उत्तर प्रदेश

लाडले आबान के अंतिम दीदार को लेकर बड़ा सवाल क्या पहुंची शाइस्ता

Ratna Netam
8 Aug 2026 2:04 PM IST
लाडले आबान के अंतिम दीदार को लेकर बड़ा सवाल क्या पहुंची शाइस्ता
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प्रयागराज : माफिया अतीक अहमद के परिवार पर एक बार फिर दुख और मुश्किलों का साया मंडरा गया है। अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान की सड़क हादसे में मौत के बाद शुक्रवार को उसका शव प्रयागराज के हटवा गांव पहुंचा। आबान की मौत की खबर से परिवार और करीबियों में मातम पसरा रहा। वहीं, शव के गांव पहुंचते ही अतीक की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। दिनभर यह चर्चा होती रही कि क्या शाइस्ता अपने सबसे छोटे और लाडले बेटे का अंतिम दीदार करने के लिए गुपचुप तरीके से हटवा गांव पहुंची थी। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने शाइस्ता के गांव पहुंचने की किसी भी खबर की पुष्टि नहीं की और ऐसी चर्चाओं को अफवाह बताया।
आबान परिवार में सबसे छोटा था और बताया जाता है कि वह अपनी मां शाइस्ता परवीन का बेहद लाडला था। ऐसे में उसकी अचानक मौत के बाद शाइस्ता के अंतिम दर्शन के लिए आने की संभावना को लेकर पुलिस और खुफिया एजेंसियां पहले से ही सतर्क थीं। शुक्रवार सुबह जैसे ही आबान का शव हटवा गांव पहुंचा, बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए जुटने लगे। गांव में रिश्तेदारों और परिचितों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बड़ी संख्या में बुर्कानशीं महिलाएं भी वहां मौजूद थीं। इसी दौरान भीड़ के बीच यह चर्चा फैल गई कि शाइस्ता भी वहां पहुंची है और उसने अपने बेटे का अंतिम दीदार किया है।
हालांकि, शाइस्ता के वहां पहुंचने का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया। पुलिस अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि उनकी जानकारी में शाइस्ता के गांव आने की पुष्टि नहीं हुई है। एसीपी धूमनगंज अजयेंद्र यादव के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस को हटवा गांव में तैनात किया गया था। महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई थी, ताकि महिलाओं की भीड़ में किसी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके। पुलिस और खुफिया एजेंसियों की टीमें गांव में आने-जाने वाले लोगों और आसपास की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं।
दरअसल, उमेश पाल हत्याकांड के बाद से शाइस्ता परवीन फरार चल रही है। वर्ष 2023 में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद भी शाइस्ता पुलिस की पकड़ से बाहर रही। करीब तीन साल से उसके ठिकाने को लेकर पुलिस लगातार तलाश करती रही है, लेकिन अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। ऐसे में बेटे की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी थी। पुलिस को आशंका थी कि भावनात्मक स्थिति में शाइस्ता सुरक्षा घेरे को चकमा देकर बेटे के अंतिम दर्शन के लिए पहुंच सकती है। इसी वजह से हटवा गांव में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।
आबान की मौत के बाद परिवार के अन्य फरार सदस्यों को लेकर भी पुलिस की नजर बनी रही। अतीक की बहन आइशा नूरी और अशरफ की पत्नी जैनब भी फरार बताई जाती हैं। वहीं, आबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जेल में बंद उसके दोनों भाइयों उमर और अली को पैरोल की अनुमति मिलने के बाद परिवार के सदस्यों के पहुंचने का इंतजार किया गया।
जानकारी के मुताबिक, आबान की गुरुवार सुबह झांसी में हुए सड़क हादसे में मौत हुई थी। हादसे में उसके साथी सोनू अहमद की भी जान चली गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुक्रवार सुबह आबान और सोनू के शव प्रयागराज के पूरामुफ्ती क्षेत्र स्थित हटवा गांव लाए गए। आबान का शव उसकी बुआ के आवास पर रखा गया, जहां धीरे-धीरे बड़ी संख्या में रिश्तेदार और स्थानीय लोग जुटने लगे। परिवार के करीबी लोगों ने बताया कि हादसे की खबर से सभी बेहद दुखी हैं और आबान की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।
शुक्रवार को दिनभर आबान के अंतिम संस्कार को लेकर भी इंतजार बना रहा। हटवा के अलावा कसारी मसारी और चकिया इलाके में भी लोगों की नजरें अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर टिकी रहीं। कसारी मसारी स्थित कब्रिस्तान में शव दफन करने के लिए पहले से तैयारी की गई थी। वहीं सोनू अहमद के शव को शुक्रवार दोपहर नमाज के बाद हटवा गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
अब आबान के अंतिम संस्कार के दौरान शाइस्ता की मौजूदगी को लेकर उठ रही चर्चाओं पर सबकी नजर है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि शाइस्ता के गांव पहुंचने या बेटे का अंतिम दीदार करने संबंधी कोई प्रमाण नहीं मिला है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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