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प्रयागराज में लेटे हनुमान जी का अनोखा मंदिर, धरातल से नीचे विराजमान है 20 फीट लंबी प्रतिमा

प्रयागराज। सनातन धर्म में प्रयागराज का विशेष धार्मिक महत्व है। धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में इसे ‘तीर्थराज’ यानी तीर्थों का राजा कहा गया है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम के लिए प्रसिद्ध प्रयागराज में कई प्राचीन और आस्था के प्रमुख केंद्र मौजूद हैं। इन्हीं में से एक दारागंज क्षेत्र में गंगा के किनारे स्थित लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर है। यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा खड़ी या बैठी मुद्रा में नहीं, बल्कि लेटी हुई अवस्था में विराजमान है। यही विशेषता इस मंदिर को श्रद्धालुओं के बीच अलग पहचान देती है।
इस मंदिर को प्रयागराज के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच भगवान हनुमान यहां कई नामों से प्रसिद्ध हैं। उन्हें बड़े हनुमानजी, किले वाले हनुमानजी, लेटे हनुमानजी और बांध वाले हनुमानजी कहा जाता है।
मंदिर में दर्शन के लिए सामान्य दिनों में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है, जबकि मंगलवार, शनिवार और प्रमुख धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। संगम क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालु भी अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान मंदिर में दर्शन-पूजन करना महत्वपूर्ण मानते हैं।
20 फीट लंबी है हनुमान जी की प्रतिमा
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मंदिर में स्थापित भगवान हनुमान की प्रतिमा दक्षिणाभिमुखी है और इसकी लंबाई करीब 20 फीट बताई जाती है। इसकी एक और खासियत यह है कि प्रतिमा धरातल से करीब छह से सात फीट नीचे स्थित है।
श्रद्धालु सीढ़ियों से नीचे उतरकर भगवान हनुमान के दर्शन करते हैं। लेटी हुई अवस्था में विशाल प्रतिमा का स्वरूप मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र है।
मंदिर की इस अनूठी संरचना और हनुमान जी के स्वरूप के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं में इसके प्रति विशेष आकर्षण रहता है। प्रयागराज में संगम स्नान के लिए आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालु लेटे हनुमान जी के दर्शन के लिए भी पहुंचते हैं।
समर्थ गुरु रामदास से जुड़ी है मान्यता
मंदिर और यहां स्थापित प्रतिमा के इतिहास को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसी ही एक मान्यता के अनुसार संत समर्थ गुरु रामदास ने यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित की थी। हालांकि मंदिर के इतिहास से जुड़ी विभिन्न कथाएं और परंपराएं स्थानीय स्तर पर प्रचलित हैं।
समर्थ गुरु रामदास भगवान राम और हनुमान के उपासक के रूप में प्रसिद्ध रहे हैं। उनके नाम से देश के विभिन्न हिस्सों में हनुमान उपासना से जुड़ी परंपराएं भी जोड़ी जाती हैं। प्रयागराज के इस मंदिर की स्थापना को लेकर भी उनका उल्लेख किया जाता है।
मंदिर की प्रसिद्धि केवल इसकी ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण नहीं है। लेटी हुई अवस्था में भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा स्वयं इसे दूसरे हनुमान मंदिरों से अलग बनाती है।
मंदिर में कई देवी-देवता विराजमान
मंदिर परिसर में केवल भगवान हनुमान की प्रतिमा ही नहीं है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती, भगवान गणेश, भैरव, माता दुर्गा, माता काली और नवग्रहों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
इस वजह से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन करने का अवसर मिलता है। हनुमान जी की पूजा के साथ श्रद्धालु अन्य देवी-देवताओं के सामने भी अपनी मनोकामनाएं रखते हैं।
मंगलवार और शनिवार को भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। धार्मिक पर्वों और विशेष स्नान के अवसरों पर भी मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है।
कई नामों से प्रसिद्ध हैं हनुमान जी
प्रयागराज में भगवान हनुमान के इस स्वरूप को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। विशाल प्रतिमा के कारण श्रद्धालु उन्हें बड़े हनुमानजी कहते हैं। मंदिर के स्थान और आसपास के क्षेत्र से जुड़ी पहचान के कारण किले वाले हनुमानजी और बांध वाले हनुमानजी जैसे नाम भी प्रचलित हुए।
लेकिन सबसे लोकप्रिय पहचान ‘लेटे हनुमानजी’ के रूप में है। इसका कारण यहां स्थापित भगवान की विशिष्ट प्रतिमा है। सामान्यतः हनुमान मंदिरों में प्रतिमाएं खड़ी या बैठी मुद्रा में देखने को मिलती हैं, जबकि यहां हनुमान जी लेटी हुई अवस्था में हैं।
संगम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र
प्रयागराज की पहचान संगम और कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों से पूरी दुनिया में है। गंगा और यमुना के संगम में स्नान करने के लिए प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक यात्राओं के दौरान संगम क्षेत्र के आसपास स्थित मंदिरों में दर्शन की भी परंपरा रही है।
लेटे हनुमान जी का मंदिर इसी धार्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। संगम स्नान के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान हनुमान के दर्शन करते हैं।
प्रयागराज में कुंभ और माघ मेले के दौरान मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण मंदिर और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय नजर आता है।
आस्था और परंपरा का अनूठा संगम
लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर प्रयागराज की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करीब 20 फीट लंबी दक्षिणाभिमुखी प्रतिमा, धरातल से नीचे उसका स्थित होना और मंदिर से जुड़ी प्रचलित धार्मिक मान्यताएं इसे विशेष बनाती हैं।
मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं की मौजूदगी भी इसकी धार्मिक महत्ता को बढ़ाती है। यही वजह है कि प्रयागराज पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए संगम के साथ लेटे हनुमान जी का दर्शन भी आस्था का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।





