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रामपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खां की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी के बाद अब उनके परिवार के सदस्यों पर भी जांच का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ईडी ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले की जांच तेज कर दी है। इस ट्रस्ट से आजम खां की पत्नी तजीन फातिमा, दोनों बेटे अदीब आजम और अब्दुल्ला आजम तथा बहन निकहत अफलाक भी जुड़े रहे हैं। ऐसे में जांच आगे बढ़ने पर परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, परिजनों के खिलाफ किसी नई गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईडी की जांच मुख्य रूप से रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी धन के दुरुपयोग और संदिग्ध लेन-देन से जुड़ी है। जांच एजेंसी का आरोप है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में बड़ी रकम खर्च की गई, लेकिन उसका पूरा हिसाब ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों में नहीं मिला है। इसी आधार पर एजेंसी ट्रस्ट से जुड़े वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
जौहर ट्रस्ट में परिवार के पांच सदस्य रहे शामिल
जानकारी के मुताबिक, आजम खां ने वर्ष 1990 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का गठन किया था। वह स्वयं इसके संस्थापक अध्यक्ष बने थे। उनकी पत्नी तजीन फातिमा को सचिव और बहन निकहत अफलाक को कोषाध्यक्ष बनाया गया था। वहीं, दोनों बेटों अदीब आजम और अब्दुल्ला आजम को ट्रस्ट में सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।
इसके अतिरिक्त मुश्ताक अहमद सिद्दीकी उपाध्यक्ष, चमरौवा से समाजवादी पार्टी के विधायक नसीर अहमद खां संयुक्त सचिव और सलीम कासिम सदस्य रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के नौ सदस्यों में पांच आजम खां के परिवार से संबंधित थे।
जांच एजेंसी का आरोप है कि ट्रस्ट के कुछ अन्य सदस्यों की भूमिका केवल नाममात्र की थी। हालांकि, इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया में पुष्टि होना अभी बाकी है।
सजा के बाद बदली गई ट्रस्ट की कार्यकारिणी
दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में सजा सुनाए जाने के बाद जौहर ट्रस्ट की कार्यकारिणी में बदलाव किए गए थे। आजम खां ने अपना, पत्नी तजीन फातिमा और छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम का नाम ट्रस्ट से हटवा दिया था।
बदली हुई कार्यकारिणी में आजम खां की बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष और बड़े बेटे अदीब आजम को सचिव बनाया गया। इसके अलावा मुश्ताक अहमद सिद्दीकी, नसीर अहमद खां, जावेद उर रहमान खान, मुमताज बी और शहरेयार सलीम को भी शामिल किया गया।
ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विश्वविद्यालय निर्माण और ट्रस्ट के वित्तीय फैसलों में किसकी कितनी भूमिका रही। जांच के दौरान पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों के वित्तीय दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
400 करोड़ से अधिक की रकम को लेकर सवाल
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च हुई रकम जांच का प्रमुख विषय है। ईडी के अनुसार, नवंबर 2023 की मूल्यांकन रिपोर्ट में विश्वविद्यालय परिसर की 59 इमारतों के निर्माण की लागत लगभग 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
दूसरी ओर, ट्रस्ट के आयकर दस्तावेजों में वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक लगभग 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दर्शाया गया था। इस अंतर को लेकर जांच एजेंसी ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
ईडी ने विश्वविद्यालय से जुड़ी लगभग 1,170 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य वाली जमीन और इमारतों को भी धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया है। एजेंसी के मुताबिक, जांच में लगभग 426.46 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान की गई है। ये रकम जांच एजेंसी के आकलन हैं, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
सरकारी धन के दुरुपयोग का भी आरोप
ईडी की जांच में विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सरकारी संसाधनों के कथित इस्तेमाल का मामला भी सामने आया है। एजेंसी का आरोप है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित धन और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय परिसर में किया गया।
इसके अतिरिक्त सरकारी ठेके हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों से रकम लेकर उसे ट्रस्ट को चंदे के रूप में देने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खां, जौहर ट्रस्ट और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें वित्तीय अनियमितताओं, कथित धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग से संबंधित आरोप शामिल हैं।
विधायक समेत कई लोगों से पूछताछ
जांच एजेंसी जौहर ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें चमरौवा विधानसभा क्षेत्र के सपा विधायक नसीर अहमद खां भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ के दौरान कुछ सदस्यों ने ट्रस्ट की बैठकों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनी सीमित भूमिका होने की बात कही थी। एजेंसी इन बयानों का मिलान उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड से कर रही है।
किसानों की जमीन से भी जुड़ा मामला
जौहर विश्वविद्यालय की जमीन को लेकर पहले दर्ज मुकदमे भी ईडी की जांच का हिस्सा हैं। जुलाई 2019 में अजीमनगर थाने में किसानों की जमीन पर कथित अवैध कब्जे से संबंधित 26 प्राथमिकी दर्ज हुई थीं।
आरोप था कि विश्वविद्यालय के लिए किसानों की कृषि भूमि हासिल करने में दबाव और धमकियों का इस्तेमाल किया गया। ईडी ने इन मामलों के साथ धोखाधड़ी, वसूली और जालसाजी से जुड़े अन्य मुकदमों को भी अपनी जांच में शामिल किया है।
गिरफ्तारी के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आजम खां
ईडी ने 31 अक्टूबर 2026 को आजम खां को गिरफ्तार किया था। इसके बाद गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उन्हें डासना जेल में रखा गया है।
आजम खां ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। उनकी याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईडी की जांच आजम खां के परिवार के अन्य सदस्यों तक पहुंचेगी। ट्रस्ट में उनकी पत्नी, बेटों और बहन की पूर्व भूमिकाओं को देखते हुए उनसे पूछताछ की संभावना बनी हुई है। हालांकि, केवल किसी ट्रस्ट का पदाधिकारी या सदस्य होना अपने आप में मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध सिद्ध नहीं करता। इसके लिए संबंधित व्यक्ति की कथित अवैध लेन-देन में भूमिका और कानूनी साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी होगा।





