उत्तर प्रदेश

बॉर्डर पर तस्करी के खिलाफ कार्रवाई, शराब की बड़ी खेप जब्त

Rajeshwari Nishad
2 Nov 2026 3:46 PM IST
बॉर्डर पर तस्करी के खिलाफ कार्रवाई, शराब की बड़ी खेप जब्त
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महराजगंज: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शराब तस्करी का कारोबार लगातार सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। तस्कर निगरानी से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कभी कारों में छिपाकर तो कभी अन्य वाहनों और रास्तों के जरिए अंग्रेजी शराब की खेप नेपाल पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सोनौली सीमा से लेकर नेपाल के महेशपुर क्षेत्र तक हाल के दिनों में हुई कई कार्रवाइयों ने इस अवैध कारोबार की सक्रियता उजागर की है। इसी कड़ी में रविवार तड़के आराजी सरकार उर्फ बैरिहवा पुल के पास पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 648 बोतल अंग्रेजी शराब के साथ तीन कथित तस्करों को गिरफ्तार किया। पकड़ी गई शराब को नेपाल ले जाने की तैयारी थी।
इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय शराब तस्करी के नेटवर्क को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लगातार हो रही बरामदगी से संकेत मिल रहे हैं कि सीमावर्ती इलाकों में तस्कर शराब की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
रविवार तड़के हुई कार्रवाई, 648 बोतल शराब बरामद
जानकारी के अनुसार, रविवार तड़के सुरक्षा एजेंसियों को आराजी सरकार उर्फ बैरिहवा पुल के आसपास शराब की तस्करी किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर संबंधित टीम ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी।
इसी दौरान तीन संदिग्ध व्यक्ति शराब की खेप के साथ दिखाई दिए। टीम ने घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से 648 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद हुई। शराब की इतनी बड़ी खेप मिलने के बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों ने आरोपियों से पूछताछ शुरू की।प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बरामद शराब को भारत से नेपाल पहुंचाने की योजना थी। सुरक्षा एजेंसियों ने शराब को कब्जे में लेकर आरोपियों को हिरासत में लिया और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
नेपाल पहुंचाने के लिए अपनाते हैं अलग-अलग तरीके
भारत-नेपाल सीमा पर शराब तस्करी का कारोबार लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा होने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही काफी अधिक रहती है। इसी का फायदा उठाकर कुछ तस्कर अवैध सामान को एक देश से दूसरे देश में पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
तस्करी के लिए कभी निजी कारों का इस्तेमाल किया जाता है तो कभी छोटे वाहनों और अन्य
माध्यमों
से शराब की खेप ले जाने का प्रयास होता है। कई मामलों में शराब को वाहनों के अलग-अलग हिस्सों में छिपाकर ले जाने की कोशिश भी सामने आती रही है।सोनौली सीमा और आसपास के रास्ते तस्करों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वहीं नेपाल के महेशपुर क्षेत्र तक शराब पहुंचाने के लिए भी अलग-अलग मार्गों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका रहती है।
सोनौली से महेशपुर तक सक्रिय है तस्करी का नेटवर्क
हाल के दिनों में भारत-नेपाल सीमा के सोनौली क्षेत्र से लेकर नेपाल के महेशपुर इलाके तक शराब की कई खेप पकड़ी गई हैं। लगातार हो रही कार्रवाइयों से पता चलता है कि तस्करी की कोशिशें अलग-अलग स्थानों पर की जा रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती इलाकों में वाहनों की जांच, संदिग्ध लोगों की निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं। इसके बावजूद तस्कर नए रास्तों और तरीकों की तलाश में रहते हैं।रविवार को बैरिहवा पुल के पास 648 बोतल शराब के साथ तीन लोगों की गिरफ्तारी को इसी अभियान की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि बरामद शराब कहां से लाई गई थी और इसे नेपाल में किस व्यक्ति या नेटवर्क तक पहुंचाया जाना था।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आ सकते हैं अहम सुराग
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां तस्करी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं। पूछताछ के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि शराब की खेप किस स्थान से उठाई गई थी, इसकी आपूर्ति किसने की थी और नेपाल में इसे कहां पहुंचाया जाना था।इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या तीनों आरोपी किसी बड़े तस्करी गिरोह के लिए काम कर रहे थे या इस कारोबार को स्थानीय स्तर पर संचालित किया जा रहा था।
अधिकारियों के लिए यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि इस नेटवर्क में शराब के आपूर्तिकर्ता, परिवहनकर्ता और नेपाल में खरीददार कौन हैं। यदि इस कारोबार के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है, तो उसके अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए भी जांच की जा सकती है।
सीमा पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत
भारत और नेपाल के बीच पारंपरिक रूप से सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। खुली सीमा के कारण दोनों देशों के नागरिकों का आवागमन भी लगातार होता रहता है। ऐसे में वैध आवाजाही को प्रभावित किए बिना अवैध तस्करी पर रोक लगाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।शराब की अवैध तस्करी से सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा अवैध कारोबार से जुड़े संगठित गिरोह सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां बढ़ा सकते हैं।इसलिए सीमा पर नियमित गश्त, संदिग्ध वाहनों की जांच, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान और दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी है।
लगातार कार्रवाई से तस्करों पर कस रहा शिकंजा
सीमा क्षेत्र में लगातार पकड़ी जा रही शराब की खेप से सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता सामने आई है। हालांकि, केवल खेप बरामद करना पर्याप्त नहीं है। तस्करी के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की पहचान और उसके वित्तीय लेन-देन की जांच भी जरूरी है।बैरिहवा पुल के पास 648 बोतल शराब के साथ तीन लोगों की गिरफ्तारी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई है। अब देखना होगा कि पूछताछ और जांच के दौरान इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के बारे में क्या जानकारी सामने आती है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों ने बरामद शराब को कब्जे में लेकर तीनों आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। भारत-नेपाल सीमा पर शराब तस्करी रोकने के लिए निगरानी और जांच अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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