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उत्तर प्रदेश
गंगा घाट पर सजी सुरों की महफिल, मैथिली ठाकुर ने बांधा समां
nidhi
11 Oct 2026 9:19 AM IST

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वाराणसी: धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में गंगा के घाटों पर एक बार फिर संगीत और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध तुलसी घाट पर युवाओं की संगीत महफिल में भाजपा विधायक और भजन गायिका मैथिली ठाकुर भी शामिल हुईं। अपने दोनों भाइयों के साथ घाट पर पहुंचीं मैथिली ठाकुर ने युवाओं के बीच बैठकर गीत और भजन गाए। उनकी मौजूदगी से वहां का माहौल भक्तिमय हो गया।
बनारस घाट पर अपने दोनों भाई के साथ गीत गाती बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर! #Banaras #MaithiliThakur https://t.co/TW0H620BXC
— SOURAV RAJ (@souravreporter2) October 10, 2026
युवाओं के साथ करीब एक घंटे तक गूंजे गीत और भजन
तुलसी घाट की सीढ़ियों पर युवाओं का एक समूह हारमोनियम, ढोलक और गिटार के साथ संगीत की महफिल सजा रहा था। इसी दौरान मैथिली ठाकुर वहां पहुंचीं और युवाओं के साथ सुर मिलाने लगीं। यह कोई औपचारिक मंचीय कार्यक्रम नहीं था, बल्कि घाट पर संगीत पसंद करने वाले युवाओं की सहज बैठक थी।
मैथिली ठाकुर ने करीब एक घंटे तक युवाओं के साथ अलग-अलग गीतों और भजनों की प्रस्तुति दी। इस दौरान उन्होंने ‘निमिया की डाढ़’ भजन भी सुनाया। घाट पर मौजूद लोगों के लिए यह पल खास रहा, क्योंकि उन्हें प्रसिद्ध गायिका के साथ बैठकर संगीत का आनंद लेने का अवसर मिला।
भक्ति और लोकसंगीत का दिखा संगम
काशी के घाट केवल धार्मिक आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी पहचाने जाते हैं। यहां अक्सर युवा समूह बनाकर भजन और गीत गाते हैं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ होने वाली ऐसी बैठकें शहर की सांस्कृतिक जीवंतता को दर्शाती हैं।
तुलसी घाट पर मैथिली ठाकुर के शामिल होने से इस संगीत बैठक में भक्ति और लोकसंगीत का रंग और गहरा हो गया। युवाओं के साथ बैठकर गीत गाने का यह अंदाज औपचारिक कार्यक्रमों से अलग था। इस दौरान संगीत के जरिए कलाकार और युवाओं के बीच सहज जुड़ाव देखने को मिला।
तुलसी घाट के धार्मिक महत्व का किया जिक्र
तुलसी घाट का नाम गोस्वामी तुलसीदास से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान का संबंध तुलसीदास और रामचरितमानस की रचना से रहा है। इसी कारण घाट को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
मैथिली ठाकुर ने भी इस स्थान पर पहुंचने के अनुभव को खास बताया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि काशी के पवित्र घाट पर आकर उन्हें शांति और सुकून का अनुभव हुआ। युवाओं के साथ बैठकर संगीत साझा करना भी उनके लिए यादगार रहा।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आई संगीत बैठक
मैथिली ठाकुर के युवाओं के साथ भजन गाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इसके बाद तुलसी घाट की यह अनौपचारिक संगीत महफिल चर्चा में आ गई। कार्यक्रम का खास आकर्षण यह रहा कि इसमें किसी बड़े मंच या औपचारिक आयोजन के बजाय घाट की सीढ़ियों पर बैठकर संगीत का आनंद लिया गया।
वाराणसी की सांस्कृतिक पहचान में भजन, लोकगीत और शास्त्रीय संगीत की महत्वपूर्ण भूमिका है। तुलसी घाट पर हुई यह बैठक इसी परंपरा की एक झलक पेश करती है। यहां युवाओं और कलाकारों ने संगीत के माध्यम से अपनी रुचि और भावनाओं को साझा किया।
मैथिली ठाकुर का युवाओं के बीच पहुंचकर उनके साथ सुर मिलाना इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। गंगा घाट पर सजी इस महफिल में भक्ति, लोकसंगीत और काशी की सांस्कृतिक परंपरा एक साथ नजर आई।
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