उत्तर प्रदेश

किसानों के बच्चों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, छात्रवृत्ति दोगुनी

Kavita2
18 Oct 2026 4:27 PM IST
किसानों के बच्चों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, छात्रवृत्ति दोगुनी
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाते हुए छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटों को दोगुना कर दिया गया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता भी बढ़ा दी गई है। योजना के तहत अब पात्र विद्यार्थियों को तीन हजार रुपये के स्थान पर पांच हजार रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति मिलेगी। इस तरह सालाना छात्रवृत्ति 36 हजार रुपये से बढ़कर 60 हजार रुपये हो जाएगी। सरकार की इस पहल से प्रदेश के अधिक किसान परिवारों के मेधावी बच्चों को कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

छात्रवृत्ति की सीटें 1,410 से बढ़कर 2,820 हुईं

मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के विस्तार के तहत निर्धारित सीटों की संख्या दोगुनी कर दी गई है। पहले योजना में कुल 1,410 सीटें निर्धारित थीं, जिन्हें बढ़ाकर 2,820 कर दिया गया है।

इसके तहत प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों, संबंधित संस्थानों और कृषि महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।

वर्तमान में मंडी परिषद की ओर से प्रदेश के 11 कृषि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों तथा 61 कृषि महाविद्यालयों में पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जा रही है।

नई व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय या संस्थान में छात्रवृत्ति की सीटें 45 से बढ़ाकर 90 कर दी गई हैं। वहीं, प्रत्येक कृषि महाविद्यालय में सीटों की संख्या 15 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है।

इस निर्णय से अधिक संख्या में पात्र विद्यार्थी योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत कृषि से जुड़े स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को लाभ दिया जाता है।

संशोधित व्यवस्था में कृषि विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर की सीटें 25 से बढ़ाकर 50 कर दी गई हैं। गृह विज्ञान स्नातक की सीटें छह से बढ़कर 12 हो गई हैं।

इसी प्रकार कृषि स्नातकोत्तर की सीटें 10 से बढ़ाकर 20 और गृह विज्ञान स्नातकोत्तर की सीटें चार से बढ़ाकर आठ कर दी गई हैं।

कृषि महाविद्यालयों में स्नातक स्तर की सीटें 10 से बढ़कर 20 और स्नातकोत्तर स्तर की सीटें पांच से बढ़कर 10 हो गई हैं।

योजना में कृषि के साथ उद्यान, वानिकी और पशुपालन जैसे संबंधित विषयों के विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया है।

मेरिट के आधार पर होगा विद्यार्थियों का चयन

योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के मूल निवासी किसानों और खेतिहर मजदूरों के पात्र बच्चों को मिलेगा।

स्नातक स्तर पर छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से इंटरमीडिएट परीक्षा में न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक होना आवश्यक बताया गया है।

अन्य शिक्षा बोर्डों से इंटरमीडिएट करने वाले विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 85 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं।

वहीं, स्नातकोत्तर स्तर पर छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए स्नातक परीक्षा में कम से कम 70 प्रतिशत अंक होने चाहिए।

विद्यार्थियों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा। इससे शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर पात्र छात्रों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।

अब तक 6,454 विद्यार्थियों को मिला लाभ

मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत पिछले कई वर्षों से किसान परिवारों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए सहायता प्रदान की जा रही है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक कुल 6,454 विद्यार्थियों को लगभग 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है।

अब छात्रवृत्ति की सीटें दोगुनी होने से अधिक विद्यार्थियों को इस योजना से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसान परिवारों के बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति राशि और सीटों में बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण प्रतिभाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी कृषि और उससे जुड़े विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।

हालांकि, कई परिवारों के सामने आर्थिक संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती होती है। शिक्षण शुल्क, पुस्तकें, छात्रावास और अन्य शैक्षिक खर्चों के कारण विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में छात्रवृत्ति राशि बढ़ने से पात्र विद्यार्थियों पर आर्थिक दबाव कम होने की उम्मीद है।

सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना और उन्हें उच्च शिक्षा से जोड़ना है।

कृषि क्षेत्र को मिलेंगे प्रशिक्षित युवा

कृषि शिक्षा केवल खेती की पारंपरिक विधियों तक सीमित नहीं है। इसमें आधुनिक तकनीक, कृषि प्रबंधन, मृदा संरक्षण, बागवानी, पशुपालन और कृषि व्यवसाय जैसे कई विषय शामिल हैं।

कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भविष्य में कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, उद्यमी और तकनीकी सलाहकार के रूप में काम कर सकते हैं।

छात्रवृत्ति योजना का विस्तार कृषि क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में सहायक हो सकता है।

इसके अलावा कृषि आधारित नए उद्यम स्थापित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने में भी शिक्षित युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

मंडी परिषद की बैठक में दिए गए थे निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 जुलाई 2026 को राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के संचालक मंडल की 172वीं बैठक में छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए थे।

इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3,025.49 करोड़ रुपये के बजट सहित किसान कल्याण और कृषि विपणन से जुड़े कई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई थी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना से जोड़ने और कृषि शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया था।

किसानों की अगली पीढ़ी को मिलेगी आर्थिक मजबूती

मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का विस्तार किसान परिवारों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सीटों की संख्या 1,410 से बढ़कर 2,820 होने और वार्षिक छात्रवृत्ति 60 हजार रुपये किए जाने से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को लाभ मिल सकेगा।

हालांकि, योजना की सफलता पात्र विद्यार्थियों तक समय पर सहायता पहुंचने और चयन प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

सरकार की इस पहल से किसान और खेतिहर मजदूर परिवारों के बच्चों को कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने तथा अपने भविष्य को बेहतर बनाने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

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