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सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष **अजय राय** ने कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को नफरत की राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। कांग्रेस इस मामले में संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
सहारनपुर में मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पहले ही कार्रवाई को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। अब अजय राय के बयान के बाद मामला प्रदेश की राजनीति में और गर्म हो गया है।
अजय राय ने सरकार को घेरा
अजय राय ने सहारनपुर की घटना को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में सरकार को कानून और संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक काम करना चाहिए।
अजय राय ने कहा कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की राजनीति के पक्ष में खड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश को नफरत और धार्मिक विभाजन की राजनीति का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भी शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की अपील की।
बुलडोजर कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच की गई।
कार्रवाई को देखते हुए सुबह से ही कलेक्ट्रेट और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। बैरिकेडिंग कर कई रास्तों पर आवाजाही नियंत्रित की गई।
प्रशासन ने कार्रवाई को कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत बताया है। वहीं विपक्षी नेताओं ने इसकी वैधानिकता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
इसी अंतर के कारण मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।
इमरान मसूद भी जता चुके नाराजगी
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी मस्जिद ध्वस्तीकरण का कड़ा विरोध किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई संविधान और कानून की भावना के खिलाफ है। मसूद ने मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही है।
कांग्रेस का कहना है कि धार्मिक स्थल से जुड़े किसी भी विवाद में न्यायिक प्रक्रिया और कानून का पालन होना चाहिए।
अजय राय का बयान भी इसी राजनीतिक रुख को आगे बढ़ाता दिखाई देता है।
अखिलेश यादव ने भी साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सहारनपुर की कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला।
उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की।
सपा नेताओं का आरोप है कि बुलडोजर कार्रवाई का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जा रहा है। सरकार और प्रशासन की तरफ से ऐसे आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है।
इस तरह सहारनपुर का मामला अब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा बन गया है।
ओवैसी ने उठाया संवैधानिक अधिकारों का सवाल
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मस्जिद पर कार्रवाई की आलोचना की है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं की जाएगी।
ओवैसी ने कार्रवाई को धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।
इस तरह एक स्थानीय मस्जिद से शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय स्तर के विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं के कारण बड़ी राजनीतिक बहस में बदल गया है।
प्रशासन ने पहले ही बढ़ा दी थी सुरक्षा
मस्जिद पर कार्रवाई को लेकर विरोध की आशंका पहले से थी। इसी वजह से सहारनपुर प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया था।
भारी पुलिस बल के साथ वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई और सोशल मीडिया पर भी नजर रखी गई।
प्रशासन की प्राथमिकता किसी भी तरह के टकराव या हिंसा को रोकना और कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना रही।
कुछ नेताओं को घरों पर रोके जाने की खबर
कार्रवाई के दौरान कुछ विपक्षी नेताओं की गतिविधियों को भी सीमित किए जाने की खबरें सामने आईं।
कैराना से सांसद इकरा हसन समेत कुछ नेताओं को उनके घरों पर रोके जाने की बात कही गई।
पुलिस की ओर से यह कदम कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उठाए जाने की बात सामने आई।
विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने वाला कदम बताते हुए आलोचना की।
कांग्रेस की कानूनी लड़ाई की तैयारी
कांग्रेस नेताओं के बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी इस मामले को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहती।
इमरान मसूद पहले ही सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में मस्जिद से जुड़े दस्तावेज, जमीन की स्थिति और प्रशासनिक आदेश आगे की कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अगर मामला अदालत में पहुंचता है तो दोनों पक्षों को अपने-अपने दावों के समर्थन में रिकॉर्ड पेश करने होंगे।
आखिरकार कार्रवाई की वैधानिकता पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया में ही तय हो सकता है।
अजय राय का भाईचारे पर जोर
अजय राय ने अपने बयान में राजनीतिक हमले के साथ सामाजिक सद्भाव पर भी जोर दिया।
उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे से जुड़ी रही है।
उन्होंने लोगों से किसी भी उकसावे में नहीं आने और शांति बनाए रखने की अपील की।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि पार्टी संविधान के तहत मिले अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाती रहेगी।
सोशल मीडिया पर अफवाहों से सावधान रहने की अपील
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर बड़ी संख्या में पोस्ट और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं।
ऐसे संवेदनशील मामलों में पुराने या दूसरे स्थानों के वीडियो को मौजूदा घटना से जोड़कर वायरल किए जाने का खतरा रहता है।
प्रशासन लोगों से अपुष्ट सामग्री शेयर नहीं करने और केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने की अपील कर रहा है।
किसी भड़काऊ या सांप्रदायिक सामग्री से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
अब कानूनी मोड़ ले सकता है मामला
सहारनपुर की मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद जिस तरह विपक्षी दल एक के बाद एक प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उससे साफ है कि मामला जल्द शांत होने वाला नहीं है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ दिया है। इमरान मसूद ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने की बात कही है, जबकि अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी भी सरकार को घेर चुके हैं।
दूसरी तरफ प्रशासन कार्रवाई को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया कदम बता रहा है।
ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि विपक्षी नेता अदालत का रुख कब और किस आधार पर करते हैं। फिलहाल प्रशासन सहारनपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर अलर्ट है और संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है।
अजय राय ने साफ संदेश दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाएगी। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश को धार्मिक नफरत और विभाजन की राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा और पार्टी संविधान तथा सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
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