उत्तर प्रदेश

कोडीन सीरप कांड में तीसरी एजेंसी पर एक्शन ओम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस होगा निरस्त

Kavita2
22 Sept 2026 6:00 PM IST
कोडीन सीरप कांड में तीसरी एजेंसी पर एक्शन ओम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस होगा निरस्त
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हमीरपुर: कोडीनयुक्त कफ सीरप से जुड़े मामले में औषधि विभाग की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब मामले से जुड़ी तीसरी मेडिकल एजेंसी पर कार्रवाई की तैयारी है। मुख्य आरोपी बताए जा रहे प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन के बहनोई रवींद्र गुप्ता की हमीरपुर के टेढ़ा मोड़ स्थित ओम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। विभाग के अनुसार एजेंसी संचालक को नोटिस देकर जवाब मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं मिलने के बाद लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है।

औषधि निरीक्षक दिव्य प्रकाश मौर्य ने ओम मेडिकल एजेंसी के संचालक को नोटिस जारी कर कोडीनयुक्त कफ सीरप के कथित कारोबार से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। विभाग के मुताबिक तय समय में नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

लाइसेंस निरस्तीकरण का पत्र तैयार

सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार के अनुसार मंगलवार को ओम मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस निरस्तीकरण से संबंधित पत्र तैयार कर लिया गया है। अब केवल आवश्यक औपचारिक कार्रवाई पूरी की जानी है।

विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुधवार को एजेंसी का लाइसेंस निरस्त किए जाने की बात कही गई है। इस कार्रवाई के बाद संबंधित एजेंसी दवा कारोबार से जुड़ी गतिविधियां नियमानुसार संचालित नहीं कर सकेगी।

औषधि विभाग इस मामले में दस्तावेजों, खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और कोडीनयुक्त कफ सीरप की सप्लाई से संबंधित कड़ियों की जांच कर रहा है।

तीन सितंबर को पकड़ी गई खेप से जुड़ा बिल

ओम मेडिकल एजेंसी का नाम उस समय जांच के दायरे में आया, जब तीन सितंबर को पकड़ी गई कोडीनयुक्त कफ सीरप की खेप से संबंधित एक बिल एजेंसी के नाम का मिला।

इसके बाद औषधि विभाग ने एजेंसी के रिकॉर्ड की जांच शुरू की। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि बिल किस परिस्थिति में जारी किया गया था, सीरप की खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड क्या था और खेप किसके लिए भेजी गई थी।

मामले में बिल और अन्य दस्तावेज जांच के महत्वपूर्ण आधार बने हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही एजेंसी और इससे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

संचालक को भेजा गया था नोटिस

औषधि निरीक्षक दिव्य प्रकाश मौर्य ने ओम मेडिकल एजेंसी के संचालक को नोटिस देकर कोडीनयुक्त कफ सीरप के कारोबार से संबंधित कई बिंदुओं पर जवाब मांगा था।

नोटिस में विभाग ने एजेंसी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।

जवाब नहीं मिलने के बाद विभाग ने उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। अब एजेंसी के दवा लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

तीसरी एजेंसी तक पहुंची कार्रवाई

कोडीनयुक्त कफ सीरप से जुड़े इस मामले में यह तीसरी मेडिकल एजेंसी है, जिसके खिलाफ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई की स्थिति बनी है।

इससे संकेत मिलता है कि औषधि विभाग केवल बरामद खेप तक सीमित न रहकर उसकी सप्लाई चेन से जुड़ी कड़ियों को भी खंगाल रहा है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सीरप किन एजेंसियों के माध्यम से खरीदा और बेचा गया तथा उसका अंतिम गंतव्य क्या था।

हालांकि जांच के दौरान सामने आए दस्तावेज और बिल अपने आप में आपराधिक दोष साबित नहीं करते। संबंधित व्यक्तियों या प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी विभागीय और कानूनी जांच के आधार पर ही तय होगी।

मुख्य आरोपी के रिश्तेदार की बताई गई एजेंसी

ओम मेडिकल एजेंसी का संचालन रवींद्र गुप्ता से जुड़ा बताया गया है। रवींद्र गुप्ता को मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन का बहनोई बताया गया है।

इसी कारण एजेंसी के दस्तावेज जांच में विशेष रूप से देखे जा रहे हैं। विभाग के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कोडीनयुक्त कफ सीरप की खेप से संबंधित बिल एजेंसी के नाम कैसे आया और उसके रिकॉर्ड में इससे जुड़ी खरीद-बिक्री का विवरण क्या है।

इन सवालों के जवाब के लिए विभाग ने एजेंसी संचालक को नोटिस जारी किया था।

कोडीनयुक्त सीरप की सप्लाई चेन की जांच

कोडीन युक्त कफ सीरप चिकित्सकीय उपयोग में आने वाली दवाओं की श्रेणी में होता है, लेकिन इसके दुरुपयोग की आशंका के कारण इसकी बिक्री और वितरण से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होते हैं।

ऐसे मामलों में औषधि विभाग दवा के स्टॉक, खरीद बिल, बिक्री बिल और सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि दवा वैध चैनल के माध्यम से निर्धारित उद्देश्य के लिए बेची गई या उसके वितरण में नियमों का उल्लंघन हुआ।

ओम मेडिकल एजेंसी के मामले में भी विभाग रिकॉर्ड के आधार पर पूरे लेन-देन की कड़ी समझने की कोशिश कर रहा है।

दस्तावेजों की जांच बनी अहम

तीन सितंबर को बरामद बताई गई खेप से संबंधित बिल मिलने के बाद एजेंसी के दस्तावेज जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।

अब विभाग यह देख रहा है कि संबंधित बिल वास्तविक खरीद-बिक्री रिकॉर्ड से मेल खाता है या नहीं। इसके अलावा एजेंसी के स्टॉक रजिस्टर और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच भी मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

यदि जांच के दौरान अन्य मेडिकल एजेंसियों या व्यक्तियों के नाम सामने आते हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।

विभागीय और आपराधिक जांच अलग-अलग

इस मामले में औषधि विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से दवा लाइसेंस और नियमों के पालन से जुड़ी है। वहीं कथित अवैध कारोबार या तस्करी से जुड़े आपराधिक आरोपों की जांच संबंधित जांच एजेंसी और पुलिस के स्तर पर की जाएगी।

लाइसेंस निरस्तीकरण एक विभागीय कार्रवाई है और इसे किसी व्यक्ति के आपराधिक दोष का अंतिम निर्धारण नहीं माना जा सकता। आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

बुधवार को पूरी हो सकती है कार्रवाई

सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार के मुताबिक लाइसेंस निरस्तीकरण का पत्र मंगलवार को तैयार कर लिया गया है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बुधवार को ओम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस निरस्त किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

तीन सितंबर को पकड़ी गई कोडीनयुक्त कफ सीरप की खेप से जुड़े बिल के आधार पर शुरू हुई जांच अब तीसरी एजेंसी तक पहुंच गई है। आने वाले दिनों में दस्तावेजों और सप्लाई चेन की जांच से इस मामले में और कड़ियां सामने आ सकती हैं।

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