रयोग की राजनीति की जा रही है और भाजपा की ‘नकारात्मक राजनीति’ अब नहीं चलेगी।अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया रायबरेली और संतकबीर नगर में सामने आई हालिया घटनाओं की पृष्ठभूमि में आई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन मामलों को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि सत्ता के बल पर पीडीए से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाया जा रहा है।यहां स्पष्ट है कि भाजपा सरकार और प्रशासन को लेकर लगाए गए ये आरोप अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का राजनीतिक पक्ष हैं। संबंधित घटनाओं में प्रशासन और पुलिस का पक्ष अलग रहा है और कुछ आरोपों को पुलिस ने खारिज भी किया है।
लोधी और निषाद समाज का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लोधी और निषाद समाज का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी लोधी समाज तो कभी निषाद समाज के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाया जा रहा है।सपा अध्यक्ष ने इसे अपनी पार्टी के ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीतिक फॉर्मूले से जोड़ते हुए दावा किया कि इन वर्गों को दबाने की कोशिश की जा रही है। पीडीए समाजवादी पार्टी की मौजूदा राजनीतिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा है और अखिलेश यादव लगातार विभिन्न सामाजिक समूहों को इस मंच के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से राजनीतिक मुकाबला करने के बजाय दबाव की रणनीति अपना रही है। अखिलेश ने इसके लिए ‘लठतांत्रिक’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए भाजपा पर निशाना साधा।
2024 के चुनाव परिणाम का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने अपने बयान में 2024 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में उस चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा पीडीए की राजनीतिक ताकत को लेकर दबाव में है।2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 33 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। सपा उस चुनाव में उत्तर प्रदेश की सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बनी थी।इसी चुनावी प्रदर्शन को समाजवादी पार्टी अपने पीडीए फॉर्मूले की सफलता के रूप में पेश करती रही है। हालांकि यह सपा की राजनीतिक व्याख्या है और चुनाव परिणाम कई स्थानीय, सामाजिक और राजनीतिक कारकों से प्रभावित होते हैं।अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा उस चुनावी नतीजे से उबरने के लिए पीडीए से जुड़े वर्गों पर दबाव बनाने की राजनीति कर रही है।
रायबरेली की घटना पर क्यों बढ़ा विवाद
रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्र सभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच विवाद के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ा। रिपोर्टों के अनुसार समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता एक जागरूकता अभियान चला रहे थे, इसी दौरान उनका ABVP कार्यकर्ताओं से आमना-सामना हुआ और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई।स्थिति को संभालने के लिए पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी वहां पहुंचे। सपा नेताओं ने पुलिस पर अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।इसके विरोध में सपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी कार्यालय की ओर मार्च भी किया। प्रदर्शन में हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी और बछरावां विधायक श्याम सुंदर भारती सहित कई पार्टी नेता शामिल हुए।
पुलिस ने आरोपों को किया खारिज
रायबरेली मामले में पुलिस का पक्ष समाजवादी पार्टी के आरोपों से अलग है। सर्किल ऑफिसर सिटी आशीष निगम ने सोशल मीडिया पर चल रहे पुलिस द्वारा छात्रों या कार्यकर्ताओं से मारपीट के आरोपों को गलत और भ्रामक बताया।पुलिस के अनुसार दोनों पक्षों ने अपनी मांगों और आपत्तियों को ज्ञापन तथा शिकायत के माध्यम से कॉलेज प्रशासन और अधिकारियों के सामने रखा था। पुलिस का कहना था कि उसका हस्तक्षेप कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया था।इसलिए रायबरेली की घटना में पुलिस की भूमिका को लेकर सपा के आरोप और पुलिस का जवाब दोनों अलग-अलग पक्ष के रूप में सामने आए हैं।
संतकबीर नगर की घटना भी बनी मुद्दा
अखिलेश यादव ने संतकबीर नगर से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम को भी अपने राजनीतिक हमले में शामिल किया। रिपोर्टों के मुताबिक वहां एक कार्यक्रम के दौरान विवाद और पथराव की घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हुआ। अखिलेश ने रायबरेली और संतकबीर नगर की घटनाओं को पीडीए से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाने के अपने आरोप से जोड़ा।उन्होंने कहा कि किसी भी समाज या समुदाय के नेताओं को राजनीतिक ताकत के आधार पर डराने की कोशिश लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा नहीं होनी चाहिए।
