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उत्तर प्रदेश
कोर्ट पहुंचे अब्बास और निकहत सुरक्षा की मांग ने खींचा ध्यान
Ratna Netam
10 Sept 2026 10:03 PM IST

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बांदा : उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चित अंसारी परिवार एक बार फिर सुर्खियों में है। दिवंगत माफिया-राजनेता मुख्तार अंसारी के बेटे और विधायक **अब्बास अंसारी** गुरुवार को अपनी पत्नी **निकहत बानो** के साथ बांदा की भ्रष्टाचार निवारण अदालत में पेश हुए। यह पेशी चित्रकूट जेल में फरवरी 2023 में सामने आए कथित अवैध मुलाकात मामले से जुड़ी थी। अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों बाहर निकले, लेकिन मीडिया के सवालों का जवाब देने से बचते नजर आए।
अब्बास अंसारी कोर्ट परिसर से निकलते ही सीधे अपनी कार में बैठकर रवाना हो गए। उनकी पत्नी निकहत बानो ने भी पत्रकारों से बातचीत नहीं की। इस मामले में दोनों की एक साथ अदालत में मौजूदगी के कारण कोर्ट परिसर में हलचल रही।
इस बीच अब्बास अंसारी की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज है। हालांकि उपलब्ध विश्वसनीय ताजा रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं हुई है कि गुरुवार की इसी पेशी के दौरान उन्होंने अदालत में औपचारिक रूप से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा उपलब्ध कराने की नई अर्जी दी है। इसलिए सुरक्षा संबंधी दावे को आधिकारिक आदेश या आवेदन सामने आने तक पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
चित्रकूट जेल की मुलाकात से जुड़ा है मामला
जिस मामले में अब्बास अंसारी और उनकी पत्नी निकहत बानो बांदा कोर्ट पहुंचे, वह फरवरी 2023 में चित्रकूट की रगौली जेल में हुई कथित अनधिकृत मुलाकात से जुड़ा है।
उस समय अब्बास अंसारी जेल में बंद थे। तत्कालीन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने जेल का औचक निरीक्षण किया था। रिपोर्ट के मुताबिक निरीक्षण के दौरान निकहत बानो को जेलर के कमरे में अब्बास अंसारी के साथ पाया गया था। आरोप लगाया गया कि दोनों की मुलाकात निर्धारित जेल नियमों और आधिकारिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी।
इस घटना ने उस समय उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया था।
निकहत के पास सामान मिलने का लगा था आरोप
औचक निरीक्षण के बाद निकहत बानो की तलाशी और उनके पास मिले सामान को लेकर भी कई आरोप सामने आए थे।
ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि निकहत के पास से मोबाइल फोन, विदेशी मुद्रा समेत अन्य सामान मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद निकहत बानो, उनके चालक नियाज अंसारी और जेल प्रशासन से जुड़े कई अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत दूसरी कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई हुई। बाद में प्रकरण में गैंगस्टर एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं।
ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। अंतिम रूप से दोषी या निर्दोष होने का निर्णय अदालत के फैसले से होगा।
जेल अधिकारियों तक पहुंची थी कार्रवाई
यह मामला केवल अब्बास अंसारी और निकहत तक सीमित नहीं रहा।
जेल के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आई। रिपोर्ट में तत्कालीन जेल अधीक्षक अशोक सागर और डिप्टी जेलर समेत दूसरे जेल कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने का उल्लेख है।
जांच एजेंसियों के सामने बड़ा सवाल यह था कि अगर जेल में नियमों के विपरीत मुलाकात हुई तो वह किसकी जानकारी या कथित सहयोग से संभव हुई।
इसी वजह से यह मामला सामान्य जेल मुलाकात के बजाय कथित भ्रष्टाचार और जेल व्यवस्था में अनियमितता से जुड़े बड़े प्रकरण के रूप में सामने आया।
चित्रकूट से कासगंज जेल भेजे गए थे अब्बास
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने अब्बास अंसारी को चित्रकूट जेल से स्थानांतरित कर दिया था।
उन्हें कासगंज जेल भेजा गया। इसके बाद चित्रकूट जेल की व्यवस्था और वहां तैनात अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे।
अब इस प्रकरण से जुड़े मुकदमों की सुनवाई बांदा स्थित भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में चल रही है।
गुरुवार को इसी सिलसिले में अब्बास और निकहत अदालत पहुंचे।
मीडिया के सवालों पर दोनों ने साधी चुप्पी
कोर्ट की सुनवाई खत्म होने के बाद जब अब्बास अंसारी बाहर आए तो वहां मौजूद पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछने की कोशिश की।
लेकिन अब्बास ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और सीधे अपनी गाड़ी में बैठ गए। निकहत बानो ने भी मीडिया से बात नहीं की।
इस चुप्पी के कारण मामले को लेकर उनकी तरफ से कोई नया सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
ऐसे मामलों में अदालत में बचाव पक्ष की दलीलें और लिखित आवेदन ही कानूनी स्थिति समझने का सबसे विश्वसनीय आधार होते हैं।
सुरक्षा का मुद्दा क्यों है संवेदनशील?
