उत्तर प्रदेश

लोक सेवकों की गलती पर तय हो जवाबदेही, उद्दंड व्यवहार पर जरूरी है अंकुश: सीएम योगी

Kavita2
14 Sept 2026 3:13 PM IST
लोक सेवकों की गलती पर तय हो जवाबदेही, उद्दंड व्यवहार पर जरूरी है अंकुश: सीएम योगी
x

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक पारदर्शिता और लोक सेवकों की जवाबदेही पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी अधिकारी अथवा कर्मचारी गलत कार्य करता है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अधिकार मिलने के बाद किसी व्यक्ति में उच्छृंखलता और उद्दंडता आने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में संवैधानिक एवं वैधानिक संस्थाओं का अंकुश आवश्यक है, ताकि शासन व्यवस्था निर्धारित मर्यादाओं के अनुरूप संचालित होती रहे।

मुख्यमंत्री सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोकायुक्त जैसी संस्थाओं को सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायतों का निस्तारण तथ्यों और मेरिट के आधार पर होना चाहिए। इससे लोक सेवकों में जनता के प्रति जवाबदेही का अहसास पैदा होता है और आम नागरिक का शासन व्यवस्था में भरोसा बढ़ता है।

मुख्यमंत्री ने रामचरितमानस की प्रसिद्ध पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए अधिकार और पद के दुरुपयोग की प्रवृत्ति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ताकत मिलने के बाद व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आ सकता है। ऐसे में कोई ऐसी संस्था अवश्य होनी चाहिए, जो उसे मर्यादा का पालन कराए और गलत आचरण होने पर जवाबदेही सुनिश्चित करे।

लोकतंत्र की ताकत है जनता का विश्वास

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी संवैधानिक अथवा वैधानिक संस्था के प्रति आम नागरिक का विश्वास लोकतंत्र की बड़ी ताकत है। यदि जनता का भरोसा समाप्त हो जाए तो संस्था की उपयोगिता और स्वीकार्यता दोनों प्रभावित होती हैं। इसलिए लोकायुक्त जैसे संगठनों को निष्पक्षता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिकायत करने वाले व्यक्ति को यह विश्वास होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जाएगी और बिना किसी दबाव अथवा पक्षपात के तथ्यों की जांच होगी। वहीं, लोक सेवक को भी भरोसा होना चाहिए कि उसके खिलाफ आई शिकायत का फैसला प्रमाण और मेरिट के आधार पर किया जाएगा। दोनों पक्षों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना संस्था की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी शिकायत के आधार पर लोक सेवक को पहले ही दोषी मान लेना उचित नहीं है। दूसरी तरफ गंभीर शिकायत को केवल इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि वह किसी प्रभावशाली अधिकारी के विरुद्ध है। निष्पक्ष प्रक्रिया ही शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत कर सकती है। लोकायुक्त के 50वें स्थापना दिवस कार्यक्रम की रिपोर्ट

मेरिट के आधार पर हो शिकायतों का निस्तारण

मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त संगठन की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्था के पास आने वाली शिकायतों का समाधान योग्यता, तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए। इससे न केवल पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलने की संभावना बढ़ती है, बल्कि ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल भी सुरक्षित रहता है।

लोकायुक्त का काम लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों की जांच करना है। ऐसी संस्था सरकारी तंत्र और जनता के बीच जवाबदेही की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। किसी मामले में शिकायत सही पाए जाने पर सक्षम स्तर पर कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संस्थाओं को अपनी कार्यप्रणाली ऐसी बनानी चाहिए कि आम नागरिक को शिकायत दर्ज कराने और उसकी प्रगति जानने में कठिनाई न हो। तकनीक के उपयोग से शिकायत प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकता है।

तकनीक से भ्रष्टाचार रोकने पर जोर

मुख्यमंत्री ने शासन की विभिन्न व्यवस्थाओं में तकनीक का उपयोग बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीकी सुधारों के माध्यम से हेराफेरी की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए व्यवस्था को पारदर्शी बनाना जरूरी है।

उन्होंने जमीन की पैमाइश और राजस्व संबंधी मामलों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। भूमि विवाद आम लोगों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनते हैं। पैमाइश और अभिलेख की प्रक्रिया में तकनीक का प्रभावी उपयोग होने से बिचौलियों का हस्तक्षेप कम किया जा सकता है और विवादों के समाधान में तेजी लाई जा सकती है।

मुख्यमंत्री का कहना था कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं जितनी स्पष्ट और डिजिटल होंगी, मनमानी तथा भ्रष्टाचार की गुंजाइश उतनी ही कम होगी। इससे सरकारी कर्मचारियों के काम की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। कार्यक्रम में जवाबदेही और तकनीकी सुधार पर मुख्यमंत्री का वक्तव्य

अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकारी पद केवल अधिकार का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की सेवा की जिम्मेदारी है। लोक सेवक को कानून और निर्धारित नियमों के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए। पद का उपयोग निजी लाभ, पक्षपात अथवा किसी व्यक्ति को परेशान करने के लिए नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अच्छी व्यवस्था वह है जिसमें गलत कार्य करने वाले की जवाबदेही तय हो और ईमानदारी से कर्तव्य निभाने वाले कर्मचारी को संरक्षण मिले। शिकायत निवारण प्रणाली का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि प्रशासन में सुधार लाना और गलतियों की पुनरावृत्ति रोकना भी होना चाहिए।

लोकायुक्त जैसी संस्थाएं अपनी सिफारिशों और जांच के माध्यम से शासन को यह समझने में मदद करती हैं कि व्यवस्था में कमियां कहां हैं। इन कमियों को दूर कर सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली अधिक जनहितैषी बनाई जा सकती है।

अगले 50 वर्षों के लिए रोडमैप की जरूरत

लोकायुक्त संगठन के 50 वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री ने भविष्य के लिए एक व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अब अगले 50 वर्षों की चुनौतियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संगठन को अपना रोडमैप बनाना चाहिए।

शिकायतों की बढ़ती संख्या, डिजिटल साक्ष्य, ऑनलाइन सेवाएं और बदलती प्रशासनिक संरचना को देखते हुए जांच प्रणाली को भी आधुनिक बनाना होगा। लंबित मामलों को कम करने, शिकायतों की प्राथमिकता तय करने और समयबद्ध निस्तारण के लिए स्पष्ट व्यवस्था विकसित करनी होगी।

मुख्यमंत्री का संबोधन लोक सेवकों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अधिकार के साथ जवाबदेही भी जुड़ी है। जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए निष्पक्ष संस्थाएं, पारदर्शी प्रक्रिया और गलत आचरण पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।

Next Story