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Meerut मेरठ : इंसानियत और सच्चाई के रास्ते पर चलते हुए कर्बला में शहीद हुए इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी को याद करते हुए 10वीं मोहर्रम (यौम-ए-आशूरा) के मौके पर मेरठ में गम और अकीदत का माहौल देखने को मिला। शहर के विभिन्न इलाकों से ताजियों और जुलूसों का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।
मोहर्रम के इस अवसर पर इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करते हुए सोगवारों ने मातम किया। जुलूसों के दौरान नोहाख्वानी और मरसिये पेश किए गए, जिससे पूरा माहौल भावनात्मक और गमगीन हो गया। लोगों ने अकीदत के साथ इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की।
जानकारी के अनुसार, मेरठ के अब्दुल्लापुर क्षेत्र स्थित इमामबाड़ा सैय्यद असगर हुसैन से बड़ा ताजिया निकाला गया। यह ताजिया विभिन्न मार्गों से होते हुए मोहल्ला गढ़ी नीम चौक और किला रोड से गुजरकर हुसैनी चौक पहुंचा। इसी दौरान मोहल्ला कोर्ट शाकिर महल से जुलूस-ए-जुल्जना भी निकाला गया, जिसमें इमाम हुसैन के प्रतीकात्मक घोड़े (जुल्जना) और अलम शामिल थे। यह जुलूस भी बाद में हुसैनी चौक पर मुख्य जुलूस में शामिल हो गया।
हुसैनी चौक पर मौलाना ने तकरीर करते हुए इमाम हुसैन की शहादत और उनके संदेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने हमेशा जुल्म के खिलाफ और इंसानियत के पक्ष में आवाज उठाई, और उनकी कुर्बानी आज भी समाज को सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है। इस दौरान जंजीर का मातम भी किया गया, जिसमें अकीदतमंदों ने गहरे शोक के साथ इमाम हुसैन को याद किया।
जुलूस के दौरान कई लोगों ने नोहा पढ़कर माहौल को और अधिक भावुक बना दिया। इनमें रोशन अब्बास, मोहम्मद अब्बास, मिसम नकवी, अम्मार ए यासिर, जमीन अली, कमर आलम सहित अन्य लोग शामिल रहे। वहीं नन्हे अज़ादार इब्राहिम हुसैन ने भी मातम में भाग लेकर श्रद्धा व्यक्त की।
जुलूस किला रोड स्थित शिया कर्बला पहुंचकर संपन्न हुआ, जहां ताजियों को विधिवत रूप से दफन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
मेरठ पुलिस प्रशासन सुबह से ही पूरी तरह सक्रिय रहा। मौके पर एसपी देहात, एसडीएम सदर, एडीएम प्रशासन, सीओ सदर देहात, सीओ किठौर सहित पांच थानों की पुलिस फोर्स, पीएसी और आरएएफ तैनात रही। प्रशासन ने जुलूसों को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया।
स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन की व्यवस्था और सहयोग की सराहना की। शिया समाज के लोगों ने भी आयोजन में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। रजाकार कमेटी की ओर से भी सभी सहयोगियों को धन्यवाद दिया गया।
पूरे शहर में दिनभर धार्मिक भावनाओं, श्रद्धा और शोक का माहौल बना रहा। मोहर्रम के इस अवसर ने एक बार फिर इंसानियत, त्याग और सच्चाई के संदेश को लोगों के बीच मजबूत किया।





