उत्तर प्रदेश

बसपा में उत्तराधिकारी की उलझी गुत्थी आकाश के बाद ईशान पर मायावती की नजर

Kavita2
11 Sept 2026 9:10 AM IST
बसपा में उत्तराधिकारी की उलझी गुत्थी आकाश के बाद ईशान पर मायावती की नजर
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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राजनीति में इन दिनों परिवार और उत्तराधिकार का सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। बसपा सुप्रीमो मायावती पार्टी के भीतर पैदा हुई उथल-पुथल को शांत करने और संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार नए फैसले ले रही हैं। उनके इन कदमों को पार्टी की विरासत सुरक्षित रखने और भविष्य के नेतृत्व की तलाश से जोड़कर देखा जा रहा है। बड़े भतीजे आकाश आनंद को जिम्मेदारियां देने, फिर पद से हटाने और पार्टी से बाहर करने जैसे फैसलों के बाद अब छोटे भतीजे ईशान आनंद को आगे किए जाने की चर्चा ने बसपा की अंदरूनी राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है।

बसपा संस्थापक कांशीराम के बाद मायावती ने पार्टी की कमान संभाली और लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने चार बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनकर बसपा को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया। करीब 23 वर्ष की इस राजनीतिक यात्रा में मायावती ने संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण फैसले स्वयं लिए। पार्टी में उनका निर्णय अंतिम माना जाता रहा है। यही कारण है कि बसपा के भविष्य और राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर होने वाली प्रत्येक गतिविधि सीधे मायावती से जोड़कर देखी जाती है।

पिछले कुछ वर्षों में आकाश आनंद को मायावती के संभावित राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाने लगा था। उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं और राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने का दायित्व भी सौंपा गया। चुनावी सभाओं और संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता बढ़ी तो बसपा समर्थकों के बीच यह संदेश गया कि मायावती ने नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। युवाओं से संवाद और आक्रामक भाषण शैली के कारण आकाश ने अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास किया।

हालांकि आकाश आनंद को लेकर मायावती के फैसले कई बार बदले। उन्हें जिम्मेदारी देने के बाद पद से हटाया गया और फिर दोबारा संगठन में महत्वपूर्ण स्थान मिला। इसके बाद एक बार फिर उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त करते हुए पार्टी से बाहर करने का फैसला सामने आया। बार-बार हुए इन बदलावों ने बसपा की उत्तराधिकार योजना को लेकर असमंजस बढ़ा दिया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार इससे यह संकेत मिला कि मायावती किसी भी नेता को पूरी तरह स्वतंत्र नियंत्रण देने से पहले उसकी राजनीतिक परिपक्वता और संगठन के प्रति निष्ठा को परखना चाहती हैं।

आकाश आनंद से जुड़ी उथल-पुथल के बीच अब छोटे भतीजे ईशान आनंद को सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में आगे किए जाने की चर्चाएं तेज हैं। ईशान की मौजूदगी को बसपा की भावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से उन्हें उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया है, लेकिन उनके सक्रिय होने से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। यह सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती अब ईशान को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही हैं या उनकी भूमिका अभी सीमित रखी जाएगी।

मायावती के सामने चुनौती केवल अपना उत्तराधिकारी चुनने की नहीं है। उन्हें ऐसा नेतृत्व तैयार करना होगा जो बसपा के मूल सामाजिक आधार को एकजुट रख सके, पार्टी संगठन में स्वीकार्य हो और चुनावी राजनीति में विरोधियों का सामना कर सके। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बसपा का चुनावी प्रदर्शन कमजोर हुआ है। पार्टी का वोट प्रतिशत और विधानसभा तथा लोकसभा में प्रतिनिधित्व पहले की तुलना में कम हुआ है। ऐसे में नए नेतृत्व के सामने संगठन को पुनर्जीवित करने और पुराने समर्थकों को वापस जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

बसपा की राजनीति लंबे समय से मायावती के व्यक्तित्व के आसपास केंद्रित रही है। संगठन में उनके समान प्रभाव और जनाधार रखने वाला कोई दूसरा चेहरा अब तक सामने नहीं आया। पार्टी के कई पुराने और प्रभावशाली नेता समय-समय पर बसपा से अलग हो चुके हैं। इससे संगठन में दूसरी पंक्ति के नेतृत्व की कमी महसूस की जाती रही है। ऐसी स्थिति में उत्तराधिकारी का चयन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। गलत फैसला पार्टी के भीतर असंतोष पैदा कर सकता है जबकि सही नेतृत्व बसपा को नई राजनीतिक ऊर्जा दे सकता है।

परिवार के सदस्य को आगे बढ़ाने का फैसला भी मायावती के लिए आसान नहीं है। बसपा खुद को सामाजिक परिवर्तन और बहुजन हितों की पार्टी बताती रही है। ऐसे में विपक्ष परिवारवाद का आरोप लगाकर उसे घेर सकता है। दूसरी ओर मायावती के सामने भरोसे का सवाल भी है। पार्टी और राजनीतिक विरासत ऐसे व्यक्ति को सौंपना आवश्यक होगा जिस पर उन्हें संगठनात्मक और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर पूर्ण विश्वास हो। आकाश आनंद के मामले में आए बार-बार बदलावों ने इसी भरोसे की कसौटी को सबसे प्रमुख बना दिया है।

मायावती के हालिया फैसलों से यह भी साफ होता है कि वह अभी पार्टी की कमान पूरी तरह किसी दूसरे नेता को सौंपने की स्थिति में नहीं हैं। वह संगठन से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर सीधी नजर रख रही हैं और आवश्यकता के अनुसार फैसले बदलने से भी पीछे नहीं हट रही हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि यह अनुशासन बनाए रखने की रणनीति है, जबकि राजनीतिक विरोधी इसे उत्तराधिकारी को लेकर असमंजस के रूप में पेश कर रहे हैं।

ईशान आनंद को आगे करने की चर्चाओं के बावजूद बसपा का भविष्य फिलहाल मायावती के नेतृत्व से ही जुड़ा दिखाई देता है। आने वाले समय में ईशान को पार्टी में औपचारिक पद मिलता है या आकाश आनंद की वापसी का रास्ता खुलता है, इस पर सभी की नजर रहेगी। यह भी संभव है कि मायावती परिवार से बाहर किसी अनुभवी और भरोसेमंद नेता को बड़ी जिम्मेदारी दें। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बसपा में राजनीतिक विरासत और उत्तराधिकारी की तलाश पूरी नहीं हुई है। मायावती का अगला फैसला न केवल परिवार के भीतर चल रही हलचल बल्कि पार्टी की भावी दिशा भी निर्धारित कर सकता है।

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