उत्तर प्रदेश

काशी में नदी किनारे बनेगा शिप रिपेयरिंग सेंटर

Kavita2
13 Sept 2026 3:43 PM IST
काशी में नदी किनारे बनेगा शिप रिपेयरिंग सेंटर
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वाराणसी। काशी को अंतर्देशीय जल परिवहन और माल ढुलाई के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण यानी आईडब्ल्यूएआई ने एक और कदम बढ़ा दिया है। शनिवार को बंदरगाह के उत्तरी छोर पर प्रस्तावित शिप रिपेयरिंग सेंटर का प्रारंभिक काम शुरू कर दिया गया। करीब चार बीघा क्षेत्र में विकसित होने वाले इस केंद्र में नदी मार्ग से चलने वाले जलयानों की मरम्मत की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।

कार्यदायी संस्था लार्सन एंड टुब्रो जियोस्ट्रक्चर के कर्मचारियों ने स्थल पर प्राथमिक कार्य शुरू कर दिया है। परियोजना के अंतर्गत बंदरगाह के उत्तरी छोर पर एक विशेष वाटर चैनल बनाया जाएगा। मरम्मत की जरूरत होने पर जहाज और अन्य जलयान नदी की मुख्य धारा से इस चैनल के भीतर आ सकेंगे। यहां उनके निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत से जुड़े कार्य किए जाएंगे।

शिप रिपेयरिंग सेंटर की स्थापना को प्रस्तावित फ्रेट विलेज के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। जलमार्ग से माल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए केवल बंदरगाह और कार्गो सुविधाएं ही पर्याप्त नहीं होतीं। जलयानों के रखरखाव, तकनीकी निरीक्षण और मरम्मत के लिए स्थानीय स्तर पर उपयुक्त व्यवस्था की भी जरूरत होती है। प्रस्तावित सेंटर इस आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अभी तक जहाजों की मरम्मत का काम सामान्य तौर पर समुद्री बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता रहा है। काशी में बनने वाली यह सुविधा नदी में चलने वाले जलयानों के लिए विशेष रूप से विकसित की जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां अंतर्देशीय जलमार्ग पर चलने वाले जहाजों को मरम्मत की सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे मरम्मत के लिए जलयानों को दूर भेजने की जरूरत कम हो सकती है।

परियोजना के प्राथमिक चरण में निर्माण स्थल को तैयार करने और वाटर चैनल के विकास से संबंधित काम किया जा रहा है। यह चैनल नदी की मुख्य धारा तथा रिपेयरिंग सेंटर के बीच संपर्क का माध्यम बनेगा। जलयान मुख्य धारा से मुड़कर चैनल के जरिए मरम्मत वाले क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। काम पूरा होने के बाद इस प्रक्रिया से जलयानों को सुरक्षित तरीके से सेंटर तक लाने और वापस मुख्य धारा में भेजने में सुविधा होगी।

आईडब्ल्यूएआई राष्ट्रीय जलमार्गों पर यातायात और माल ढुलाई के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है। बंदरगाह के आसपास शिप रिपेयरिंग जैसी सुविधा उपलब्ध होने से जल परिवहन की कार्यकुशलता बढ़ सकती है। किसी जहाज में तकनीकी समस्या आने पर स्थानीय स्तर पर उसकी मरम्मत संभव होगी। इससे समय की बचत के साथ जलयानों के संचालन को नियमित बनाए रखने में सहायता मिलने की संभावना है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने भी वाराणसी में अत्याधुनिक शिप रिपेयर सुविधा विकसित किए जाने की जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, इसका उद्देश्य अंतर्देशीय जलयानों के लिए आवश्यक आधारभूत और उपयोगिता सेवाएं उपलब्ध कराना है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने वाराणसी को इस दिशा में विकसित की जा रही प्रमुख परियोजनाओं में शामिल किया है।

शिप रिपेयरिंग सेंटर का काम शुरू होने से फ्रेट विलेज की योजना को भी गति मिलने की उम्मीद है। फ्रेट विलेज का उद्देश्य जलमार्ग के साथ सड़क और अन्य परिवहन साधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। माल को एक परिवहन माध्यम से दूसरे माध्यम तक पहुंचाने के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था विकसित होने पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

काशी में गंगा के रास्ते माल ढुलाई और यात्री परिवहन की संभावनाओं को देखते हुए जलयानों के लिए तकनीकी सेवाओं का ढांचा तैयार करना जरूरी माना जा रहा है। शिप रिपेयरिंग सेंटर इसी ढांचे का हिस्सा होगा। नियमित रखरखाव और समय पर मरम्मत से जहाजों की सुरक्षा तथा परिचालन क्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है। सुविधा उपलब्ध होने से जल परिवहन से जुड़े संचालकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

परियोजना से स्थानीय स्तर पर तकनीकी और सहायक गतिविधियां बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। जहाजों की मरम्मत में विभिन्न प्रकार के कौशल और सेवाओं की जरूरत पड़ती है। हालांकि रोजगार, निर्माण लागत और परियोजना पूरी होने की समयसीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इन विषयों पर आधिकारिक विवरण आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

शिप रिपेयरिंग सेंटर के निर्माण में नदी की परिस्थितियों और जलस्तर को ध्यान में रखते हुए वाटर चैनल तैयार किया जाएगा। मुख्य धारा से जलयानों को सेंटर तक लाने की व्यवस्था परियोजना का अहम हिस्सा है। निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों और जलयानों की सुरक्षित आवाजाही पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत होगी।

इस केंद्र के शुरू होने के बाद काशी को नदी आधारित जहाज मरम्मत सुविधा वाला प्रमुख शहर बताया जा रहा है। परियोजना से जुड़े दावे के अनुसार, समुद्र के बजाय नदी में जलयानों की मरम्मत की ऐसी व्यवस्था शहर को विशेष पहचान दिलाएगी। हालांकि इसका अंतिम स्वरूप निर्माण पूरा होने और सुविधा के संचालन में आने के बाद स्पष्ट होगा।

बंदरगाह के उत्तरी छोर पर प्रारंभिक काम शुरू होने से परियोजना अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। आने वाले चरणों में वाटर चैनल और मरम्मत से संबंधित आवश्यक संरचनाएं विकसित की जाएंगी। शिप रिपेयरिंग सेंटर, बंदरगाह और प्रस्तावित फ्रेट विलेज मिलकर काशी को अंतर्देशीय जल परिवहन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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