उत्तर प्रदेश

बेनाम पड़ी संपत्तियों का होगा कायाकल्प, मरम्मत के बाद बेचने की तैयारी में सरकार

nidhi
4 Oct 2026 11:08 AM IST
बेनाम पड़ी संपत्तियों का होगा कायाकल्प, मरम्मत के बाद बेचने की तैयारी में सरकार
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30 हजार करोड़ की संपत्तियों पर यूपी सरकार का बड़ा प्लान

मुरादाबाद : उत्तर प्रदेश में लंबे समय से बेनाम या अनुपयोगी पड़ी संपत्तियों को लेकर सरकार बड़ी योजना पर काम करने की तैयारी में है। करीब 30 हजार करोड़ रुपये मूल्य की ऐसी संपत्तियों की मरम्मत और कायाकल्प कराने के बाद उन्हें बेचने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए संबंधित संपत्तियों को बेहतर स्थिति में लाने के लिए बजट उपलब्ध कराने की तैयारी है।

योजना का उद्देश्य ऐसी संपत्तियों का बेहतर उपयोग करना है, जो लंबे समय से खाली, जर्जर या अनुपयोगी स्थिति में पड़ी हैं। कई संपत्तियों की देखरेख नहीं होने के कारण उनकी स्थिति खराब हो चुकी है। ऐसे में सरकार पहले उनकी पहचान और मूल्यांकन कराकर जरूरी मरम्मत कराने पर जोर दे सकती है।
करीब 30 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही इन संपत्तियों को सीधे मौजूदा स्थिति में बेचने के बजाय उनका कायाकल्प कराने की योजना है। माना जा रहा है कि मरम्मत के बाद संपत्तियों की स्थिति बेहतर होने से उनका बाजार मूल्य भी बढ़ सकता है। इससे बिक्री के दौरान सरकार को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहेगी।
योजना के तहत सबसे पहले संपत्तियों का विस्तृत ब्योरा तैयार किया जा सकता है। इसमें संपत्ति की मौजूदा स्थिति, स्थान, क्षेत्रफल, कानूनी स्थिति और बाजार मूल्य जैसे पहलुओं को देखा जाएगा। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि किन संपत्तियों को मरम्मत की जरूरत है और किन्हें बिक्री के लिए तैयार किया जा सकता है।
जिन इमारतों या परिसरों की हालत खराब है, उनके कायाकल्प के लिए अलग से बजट देने की तैयारी की जा रही है। इसमें भवनों की मरम्मत, बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने और परिसर को उपयोग योग्य बनाने जैसे काम शामिल हो सकते हैं। हालांकि प्रत्येक संपत्ति पर खर्च उसकी स्थिति के अनुसार तय होगा। सरकार की इस पहल को अनुपयोगी परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्षों तक खाली पड़ी संपत्तियों की देखरेख पर भी खर्च होता है। कई जगह अतिक्रमण या अवैध कब्जे का खतरा बना रहता है। संपत्तियों का रिकॉर्ड स्पष्ट कर उन्हें उपयोग में लाने या नियमानुसार बेचने से ऐसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
बिक्री की प्रक्रिया में पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण होगी। संपत्तियों का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा, बिक्री की प्रक्रिया क्या होगी और खरीदारों का चयन किस तरह किया जाएगा, इसके लिए स्पष्ट नियम जरूरी होंगे। बड़ी कीमत वाली संपत्तियों के मामले में कानूनी दस्तावेज और स्वामित्व रिकॉर्ड की जांच भी अहम होगी। योजना लागू होने पर संबंधित विभागों को अपनी अनुपयोगी संपत्तियों की जानकारी उपलब्ध करानी पड़ सकती है। इसके बाद अलग-अलग स्तर पर सत्यापन और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। जिन संपत्तियों पर किसी तरह का विवाद या कानूनी मामला होगा, उनकी स्थिति अलग से जांची जाएगी।
सरकार का जोर संपत्तियों की कीमत बढ़ाने के लिए जरूरी मरम्मत पर है। इसके लिए बजट देने की व्यवस्था होने से वर्षों से जर्जर पड़ी इमारतों और परिसरों की तस्वीर बदल सकती है। हालांकि अंतिम बिक्री मूल्य बाजार की स्थिति, स्थान और संपत्ति की वास्तविक हालत पर निर्भर करेगा। फिलहाल करीब 30 हजार करोड़ रुपये की इन संपत्तियों के कायाकल्प और बिक्री की योजना आगे बढ़ने पर विस्तृत दिशा-निर्देश सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद स्पष्ट होगा कि पहले चरण में कितनी संपत्तियों को शामिल किया जाएगा और उनकी मरम्मत तथा बिक्री की प्रक्रिया किस समयसीमा में पूरी की जाएगी।

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