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आगरा: पुलिस ने आगरा में हुए ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा करते हुए दिल दहला देने वाला सच सामने लाया है. यह सनसनीखेज मामला थाना मलपुरा इलाके का है, जहां 18 फरवरी 2024 को युवक राकेश की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी. हत्या का आरोप किसी और पर नहीं बल्कि उसके ही रिश्ते के फूफा पर है. पुलिस ने मुख्य आरोपी देवीराम पुत्र शंकर सिंह बघेल को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका भतीजा और सह-अभियुक्त नित्य किशोर अब भी फरार है.
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक राकेश का आरोपी की नाबालिग बेटी से संपर्क था. आरोप है कि राकेश ने युवती का नहाते समय फोटो खींच लिया और बाद में इन्हीं तस्वीरों के आधार पर देवीराम को ब्लैकमेल करने लगा. इस बात से आहत होकर आरोपी ने राकेश को रास्ते से हटाने की योजना बनाई और 18 फरवरी की रात उसे अपनी मिठाई की दुकान पर बुलाया.
आगरा-ग्वालियर हाईवे किनारे स्थित दुकान पर राकेश जैसे ही पहुंचा, आरोपी ने पीछे से मफलर और लोहे का तार डालकर उसका गला घोंट दिया. इसके बाद अपने भतीजे नित्य किशोर की मदद से शव को प्लास्टिक के ड्रम में भरकर लोडर से खारी नदी किनारे सुनसान इलाके में ले जाया गया. वहां शव पर पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया गया. हत्या के बाद पहचान मिटाने के लिए राकेश का मोबाइल, मफलर और तार नदी में फेंक दिए गए, जबकि बाइक हाईवे किनारे छोड़ दी गई. घटना के बाद आरोपी दिल्ली भाग गया और वहां नौकरी करने लगा.
20 फरवरी को थाना सैंया पुलिस को खारी नदी के पास अधजला शव बरामद हुआ. चूंकि इससे पहले राकेश की गुमशुदगी की तहरीर थाने में दर्ज हो चुकी थी, पुलिस ने शव की पहचान कराने की कोशिश की. हालांकि परिजन अधजले शव को पहचान नहीं पाए. इसके बाद शव का डीएनए टेस्ट कराया गया और डीएनए मृतक की मां से मैच होने पर पुष्टि हुई कि शव राकेश का ही है.
इस गंभीर मामले की जांच मलपुरा थाने की टीम, एसओजी और सर्विलांस सेल को सौंपी गई. तकनीकी साक्ष्य और लगातार निगरानी के आधार पर पुलिस ने आखिरकार 15 सितंबर 2025 को आरोपी देवीराम को जगदीशपुर पुल के पास से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उसने पूरे घटनाक्रम की सच्चाई स्वीकार कर ली. गिरफ्तार आरोपी की पहचान देवीराम पुत्र शंकर सिंह निवासी ग्राम कुबूलपुर के रूप में हुई है. उसका भतीजा नित्य किशोर अभी भी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है. पुलिस का कहना है कि उसे भी जल्द पकड़ लिया जाएगा.
डीसीपी वेस्ट अतुल शर्मा ने बताया कि यह मामला बेहद पेचीदा था क्योंकि शुरुआती दिनों में शव की पहचान संभव नहीं हो पाई थी. वादी ने मुकदमा दर्ज कराते समय कुछ आशंकाएं जाहिर की थीं, जिसके आधार पर अलग-अलग टीमों का गठन किया गया. लंबे समय की पड़ताल और तकनीकी जांच के बाद इस ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा हो सका.बात करें आगरा पुलिस कि तो यह कार्रवाई न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ी सफलता है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अपराध कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो, क़ानून से बचना आसान नहीं है.





