उत्तर प्रदेश

आगरा का इनामी स्क्रैप कारोबारी पुलिस के शिकंजे में

Saba Naaz
25 July 2026 9:24 PM IST
आगरा का इनामी स्क्रैप कारोबारी पुलिस के शिकंजे में
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उत्तर प्रदेश: कानपुर पुलिस ने 250 करोड़ रुपये की बड़ी साइबर ठगी के मामले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए आगरा के फतेहपुर सीकरी निवासी स्क्रैप कारोबारी अंचित गोयल को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस जांच में सामने आया है कि अंचित गोयल ने तीन फर्जी फर्मों के जरिए साइबर ठगी की रकम को खपाने और उसे वैध दिखाने का काम किया। इन फर्मों से जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 53 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।

पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को छिपाने के लिए फर्जी कारोबार का सहारा लिया गया। आरोपी फर्जी जीएसटी बिल तैयार करवाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट और आयकर से जुड़े फर्जी क्लेम लेने की कोशिश करता था। जांच में उसकी तीन फर्जी फर्मों के दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनमें राजाराम ट्रेडर्स, श्रीश्याम ट्रेडर्स और राधा ट्रेडर्स शामिल हैं।

कानपुर पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस साइबर ठगी नेटवर्क का दायरा कई राज्यों तक फैला हुआ था। आरोपी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली के कई कारोबारियों से फर्जी जीएसटी बिल जुटाता था। इन बिलों के माध्यम से कागजों पर कारोबार दिखाकर ठगी की रकम को सफेद करने का प्रयास किया जाता था।

अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अप्रैल महीने में बर्रा थाना पुलिस ने 125 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में चार बैंक कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद राजवीर सिंह और शिवम सिन्हा की गिरफ्तारी हुई। पूछताछ में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क करीब 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि अंचित गोयल की मुलाकात राजवीर सिंह से उसके चालक सतीश पांडेय के माध्यम से हुई थी। सतीश के पास से पुलिस ने 30 से अधिक मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए थे। इनका इस्तेमाल साइबर ठगी, बैंक खातों के संचालन और रकम के लेनदेन के लिए किया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम का एक हिस्सा अमेरिका के कैलिफोर्निया निवासी जेनिफर फ्लोरेंस नाम की महिला के खाते में भी भेजा गया था। विदेशी खाते में धनराशि ट्रांसफर होने के बाद पुलिस ने इस एंगल से भी जांच शुरू कर दी है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित महिला इस साइबर गिरोह का हिस्सा है या फिर उसका बैंक खाता किसी अन्य माध्यम से इस्तेमाल किया गया।

इस मामले में पुलिस ने अब तक साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े नौ आरोपियों को जेल भेज दिया है। जांच एजेंसियां लगातार नए संदिग्धों की तलाश कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि इस पूरे गिरोह में बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, मोबाइल नंबरों और जीएसटी दस्तावेजों का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया।

जांच में गाजियाबाद निवासी एक बीएसएफ जवान की बेटी के बैंक खाते से भी करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, इस खाते में पिछले एक साल के दौरान करीब 45 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। अब इस खाते की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि साइबर ठगी से जुटाई गई रकम किन-किन माध्यमों से अलग-अलग खातों में भेजी गई और इसमें कितने लोग शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे नेटवर्क का विस्तृत खुलासा किया जाएगा।

250 करोड़ रुपये की इस साइबर ठगी ने एक बार फिर फर्जी कंपनियों, नकली दस्तावेजों और बैंक खातों के दुरुपयोग के खतरे को उजागर किया है। पुलिस की कार्रवाई से उम्मीद है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंच बनाई जाएगी और साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए आगे और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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