'नकारात्मक राजनीति अब और नहीं चलेगी
सपा प्रमुख ने अपने बयान में भाजपा पर ‘नकारात्मक राजनीति’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सामाजिक विभाजन की राजनीति का प्रभाव कम हो रहा है और लोग अब विकास, रोजगार और अपने अधिकारों से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं।इससे पहले भी अखिलेश यादव भाजपा पर समाज को बांटने और विपक्षी नेताओं के खिलाफ नकारात्मक अभियान चलाने का आरोप लगा चुके हैं। 16 सितंबर को उन्होंने भाजपा पर सपा नेताओं के खिलाफ डिजिटल अभियान चलाने का आरोप लगाया था।भाजपा नेताओं ने भी इसके जवाब में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर नकारात्मक राजनीति के आरोप लगाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना रहा है कि सपा अपने राजनीतिक हित के लिए पीडीए के नाम पर सामाजिक समूहों को बांटने की कोशिश कर रही है।
रोजगार और निवेश पर भी सरकार को घेरा
शनिवार को अखिलेश यादव ने केवल पीडीए का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि रोजगार और निवेश को लेकर भी भाजपा सरकार पर सवाल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में निवेश और उद्योग की तस्वीर विज्ञापनों में ज्यादा दिखाई दे रही है, जबकि युवाओं को वास्तविक रोजगार मिलने की स्थिति अलग है।उन्होंने सरकार के रोजगार संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विज्ञापनों में बताई जा रही नौकरियों को जोड़ दिया जाए तो प्रदेश में बेरोजगार नहीं बचना चाहिए।ये आरोप सपा अध्यक्ष की राजनीतिक आलोचना हैं। रोजगार और निवेश की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन सरकारी रोजगार आंकड़ों, श्रम बाजार के डेटा, निवेश परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निजी क्षेत्र में रोजगार जैसे अलग-अलग संकेतकों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
महंगाई और रुपये को लेकर भी सवाल
अखिलेश यादव ने शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महंगाई और रुपये की स्थिति को लेकर भी केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को लेकर सवाल उठाते थे, उन्हें मौजूदा स्थिति भी देखनी चाहिए।इसके अलावा उन्होंने विभिन्न आयोजनों में बड़े पैमाने पर दीप जलाने की होड़ पर भी टिप्पणी की और इसे सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़कर सवाल उठाए।अखिलेश यादव ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश में भी छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग उठाई। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली में चुनाव हो सकते हैं तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं।
2027 से पहले तेज हो रही PDA की राजनीति
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। उससे पहले समाजवादी पार्टी पीडीए रणनीति को लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रख रही है। अखिलेश यादव पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों को उठाकर भाजपा को घेर रहे हैं।वहीं भाजपा और उसके नेता सपा के पीडीए फॉर्मूले पर लगातार जवाबी हमला कर रहे हैं। हाल में अखिलेश यादव की प्रस्तावित पीडीए यात्रा को लेकर भी दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी हुई है।इस कारण उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण, कानून-व्यवस्था, रोजगार और जातीय समीकरण आने वाले महीनों में प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने रह सकते हैं।
अबकी बार भाजपा जाएगी' का दावा
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि अगली बार भाजपा सत्ता से बाहर होगी। उन्होंने सामाजिक विभाजन, भ्रष्टाचार और विभिन्न धार्मिक मुद्दों को लेकर भी भाजपा पर कई आरोप लगाए।यह आगामी चुनाव को लेकर सपा अध्यक्ष का राजनीतिक दावा है, न कि चुनाव परिणाम का पूर्वानुमान। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदाता किन मुद्दों और दलों को प्राथमिकता देंगे, यह चुनाव प्रक्रिया और वास्तविक मतदान के बाद ही निर्धारित होगा।
फिलहाल अखिलेश यादव ने रायबरेली और संतकबीर नगर की घटनाओं को आधार बनाकर भाजपा सरकार पर पीडीए से जुड़े नेताओं को डराने का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ कम से कम रायबरेली मामले में पुलिस ने सपा की ओर से लगाए गए मारपीट जैसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसका हस्तक्षेप कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए था। इस पूरे विवाद के बीच पीडीए को लेकर सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है।
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