उत्तर प्रदेश

चढ़ावा अनियमितता पर प्रशासन सख्त, SIT करेगी पड़ताल

Saba Naaz
25 July 2026 8:15 PM IST
चढ़ावा अनियमितता पर प्रशासन सख्त, SIT करेगी पड़ताल
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प्रयागराज। सिविल लाइंस स्थित श्रीहनुमत निकेतन हनुमान मंदिर में चढ़ावा राशि और अन्य आय में अनियमितता के आरोपों की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) करेगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) हर्षिका सिंह ने तीन पीसीएस अधिकारियों की जांच कमेटी गठित कर दी है। इस एसआईटी को पूरे मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

मंदिर में चढ़ावे की धनराशि, दुकानों और भवनों से मिलने वाले किराये समेत अन्य आय में गड़बड़ी की शिकायत जिलाधिकारी (DM) से की गई थी। इसके बाद जिलाधिकारी ने जांच की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी थी। अब सीडीओ की निगरानी में गठित एसआईटी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।

जांच कमेटी में अपर नगर आयुक्त, सिटी मजिस्ट्रेट और एसीएम तृतीय को शामिल किया गया है। अधिकारियों को मंदिर की आय, दानपात्रों से मिलने वाली राशि, पुराने रिकॉर्ड, प्रबंधन व्यवस्था और लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है।

दरअसल, सिविल लाइंस स्थित श्रीहनुमत निकेतन मंदिर में चढ़ावे की राशि और अन्य आय को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है। मंदिर प्रबंधन और दर्शनार्थी पक्ष के बीच आय-व्यय को लेकर मतभेद सामने आए थे। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंच गया था।

अदालत ने जिलाधिकारी को मंदिर का रिसीवर नियुक्त किया था। इसके बाद एडीएम आपूर्ति विजय कुमार शर्मा को रिसीवर की जिम्मेदारी दी गई। रिसीवर नियुक्त होने के बाद मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों के अधिकारों पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।

हालांकि, दर्शनार्थी पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि रिसीवर नियुक्त होने के बाद भी मंदिर की व्यवस्थाओं में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ। दर्शनार्थी पक्ष के अधिवक्ताओं एसके दुबे और शिवगोपाल ने आरोप लगाया कि मंदिर की व्यवस्था अभी भी पुराने प्रबंधन से जुड़े लोगों के प्रभाव में है।

अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि रिसीवर नियुक्त होने के बावजूद पुराने दानपात्रों की चाबियां रिसीवर को नहीं सौंपी गईं। इसके कारण दानपात्रों में जमा राशि की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि नए दानपात्रों में आने वाली धनराशि की गिनती भी ट्रस्टियों और दर्शनार्थी पक्ष की मौजूदगी में नहीं कराई जा रही है।

दर्शनार्थी पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर के पुराने 18 दानपात्रों से चढ़ावे की राशि निकाली गई है और इसमें अनियमितता की आशंका है। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

एसआईटी अब मंदिर से जुड़े दस्तावेजों, आय-व्यय के रिकॉर्ड, दानपात्रों की स्थिति, किराये से होने वाली आय और प्रबंधन व्यवस्था की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सभी पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

प्रशासन का उद्देश्य मंदिर की आय और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में चढ़ावा राशि में किसी तरह की अनियमितता हुई है।

फिलहाल एसआईटी ने जांच की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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