उत्तर प्रदेश

सहारनपुर में बुलडोजर एक्शन के बाद प्रशासन अलर्ट सुरक्षा कड़ी

Ratna Netam
5 Sept 2026 2:24 PM IST
सहारनपुर में बुलडोजर एक्शन के बाद प्रशासन अलर्ट सुरक्षा कड़ी
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सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद पर शनिवार को प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। बैरिकेडिंग और पुलिस की मौजूदगी के कारण पूरा क्षेत्र छावनी जैसा नजर आया। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती और लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद में जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की।
सुबह-सुबह शुरू हुई बुलडोजर कार्रवाई
रिपोर्टों के मुताबिक शनिवार तड़के से ही कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की गतिविधियां बढ़ गई थीं। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के रास्तों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया और परिसर में प्रवेश को नियंत्रित किया गया। इसके बाद सुबह बुलडोजरों की मदद से मस्जिद के ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। किसी भी तरह की भीड़ जमा न हो और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित न हो, इसके लिए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
कलेक्ट्रेट में भारी फोर्स तैनात
मस्जिद से जुड़े मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट मोड पर था। कलेक्ट्रेट परिसर के अलावा आसपास के महत्वपूर्ण स्थानों पर भी पुलिसकर्मियों को लगाया गया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की और स्थानीय पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए।
प्रशासन का जोर इस बात पर रहा कि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध-प्रदर्शन या अप्रिय स्थिति पैदा न हो। पुलिस ने आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी। संवेदनशील इलाकों में भी अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाओं और अफवाहों को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई।
क्या है मस्जिद से जुड़ा पूरा विवाद?
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद और जमीन को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का पक्ष रहा है कि संबंधित भूमि सरकारी है और उस पर बना ढांचा अनधिकृत था। दूसरी ओर मस्जिद से जुड़े पक्ष ने अपने दावे के समर्थन में पुराने दस्तावेजों और रिकॉर्ड का हवाला दिया था।
मामला सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचा था। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने संबंधित जमीन को सरकारी मानते हुए परिसर खाली करने का आदेश दिया था। इसके बाद मस्जिद पक्ष ने इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी। जिला अदालत ने भी अपील पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया और निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया।
जिला अदालत के फैसले के बाद तेज हुई कार्रवाई
जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। मस्जिद पक्ष की अपील खारिज होने के कुछ दिन बाद ही कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई। शनिवार सुबह प्रशासनिक अमला मशीनों के साथ मौके पर पहुंचा और ढांचा हटाया गया।
प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। वहीं मस्जिद पक्ष की ओर से कार्रवाई के तरीके और समय को लेकर सवाल उठाए गए हैं। यही कारण है कि मामला अब प्रशासनिक और कानूनी विवाद के साथ राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।
पुराने रिकॉर्ड का हवाला देता रहा मस्जिद पक्ष
मस्जिद पक्ष की ओर से दावा किया जाता रहा है कि धार्मिक स्थल काफी पुराना है। अपने दावे के समर्थन में पुराने बिजली कनेक्शन और नगरपालिका से जुड़े दस्तावेजों समेत विभिन्न रिकॉर्ड का उल्लेख किया गया। पक्ष का कहना था कि इन रिकॉर्ड से मस्जिद के लंबे समय से मौजूद होने की पुष्टि होती है।
दूसरी तरफ प्रशासन ने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन को सरकारी बताया। यही विवाद अदालत में भी प्रमुख मुद्दा रहा। जिला अदालत में अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने अपने पुराने आदेश के अनुपालन की दिशा में कदम बढ़ाया।
6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का मामला भी चर्चा में
इस पूरे विवाद में करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति से जुड़ा आदेश भी चर्चा में रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश में सरकारी भूमि के कथित अनधिकृत इस्तेमाल से संबंधित क्षतिपूर्ति का उल्लेख किया गया था। मस्जिद पक्ष ने इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन जिला अदालत से उसे राहत नहीं मिली।
हालांकि ध्वस्तीकरण और क्षतिपूर्ति से जुड़े कानूनी पहलुओं को लेकर दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हैं। ऐसे में आगे उच्च अदालत में चुनौती दिए जाने की स्थिति में इन पहलुओं पर दोबारा न्यायिक परीक्षण हो सकता है।
सियासत भी हुई तेज
मस्जिद पर बुलडोजर चलने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कार्रवाई का विरोध करते हुए मुसलमानों के संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों का सवाल उठाया। उन्होंने मस्जिद के पुराने होने से जुड़े रिकॉर्ड का हवाला देते हुए प्रशासन की कार्रवाई की आलोचना की।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी कार्रवाई का विरोध किया है। उन्होंने इस मामले में कानूनी विकल्प अपनाने की बात कही। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने धार्मिक स्थल के मामले में जल्दबाजी दिखाई, जबकि प्रशासन इसे सरकारी जमीन से अनधिकृत निर्माण हटाने की कार्रवाई बता रहा है।
इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका
समाजवादी पार्टी की कैराना सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि मस्जिद पर कार्रवाई के बाद उन्हें सहारनपुर जाने से रोक दिया गया और उनके आवास के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई। इसे लेकर उनकी पुलिस अधिकारियों से बहस भी हुई। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया।
पुलिस-प्रशासन का फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर रहा। इसी वजह से विभिन्न राजनीतिक नेताओं की गतिविधियों और संभावित विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई।
सोशल मीडिया पर भी पुलिस की नजर
इस तरह के संवेदनशील मामलों में सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचना तेजी से फैलने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी निगरानी बढ़ाई है। अधिकारियों ने लोगों से अपुष्ट पोस्ट, वीडियो या संदेश साझा नहीं करने की अपील की है।
पुलिस का कहना है कि माहौल बिगाड़ने वाली अफवाह या भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा है।
प्रशासन की नजर कानून-व्यवस्था पर
बुलडोजर कार्रवाई पूरी होने के बाद भी प्रशासन की सतर्कता कम नहीं हुई है। कलेक्ट्रेट और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारी हालात का जायजा ले रहे हैं और जरूरत के मुताबिक सुरक्षा इंतजामों में बदलाव किया जा सकता है।
फिलहाल प्रशासन अपनी कार्रवाई को अदालत के फैसले और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है। दूसरी ओर मस्जिद पक्ष और विपक्षी नेता इसे चुनौती देने की बात कर रहे हैं। ऐसे में सहारनपुर का यह मामला आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में बना रह सकता है।
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