उत्तर प्रदेश

सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने को AAP का अभियान हेल्पलाइन से जुड़े लोग

Ratna Netam
22 Aug 2026 7:31 PM IST
सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने को AAP का अभियान हेल्पलाइन से जुड़े लोग
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में आम आदमी पार्टी (AAP) ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर नया अभियान शुरू किया है। पार्टी ने राज्य के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए **'स्कूल ठीक करो' अभियान** की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत आम आदमी पार्टी ने जनता से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के बदहाल सरकारी स्कूलों की तस्वीरें और वीडियो साझा करें, ताकि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सके।
AAP का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, खराब भवन, शौचालयों की स्थिति, पेयजल की समस्या और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों को सामने लाने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है। पार्टी ने इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जिसके माध्यम से लोग अपने क्षेत्र के स्कूलों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी दे सकेंगे।
जनता से मांगे जा रहे स्कूलों के वीडियो
आम आदमी पार्टी ने लोगों से कहा है कि वे अपने आसपास के सरकारी स्कूलों की स्थिति को रिकॉर्ड कर वीडियो या फोटो के रूप में भेजें। पार्टी इन वीडियो के जरिए यह दिखाने की कोशिश करेगी कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत क्या है।
AAP नेताओं का कहना है कि कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उनका दावा है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए।
शिक्षा को बनाया राजनीतिक मुद्दा
आम आदमी पार्टी लंबे समय से शिक्षा के मुद्दे को अपनी राजनीति का प्रमुख हिस्सा बनाती रही है। दिल्ली में सरकारी स्कूलों में किए गए बदलावों को पार्टी अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करती है और अब उत्तर प्रदेश में भी इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि अच्छी शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तरह बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए।
यूपी की शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
AAP ने उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कई जगहों पर स्कूल भवनों की स्थिति खराब है और छात्रों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
पार्टी का कहना है कि सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा बजट और बेहतर प्रबंधन की जरूरत है। बच्चों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।
हेल्पलाइन के जरिए जुटाई जाएगी जानकारी
पार्टी द्वारा जारी हेल्पलाइन का उद्देश्य सीधे जनता से जुड़ना बताया जा रहा है। इसके जरिए मिलने वाली शिकायतों और वीडियो को एकत्रित कर आम आदमी पार्टी सरकार के सामने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग रखेगी।
AAP नेताओं का कहना है कि जनता की भागीदारी से ही किसी भी व्यवस्था की असली तस्वीर सामने आती है। इसलिए उन्होंने अभिभावकों, छात्रों और स्थानीय लोगों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।
राजनीतिक जानकारों की नजर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में शिक्षा का मुद्दा चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता और बच्चों की सुविधाएं ऐसे विषय हैं जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है।
AAP आगामी चुनावों को देखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को जनता के बीच उठाने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति
इस अभियान के जरिए आम आदमी पार्टी प्रदेश सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी चाहती है कि सरकारी स्कूलों की समस्याएं सार्वजनिक चर्चा का विषय बनें और सरकार को जवाब देना पड़े।
AAP नेताओं का कहना है कि केवल आंकड़ों और दावों से शिक्षा व्यवस्था बेहतर नहीं होती, बल्कि स्कूलों में जाकर वास्तविक स्थिति देखने की जरूरत है।
सरकार का पक्ष
हालांकि शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पहले भी कई योजनाओं और सुधारों का हवाला देती रही है। सरकार का कहना है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने, स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और भवन सुधार जैसे काम लगातार किए जा रहे हैं।
सरकार की ओर से कई बार विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया गया है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ेगा शिक्षा का मुद्दा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए राजनीतिक दल जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे विषय चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।
AAP का 'स्कूल ठीक करो' अभियान भी इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जनता इस अभियान से कितनी जुड़ती है और इसका राजनीतिक असर कितना दिखाई देता है।
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