उत्तर प्रदेश

सेल्फी का शौक पड़ सकता है भारी, इन जगहों पर रहें सतर्क

nidhi
7 Nov 2026 8:04 AM IST
सेल्फी का शौक पड़ सकता है भारी, इन जगहों पर रहें सतर्क
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सोनभद्र की खूबसूरती में छिपा खतरा
सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध रेणुका नदी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। ओबरा क्षेत्र में स्थित छठ घाट पर शाम के समय नदी की लहरों और आसपास की पहाड़ियों का नजारा देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन इस खूबसूरती के बीच एक ऐसा खतरा भी छिपा है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। ओबरा बांध और जल विद्युत परियोजना से अचानक पानी छोड़े जाने पर रेणुका नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में नदी के बीच बने टापुओं और चट्टानों पर घूमने वाले लोग तेज बहाव में फंस सकते हैं। रेणुका नदी में सामान्य दिनों के दौरान पानी का स्तर काफी कम दिखाई देता है। कई स्थानों पर नदी के बीच ऊंची चट्टानें और टापूनुमा हिस्से नजर आते हैं। इन्हीं स्थानों पर पहुंचकर पर्यटक तस्वीरें खिंचवाते हैं और मोबाइल से वीडियो तथा रील बनाते हैं। कम पानी देखकर लोगों को लगता है कि नदी में उतरना सुरक्षित है, लेकिन यह धारणा किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।
दरअसल, रेणुका नदी का जलस्तर ओबरा जल विद्युत परियोजना की इकाइयों के संचालन से प्रभावित होता है। बिजली की मांग बढ़ने पर परियोजना की टरबाइन चालू की जाती हैं। इससे बड़ी मात्रा में पानी नदी में पहुंचता है और कुछ ही समय में जलस्तर बढ़ने लगता है।
जानकारों के अनुसार, जब ओबरा जल विद्युत परियोजना की तीनों इकाइयां पूरी क्षमता से संचालित होती हैं, तब करीब 15,800 क्यूसेक से अधिक पानी रेणुका नदी में प्रवाहित हो सकता है। इतनी बड़ी मात्रा में पानी आने से नदी का बहाव अचानक तेज हो जाता है। ऐसे में नदी के बीच मौजूद लोगों के लिए सुरक्षित किनारे तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि नदी में पानी बढ़ने का कोई निश्चित समय नहीं है। ओबरा जल विद्युत परियोजना के अधिशासी अभियंता आरएस जायसवाल के अनुसार, बिजली उत्पादन जरूरत के हिसाब से किया जाता है। परियोजना में उत्पादन शुरू होने से पहले हूटर या सायरन बजाने की व्यवस्था भी नहीं है। इससे नदी के बीच मौजूद लोगों को अचानक बढ़ते जलस्तर का समय रहते अंदाजा नहीं लग पाता।
रेणुका नदी में इस तरह के खतरे पहले भी सामने आ चुके हैं। जून 2026 में नदी के बीच बने एक टापू पर 11 पर्यटक फंस गए थे। बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था। सूचना मिलने पर पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इस घटना ने नदी के बीच जाने के जोखिम को उजागर किया था। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर पहले से अधिक रहता है। बांध में पानी बढ़ने पर फाटकों से अतिरिक्त पानी छोड़ा जा सकता है। इसके अलावा जल विद्युत इकाइयों से निकलने वाला पानी भी बहाव को प्रभावित करता है। हालांकि बारिश समाप्त होने के बाद नदी में पानी कम दिखाई देने लगता है, लेकिन खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता।
विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों की सलाह है कि पर्यटकों को नदी के बीच बने टापुओं तक जाने से बचना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों को पानी के किनारे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। सेल्फी और वीडियो बनाने के लिए तेज बहाव के पास जाना भी जोखिम भरा हो सकता है। यदि नदी में अचानक पानी बढ़ने लगे तो लोगों को तुरंत सुरक्षित ऊंचे स्थान पर पहुंचना चाहिए। किसी व्यक्ति के नदी के बीच फंसने की स्थिति में बिना सुरक्षा उपकरण के खुद पानी में उतरकर बचाव करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। ऐसी परिस्थिति में पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना देना उचित है।
स्थानीय स्तर पर घाटों के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाने और पानी छोड़े जाने की सूचना लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत भी बताई जा रही है। हालांकि मई 2026 में सोनभद्र पुलिस ने जिले के 31 संवेदनशील जलस्थलों पर चेतावनी पोस्टर और बैनर लगाए थे, लेकिन रेणुका नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने का जोखिम विशेष सतर्कता की मांग करता है। रेणुका नदी की प्राकृतिक सुंदरता निश्चित रूप से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, लेकिन यहां घूमने आने वालों को सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी किसी बड़े हादसे को रोक सकती है।
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