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रक्षाबंधन और जन्माष्टमी से पहले महंगाई का झटका चीनी 45 से बढ़कर 65 रुपये किलो पहुंची

हरदोई। रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। घरों की रसोई का बजट पहले ही सीमित था, लेकिन अब प्याज, हरी सब्जियों से लेकर चीनी, आटा, दाल और सरसों तेल जैसी जरूरी वस्तुओं के दामों में तेजी आने से लोगों को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा असर चीनी की बढ़ी कीमतों का देखने को मिल रहा है। करीब एक महीने पहले तक खुदरा बाजार में 45 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब बढ़कर लगभग 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अचानक करीब 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी ने त्योहारों की तैयारियों में जुटे परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
व्यापारियों के अनुसार, थोक बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। वर्तमान में चीनी का थोक भाव करीब 6,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। थोक बाजार में बढ़ी कीमतों का सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ा है और ग्राहकों को अब अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
त्योहारों के समय चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। रक्षाबंधन और जन्माष्टमी के अवसर पर घरों में मिठाई, पकवान और अन्य पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जिनमें चीनी की खपत अधिक होती है। ऐसे समय में कीमतों में बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
गृहणियों का कहना है कि त्योहारों पर पहले से ही खर्च बढ़ जाता है। कपड़े, पूजा सामग्री और अन्य जरूरी सामान खरीदने के साथ अब रसोई का खर्च भी बढ़ गया है। चीनी के अलावा सब्जियों और खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी ने परेशानी और बढ़ा दी है।
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी लोगों की चिंता बढ़ाई है। प्याज रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है और इसकी कीमत बढ़ने से रसोई का हिसाब बिगड़ रहा है। इसके अलावा हरी सब्जियों के दामों में भी तेजी देखी जा रही है। बारिश और मौसम में बदलाव के कारण कई जगहों पर सब्जियों की आवक प्रभावित हुई है, जिसका असर कीमतों पर पड़ा है।
आटा, दाल और सरसों तेल जैसी जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ने से लोगों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है। मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि आमदनी सीमित है, लेकिन खाने-पीने की चीजों के खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के कारण कई खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसके अलावा उत्पादन, परिवहन और आपूर्ति से जुड़े कारण भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
व्यापारियों का कहना है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण थोक बाजार में आई तेजी है। यदि आने वाले दिनों में थोक कीमतों में कमी आती है तो खुदरा बाजार में भी राहत मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल ग्राहकों को बढ़ी हुई कीमतों के साथ ही खरीदारी करनी पड़ रही है।
त्योहार नजदीक होने के कारण बाजार में खरीदारी बढ़ने लगी है। मिठाई दुकानदारों और घरेलू स्तर पर पकवान बनाने वाले परिवारों को चीनी की बढ़ी कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। मिठाई कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में मिठाइयों के दामों पर भी असर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखी जाए और जमाखोरी या कृत्रिम मूल्य वृद्धि पर रोक लगाई जाए। लोगों का कहना है कि त्योहारों के समय आम जनता को राहत देने के लिए बाजार की निगरानी जरूरी है।
फिलहाल रक्षाबंधन और जन्माष्टमी की तैयारियों के बीच महंगाई ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बढ़ती कीमतों के बीच परिवारों को त्योहार की खुशियों के साथ-साथ अपने खर्चों का संतुलन भी बनाना पड़ रहा है।





