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जन्मदिन पर अयोध्या पहुंचे अजय राय, बोले- पद के लालची नहीं, कांग्रेस की सेवा जारी रखेंगे

अयोध्या। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अजय राय बुधवार को अपने जन्मदिन के मौके पर राम नगरी अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने रामलला के दर्शन किए और हनुमान गढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। धार्मिक कार्यक्रमों के बीच अजय राय ने अपने राजनीतिक भविष्य और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने को लेकर भी प्रतिक्रिया दी।
अजय राय ने कहा कि वह किसी पद के लालची नहीं हैं और कांग्रेस पार्टी की सेवा पहले की तरह आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों की सेवा करना, भगवान के प्रति निष्ठा और आस्था उनके संस्कारों का हिस्सा है। संगठन में पद रहे या न रहे, वह कांग्रेस के लिए काम करते रहेंगे।
अयोध्या पहुंचने के बाद अजय राय सबसे पहले हनुमान गढ़ी पहुंचे, जहां उन्होंने दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने रामलला के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। अपने जन्मदिन पर धार्मिक नगरी पहुंचने को उन्होंने आस्था से जुड़ा व्यक्तिगत अवसर बताया।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब उनसे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “हम लोग पद के लालची नहीं हैं। लोगों की सेवा करना और भगवान के प्रति निष्ठा एवं आस्था हमारे खून में है। हम कांग्रेस की अभी भी सेवा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।”
अजय राय ने कहा कि राजनीतिक पद जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होता। उनके लिए पार्टी संगठन और जनता के बीच काम करना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने साफ किया कि अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद भी उनकी राजनीतिक सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा और संगठन से उनका जुड़ाव लंबे समय से है और यह किसी एक पद तक सीमित नहीं है। वह पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में जनता के बीच सक्रिय रहेंगे।
अजय राय ने अपने अयोध्या दौरे को काशी से जोड़ते हुए कहा कि वह काशी के रहने वाले हैं और बाबा विश्वनाथ की नगरी से अयोध्या आए हैं। उन्होंने कहा, “हम तो काशीवासी हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी से चलकर आए हैं। अभी हनुमान गढ़ी और भगवान राम का दर्शन किया है। अब फिर काशी जाना है।”
उनके इस बयान में धार्मिक आस्था के साथ काशी और अयोध्या के प्रति जुड़ाव भी नजर आया। अजय राय ने कहा कि वह हमेशा से धार्मिक परंपराओं में विश्वास रखते आए हैं और अवसर मिलने पर विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन करते हैं।
उन्होंने अपने राजनीतिक सफर को लेकर भी कहा कि वह मेहनत और कर्म में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा, “हम लोग काम करने वाले लोग हैं, मेहनत करने वाले लोग हैं। कर्म हम करते हैं, मेहनत हम करते हैं और फल देना ईश्वर के हाथ में है।”
अजय राय का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में बदलाव के बाद उनकी भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद उनके समर्थकों और राजनीतिक हलकों में यह सवाल था कि आगे उनकी भूमिका क्या होगी।
अजय राय ने इन चर्चाओं का जवाब देते हुए संकेत दिया कि वह संगठन में सक्रिय रहेंगे और पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष जाहिर नहीं किया।
उनका कहना था कि कांग्रेस से उनका संबंध पद के आधार पर नहीं, बल्कि विचारधारा और संगठनात्मक प्रतिबद्धता पर टिका है।
अयोध्या में उनका स्वागत स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने किया। जन्मदिन के मौके पर बड़ी संख्या में उनके समर्थकों ने उन्हें शुभकामनाएं भी दीं। धार्मिक स्थलों पर दर्शन के दौरान भी कई स्थानीय कार्यकर्ता उनके साथ मौजूद रहे।
अजय राय लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। कांग्रेस में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं और वाराणसी की राजनीति में भी उनकी मजबूत पहचान रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर जोर दिया था। अब अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह पार्टी के लिए अपनी भूमिका जारी रखेंगे।
अजय राय ने कहा कि पद कभी स्थायी नहीं होते, लेकिन जनता की सेवा और राजनीतिक प्रतिबद्धता लगातार बनी रहनी चाहिए। उन्होंने अपने समर्थकों को भी यही संदेश दिया कि किसी भी परिस्थिति में मेहनत करना नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीति में काम और संघर्ष सबसे महत्वपूर्ण है। परिणाम कब और किस रूप में मिलेगा, यह बाद की बात है।
रामलला और हनुमान गढ़ी में दर्शन के बाद अजय राय ने अयोध्या में मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की। इस दौरान संगठन से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई।
हालांकि उन्होंने संगठनात्मक बदलावों पर ज्यादा विस्तार से बात नहीं की और अपने बयान को सकारात्मक रखते हुए कहा कि वह पार्टी की सेवा में पहले की तरह लगे रहेंगे।
अपने जन्मदिन के अवसर पर अयोध्या यात्रा को लेकर अजय राय ने कहा कि यह उनके लिए धार्मिक और व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने भगवान राम और हनुमान जी से आशीर्वाद लेकर आगे भी जनसेवा करते रहने की बात कही।
उन्होंने काशी लौटने का जिक्र करते हुए कहा कि उनका जीवन और राजनीतिक पहचान दोनों काशी से जुड़े हैं। बाबा विश्वनाथ में उनकी गहरी आस्था है और अयोध्या से दर्शन के बाद वह वापस काशी जाएंगे।
अजय राय के बयान में संगठनात्मक बदलाव के बावजूद आत्मविश्वास दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि वह न तो पद से राजनीति शुरू करते हैं और न पद खत्म होने से उनकी राजनीति समाप्त होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और वह संगठन का कर्ज सेवा के जरिए चुकाते रहेंगे।
उनके मुताबिक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में काम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी बड़े पद पर रहना।
अयोध्या में दिए गए उनके बयान को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि वह कांग्रेस से जुड़े रहेंगे और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अलग होने के बाद भी सक्रिय राजनीति जारी रखेंगे।
अजय राय ने कहा कि मेहनत करना ही उनके राजनीतिक जीवन का मूल मंत्र है। उन्होंने दोहराया कि कर्म करना मनुष्य के हाथ में है और फल ईश्वर तय करता है।
जन्मदिन पर अयोध्या पहुंचे अजय राय ने धार्मिक आस्था, संगठन के प्रति निष्ठा और राजनीतिक सक्रियता—तीनों संदेश एक साथ दिए। उन्होंने रामलला और हनुमान गढ़ी में दर्शन के बाद साफ कहा कि पद उनके लिए प्राथमिकता नहीं है, बल्कि लोगों की सेवा और कांग्रेस के लिए काम करना ही उनका लक्ष्य है।
फिलहाल अजय राय ने अपनी आगे की भूमिका को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की, लेकिन इतना जरूर स्पष्ट कर दिया कि वह राजनीति और कांग्रेस संगठन से दूर नहीं होने जा रहे हैं। उनका कहना है कि वह पहले की तरह जनता के बीच रहेंगे, मेहनत करेंगे और पार्टी की सेवा जारी रखेंगे।





