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Agra: सड़क हादसे में बाइक सवार सगे भाई बहनों सहित चार लोगों की मौत

आगरा: सादाबाद में हाथरस रोड पर मुन्नी देवी शीतगृह के पास हुए हादसे में बाइक सवार सगे भाई बहनों सहित चार लोगों की मौत के बाद गांव तसींगा में भी मातम छा गया है। मृतकों के चाचा-ताऊ के यहां माहौल गमगीन हो गया। उनके घर में चूल्हे तक नहीं जले। काफी लोगों ने मौके पर पहुंचकर शोक संवेदना जाहिर की।
हादसे में जान गंवाने वाले आगरा के टेढी बगिया निवासी शहजाद पुत्र शमसुद्दीन, नरगिस और शहनाज तीनों सगे भाई-बहन हैं। ये मूल रूप से सादाबाद क्षेत्र के गांव तसींगा के रहने वाले थे। पांच साल पहले इनके पिता पिता-काम धंधे की तलाश में आगरा चले गए थे। यहीं किराये के मकान में रह रहे थे। पिता कार चलाते हैं और मां कबाड़ फैक्टरी में नौकरी करती हैं।
गांव तसींगा में मृतकों के बाबा जमरूद्दीन और चाचा शमशेर आदि रहते हैं। जब इन्हें घटना की सूचना मिली तो घर में कोहराम मच गया। रो-रोकर इनका बुरा हाल था। ग्राम प्रधान पति श्यामवीर सिंह व अन्य ग्रामीणों ने पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की।
कोतवाली पर घटना की जानकारी करने पहुंचे परिवार के लोग: रविवार की सुबह गांव तसींगा से बाबा जमरूद्दीन, चाचा शमशेर, जावेद आदि सादाबाद कोतवाली पर हादसे की जानकारी करने व रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे। यहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें बताया कि मृतकों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने का इंतजार है। इसके बाद परिजन कोतवाली से हाथरस स्थित पोस्टमार्टम हाउस के लिए रवाना हो गए। पोस्टमार्टम हो जाने के बाद परिजन यहां से शवों को लेकर आगरा के लिए रवाना हो गए। आगरा में एक साथ चार शव पहुंचते ही कोहराम मच गया।
एक साल पहले नामकरण संस्कार में तीनों आए थे तसींगा: मृतकों के चचेरे भाई जावेद ने बताया कि शहजाद, नरगिस और शहनाज अपनी मां के साथ लगभग एक साल पहले उसके भाई के बेटे ईशान के नामकरण संस्कार में आए थे। उसके बाद यह बच्चे गांव में नहीं आए। उस वक्त सभी ने मिलकर खूब धमाल मचाया था। सभी ने एक साथ बैठकर खाना भी खाया था, उन्हें नहीं पता था कि यह बच्चे फिर कभी भी गांव में वापस नहीं आ पाएंगे।
टेढ़ी बगिया में एक साथ उठे तीन जनाजे...फफक पड़े लोग
सादाबाद (हाथरस) में शनिवार को हुए हादसे में तीन छात्राओं और एक युवक की मौत हुई थी। रविवार को टेढ़ी बगिया में मातम रहा। दोपहर बाद पोस्टमार्टम से शव घर लाए गए। देख परिजन बिलख पड़े। हादसे में दो बेटियां और घर का इकलौता चिराग बुझ जाने से पूरा परिवार बेहाल दिखा। गली-मोहल्ले में मौजूद भीड़ में हर किसी की आंख नम थीं। बेहाल माता-पिता को लोग संभाल रहे थे। शाम को तीनों भाई-बहनों के जनाजे एक साथ उठे तो सभी फफक पड़े। नगला किशनलाल में मिश्रित आबादी है। हिंदू और मुस्लिम परिवारों के लोग भी साथ मौजूद थे। कोई मृतकों की मां को संभाल रहा था तो कोई पिता को।