अब्बास अंसारी दिवंगत मुख्तार अंसारी के बेटे हैं। मुख्तार अंसारी की मार्च 2024 में बांदा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हुई थी। उनके परिवार और समर्थकों ने उस समय कई सवाल उठाए थे, जबकि प्रशासन ने पोस्टमॉर्टम और मेडिकल प्रक्रिया के आधार पर आरोपों को खारिज किया था।
इस पृष्ठभूमि के कारण अब्बास अंसारी की सुरक्षा से जुड़ी कोई भी खबर स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनती है।
लेकिन किसी व्यक्ति की ओर से “जान का खतरा” बताने और अदालत द्वारा उस खतरे को स्वीकार करते हुए सुरक्षा देने का आदेश जारी करने में कानूनी अंतर होता है।
आमतौर पर सुरक्षा की मांग किए जाने पर संबंधित प्रशासन या एजेंसी खतरे का आकलन करती है। अदालतें भी सुरक्षा संबंधी मामलों में पुलिस अधिकारियों को threat perception यानी खतरे की वास्तविकता का आकलन करने का निर्देश दे सकती हैं। हाल के दूसरे मामलों में उच्च न्यायालयों ने इसी आधार पर पुलिस को खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं।
इसलिए अगर अब्बास अंसारी की तरफ से औपचारिक सुरक्षा आवेदन दाखिल किया जाता है तो आगे प्रशासनिक खतरा आकलन या न्यायिक आदेश महत्वपूर्ण होगा।
मुख्तार अंसारी की मौत के बाद बदली राजनीतिक तस्वीर
मुख्तार अंसारी की मौत के बाद अंसारी परिवार की राजनीतिक विरासत को लेकर अब्बास अंसारी लगातार चर्चा में रहे हैं।
अब्बास ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मऊ सदर सीट से जीत हासिल की थी। उस समय उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
बाद में उनकी विधानसभा सदस्यता और अलग-अलग मुकदमों को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली।
अंसारी परिवार का पूर्वांचल के कुछ हिस्सों, खासकर गाजीपुर और मऊ की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। यही कारण है कि अब्बास से जुड़ी अदालत की हर महत्वपूर्ण सुनवाई पर राजनीतिक दलों की भी नजर रहती है।
निकहत बानो भी लंबे समय से मामले का सामना कर रहीं
चित्रकूट जेल मुलाकात मामले के सामने आने के बाद निकहत बानो भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आई थीं।
उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने जेल में अपने पति से मिलने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया। इसी मामले में जेल अधिकारियों की कथित भूमिका भी सामने आई।
अब्बास और निकहत की गुरुवार को एक साथ अदालत में पेशी बताती है कि मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और तर्क रखेंगे, जिसके बाद ही आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष सामने आएगा।
अब आगे क्या होगा?
बांदा की भ्रष्टाचार निवारण अदालत में चल रहे इस मुकदमे की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने होंगे, जबकि अब्बास अंसारी, निकहत बानो और दूसरे आरोपियों को अपना बचाव रखने का अवसर मिलेगा।
सुरक्षा संबंधी दावे के मामले में भी अगर कोई औपचारिक आवेदन या अदालत का आदेश सामने आता है तो स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी।
फिलहाल उपलब्ध पुष्ट जानकारी इतनी है कि **10 सितंबर 2026 को अब्बास अंसारी और निकहत बानो चित्रकूट जेल के कथित अवैध मुलाकात मामले में बांदा की भ्रष्टाचार निवारण अदालत में पेश हुए। सुनवाई के बाद दोनों ने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया और वहां से रवाना हो गए।
अब नजर मामले की अगली सुनवाई और अदालत में होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।
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