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मथुरा/लखनऊ। महज 300 रुपये के रिचार्ज से शुरू होने वाला एक ऑनलाइन कमाई का कथित नेटवर्क जांच के दायरे में आया है। मामला चमेट ऐप से जुड़ा है, जहां फर्जी आईडी बनाकर लड़कियों से लाइव होस्टिंग कराने और गिफ्टिंग तथा वीडियो कॉलिंग के जरिए कमाई करने का आरोप है। मथुरा के मोतीकुंज इलाके में कथित तौर पर चल रहे इस नेटवर्क की कड़ियां सामने आने के बाद लखनऊ एसटीएफ भी मामले को लेकर सक्रिय हुई। इस नेटवर्क को 12वीं पास प्रवीन कुमार चला रहा था। आरोप है कि ऐप पर मिलने वाले क्वाइन और गिफ्टिंग के माध्यम से होने वाली कमाई को बाद में विदेशी कंपनी की मदद से बैंक खातों में भुगतान के रूप में भेजा जाता था।
इस पूरे मामले में ऐप पर फर्जी आईडी बनाने, लड़कियों से लाइव होस्टिंग कराने और डिजिटल माध्यम से कमाई के संचालन जैसे पहलू सामने आए हैं। शुरुआती विवरण के मुताबिक, इस व्यवस्था में रिचार्ज, वर्चुअल क्वाइन, लाइव होस्टिंग और बैंक खातों में भुगतान के बीच एक कड़ी बनाई गई थी। हालांकि, नेटवर्क में कुल कितने लोग शामिल थे, कितनी लड़कियां लाइव होस्टिंग करती थीं और कितनी रकम का लेन-देन हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
300 रुपये के रिचार्ज से शुरू होता था खेल
मामले के अनुसार, चमेट ऐप पर 300 रुपये के रिचार्ज के जरिए क्वाइन हासिल किए जाते थे। इसके बाद ऐप पर गिफ्टिंग और वीडियो कॉलिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से कमाई का कथित तरीका अपनाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में वर्चुअल क्वाइन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्वाइन या वर्चुअल गिफ्ट का इस्तेमाल कई बार उपयोगकर्ताओं के बीच भुगतान जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता है। इस मामले में आरोप है कि इन्हीं सुविधाओं के जरिए लाइव होस्टिंग से कमाई का नेटवर्क चलाया जा रहा था। हालांकि, 300 रुपये के रिचार्ज के बदले कितने क्वाइन मिलते थे और प्रत्येक क्वाइन का वास्तविक मूल्य कितना था, इसका विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
जांच के लिहाज से यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि रिचार्ज से लेकर भुगतान तक पैसा किस तरह आगे बढ़ता था और इस प्रक्रिया में शामिल खातों की क्या भूमिका थी।
फर्जी आईडी बनाकर लाइव होस्टिंग कराने का आरोप
इस मामले का एक प्रमुख पहलू चमेट ऐप पर फर्जी आईडी बनाए जाने का आरोप है। बताया गया है कि इन आईडी के जरिए लड़कियों से लाइव होस्टिंग कराई जाती थी। इसके माध्यम से गिफ्टिंग और वीडियो कॉलिंग से कमाई का कथित नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
फर्जी आईडी के इस्तेमाल का आरोप सामने आने के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि ऐप पर खाते किसके नाम से बनाए गए थे और उनका संचालन कौन कर रहा था। इसी तरह, लाइव होस्टिंग करने वाली लड़कियों की भूमिका, उनके खातों का नियंत्रण और उन्हें भुगतान किए जाने की प्रक्रिया भी जांच के महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि लाइव होस्टिंग करने वाली सभी लड़कियों को इस व्यवस्था की पूरी जानकारी थी या नहीं। यह भी सामने नहीं आया है कि उन्हें किस आधार पर जोड़ा गया था और कमाई का कितना हिस्सा उन्हें दिया जाता था। इन पहलुओं के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालने के लिए अधिक जानकारी जरूरी है।
मथुरा के मोतीकुंज से सामने आई नेटवर्क की कड़ियां
बताया गया है कि मथुरा के मोतीकुंज इलाके में कथित तौर पर यह नेटवर्क चल रहा था। यहां से जुड़े विवरण सामने आने के बाद मामले की कड़ियां खुलने लगीं। इस नेटवर्क में 12वीं पास प्रवीन कुमार की भूमिका सामने आई है, जिस पर पूरे संचालन को चलाने का आरोप है।
मामले का दायरा केवल लाइव होस्टिंग तक सीमित नहीं बताया गया है। इसमें फर्जी आईडी बनाने, वर्चुअल क्वाइन के इस्तेमाल, वीडियो कॉलिंग और भुगतान की व्यवस्था जैसे अलग-अलग पहलू शामिल हैं। इन सभी गतिविधियों के बीच किस तरह तालमेल बनाया गया था, इसकी जानकारी सामने आने पर नेटवर्क की पूरी कार्यप्रणाली स्पष्ट हो सकेगी।
हालांकि, प्रवीन कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों और नेटवर्क में उसकी वास्तविक भूमिका की पुष्टि जांच से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है। उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तारी, दर्ज प्राथमिकी या किसी विशेष कानूनी धारा का विवरण नहीं दिया गया है।
विदेशी कंपनी के जरिए बैंक खातों में भुगतान
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू विदेशी कंपनी के माध्यम से बैंक खातों में भुगतान किए जाने का आरोप है। जानकारी के अनुसार, लाइव होस्टिंग और गिफ्टिंग से जुड़ी कमाई को भुगतान के रूप में बैंक खातों तक पहुंचाया जाता था।
इस तरह के लेन-देन में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होता है कि भुगतान किस कंपनी के माध्यम से किया गया, पैसा किन खातों में पहुंचा और प्राप्तकर्ताओं के बीच उसका वितरण कैसे हुआ। यदि कई खातों का इस्तेमाल किया गया हो, तो प्रत्येक खाते के लेन-देन और उसके धारक की भूमिका की जांच भी जरूरी हो सकती है।
हालांकि, विदेशी कंपनी का नाम, भुगतान की कुल राशि, लेन-देन की अवधि और संबंधित बैंक खातों की संख्या का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस नेटवर्क में हुई कमाई या उसके कानूनी स्वरूप के बारे में फिलहाल कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
लखनