उत्तर प्रदेश

चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों को लेकर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान

Ratna Netam
4 Oct 2026 9:56 PM IST
चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों को लेकर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान
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संभल : कांग्रेस के पूर्व नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से की जा रही आलोचना पर सवाल उठाए हैं। रविवार को उन्होंने विपक्षी नेताओं से इस मुद्दे पर आत्म-मंथन करने की अपील करते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने से पहले सांसदों को अपनी स्थिति पर भी विचार करना चाहिए।प्रमोद कृष्णम की यह टिप्पणी समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित पैदल मार्च के जवाब में सामने आई। उन्होंने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर ही संदेह किया जा रहा है तो उन्हीं चुनावों के जरिए निर्वाचित हुए जनप्रतिनिधियों को अपने पदों को लेकर भी विचार करना चाहिए।
अवधेश प्रसाद के बयान पर पलटवार
प्रमोद कृष्णम ने समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद को निशाने पर लेते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर आरोप लगाने से पहले विपक्षी सांसदों को यह बताना चाहिए कि अगर चुनावी प्रक्रिया ही गलत थी तो वे लोकसभा के सदस्य कैसे बने।उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त को चोर कहने से पहले, इन सभी सांसदों को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर ज्ञानेश कुमार चोर हैं, अगर वे गलत हैं, अगर वे बेईमान हैं, तो अवधेश प्रसाद सांसद कैसे बने? वे लोकसभा के सदस्य कैसे बने?”कृष्णम के इस बयान के बाद चुनाव आयोग को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों में विरोधाभास होने की बात कहते हुए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की वैधता का सवाल उठाया।
विपक्ष से आत्म-मंथन की अपील
प्रमोद कृष्णम ने कहा कि विपक्षी दलों को चुनाव आयोग के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने से पहले आत्म-मंथन करना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी संवैधानिक संस्था और उसके अधिकारियों पर आरोप लगाना गंभीर विषय है और ऐसे आरोपों के साथ राजनीतिक दलों को अपने रुख में स्पष्टता रखनी चाहिए।उनका तर्क था कि अगर विपक्ष चुनाव आयोग की पूरी प्रक्रिया को ही संदेह के घेरे में रखता है तो उसी प्रक्रिया के माध्यम से निर्वाचित सांसदों को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।उन्होंने विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष को घेरा। कृष्णम ने सवाल किया कि यदि विपक्ष को चुनाव आयोग पर इतना अविश्वास है तो उसके निर्वाचित प्रतिनिधि अपने पदों पर क्यों बने हुए हैं।
पैदल मार्च को लेकर शुरू हुई बहस
यह बयान समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित पैदल मार्च के संदर्भ में आया है। चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं।इसी क्रम में पैदल मार्च की बात सामने आने के बाद प्रमोद कृष्णम ने विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते समय राजनीतिक नेताओं को अपने तर्कों पर भी विचार करना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच प्रमोद कृष्णम का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी सामने आई है।वहीं, कृष्णम ने इस मांग को आधार बनाकर विपक्ष से ही सवाल पूछे हैं। उनका कहना है कि अगर चुनाव आयोग की निष्पक्षता को पूरी तरह खारिज किया जा रहा है तो चुनाव जीतकर संसद पहुंचे नेताओं को भी यह बताना चाहिए कि उनकी सदस्यता को किस आधार पर सही माना जाए।
संवैधानिक संस्था को लेकर सियासी टकराव
चुनाव आयोग देश में चुनाव प्रक्रिया के संचालन से जुड़ी संवैधानिक संस्था है। राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और अन्य फैसलों को लेकर समय-समय पर आयोग के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराते रहे हैं।मौजूदा विवाद में विपक्षी नेताओं की ओर से आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर तीखी टिप्पणियां सामने आने के बाद राजनीतिक टकराव बढ़ा है। प्रमोद कृष्णम ने इसी विवाद में विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि सांसदों को पहले अपने पदों के बारे में सोचना चाहिए।उनका बयान सीधे तौर पर इस सवाल पर केंद्रित रहा कि चुनाव आयोग पर अविश्वास जताने वाले नेता उसी चुनावी व्यवस्था से मिले जनादेश को किस तरह स्वीकार कर रहे हैं।
विपक्ष की रणनीति पर उठाए सवाल
कृष्णम ने विपक्ष के प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाने के बजाय विपक्ष को अपने राजनीतिक रुख पर विचार करना चाहिए।उनके बयान का मुख्य आधार यह रहा कि चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप और चुनाव के परिणामों को स्वीकार करना एक साथ कैसे संभव है। उन्होंने अवधेश प्रसाद का उदाहरण देते हुए इसी मुद्दे को सामने रखा।हालांकि, विपक्ष चुनाव आयोग को लेकर अपनी अलग चिंताएं और आपत्तियां जाहिर करता रहा है। ऐसे में प्रमोद कृष्णम की टिप्पणी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर को जन्म दे सकती है।
चुनाव आयोग के मुद्दे पर बढ़ी सियासत
चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष और उसके आलोचकों के बीच चल रही बहस अब और तेज होती दिखाई दे रही है। एक तरफ विपक्षी नेता आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं और विरोध कार्यक्रमों की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रमोद कृष्णम जैसे नेता इन आरोपों को लेकर विपक्ष की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं।प्रमोद कृष्णम ने साफ तौर पर कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को गलत या बेईमान बताने वाले सांसदों को पहले अपने पद से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए। अवधेश प्रसाद को लेकर उनका सवाल भी इसी तर्क पर आधारित रहा कि अगर चुनाव कराने वाली संस्था पर भरोसा नहीं है तो उसी प्रक्रिया के जरिए मिली लोकसभा सदस्यता को स्वीकार करने का आधार क्या है।फिलहाल चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी राजनीतिक विवाद में प्रमोद कृष्णम की टिप्पणी ने एक नया पक्ष जोड़ दिया है। अब इस बयान पर समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।
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