उत्तर प्रदेश

बैंक ऑफ बड़ौदा में फर्जी दस्तावेज से 39.70 लाख का लोन लेने का आरोप

Kavita2
25 Aug 2026 4:38 PM IST
बैंक ऑफ बड़ौदा में फर्जी दस्तावेज से 39.70 लाख का लोन लेने का आरोप
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गोरखपुर। बैंक ऑफ बड़ौदा में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 39.70 लाख रुपये का लोन लेने के मामले में फरार चल रहे सिपाही नितेश कुमार यादव को कैंट थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से फरार नितेश पर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। विदेश से लौटने के दौरान 23 अगस्त को उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया। इसके बाद कैंट पुलिस उसे गोरखपुर लेकर आई।

मंगलवार को पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अब मामले में शामिल अन्य आरोपितों की भूमिका और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

विदेश से लौटते समय दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया

पुलिस के मुताबिक, 33 वर्षीय नितेश कुमार यादव देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र के जोगउर गांव का रहने वाला है। बैंक से जुड़े कथित लोन फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज होने के बाद वह फरार चल रहा था।

पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए। इसी दौरान उसके विदेश से लौटने की जानकारी सामने आई। 23 अगस्त को दिल्ली एयरपोर्ट पर उसे हिरासत में लिया गया। बाद में कैंट थाना पुलिस उसे गोरखपुर लेकर पहुंची।

पूछताछ और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद मंगलवार को उसे अदालत में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर आरोपी को जेल भेज दिया गया।

छह लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा

बैंक ऑफ बड़ौदा गोरखपुर के उप क्षेत्रीय प्रमुख आशीष सिंह ने 16 अगस्त 2024 को कैंट थाने में नितेश यादव समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उनका इस्तेमाल करने और कथित जालसाजी के आरोप लगाए गए थे।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने के साथ कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक से लोन हासिल करने की प्रक्रिया से जुड़े कई तथ्य सामने आए।

पुलिस जांच में एमओयू के दुरुपयोग का दावा

पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपितों ने उत्तर प्रदेश पुलिस और बैंक ऑफ बड़ौदा के बीच हुए एमओयू का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उनके आधार पर लोन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

जांच में पुलिस को कथित तौर पर फर्जी पुलिस पहचान पत्र, वेतन पर्ची, फार्म-16, बैंक स्टेटमेंट और कर्मचारी सत्यापन रिपोर्ट से संबंधित जानकारी मिली। पुलिस का आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक के सामने संबंधित व्यक्तियों की पहचान और नौकरी से जुड़े विवरण को सही दिखाने के लिए किया गया।

साथियों के नाम पर खाते खुलवाने का आरोप

पुलिस के अनुसार, नितेश ने कथित तौर पर अपने साथियों के नाम पर पीएसपी बचत खाते खुलवाने में भी भूमिका निभाई। इन खातों के लिए कर्मचारी से संबंधित दस्तावेज और सत्यापन रिपोर्ट तैयार कराए जाने की बात जांच में सामने आई है।

इसके बाद कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लोन हासिल किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि लोन की पूरी रकम किसके खाते में गई और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।

बैंक की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

39.70 लाख रुपये के कथित लोन फर्जीवाड़े ने बैंकिंग प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेज बैंक की जांच प्रक्रिया में कैसे पास हुए और लोन स्वीकृत करने के दौरान किन स्तरों पर दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था।

साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि मामले में शामिल छह आरोपितों के बीच क्या भूमिका तय थी और किसने कौन-सा दस्तावेज तैयार कराया या उपलब्ध कराया।

अन्य आरोपितों की भूमिका की जांच जारी

नितेश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उम्मीद है कि मामले की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। पुलिस अन्य नामजद आरोपितों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने, बैंक खातों के इस्तेमाल और लोन की रकम से जुड़े लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए किसी संगठित नेटवर्क की मदद ली गई थी या आरोपितों ने स्वयं पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया।

न्यायालय ने भेजा जेल

फिलहाल नितेश कुमार यादव को अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। उसके खिलाफ दर्ज मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और लोन की रकम से जुड़े पूरे लेन-देन की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

बैंक ऑफ बड़ौदा में 39.70 लाख रुपये के कथित लोन फर्जीवाड़े का यह मामला अब पुलिस जांच के अहम चरण में है। फरार चल रहे आरोपी सिपाही की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की नजर अब मामले के अन्य आरोपितों और फर्जी दस्तावेजों के पूरे नेटवर्क पर है।

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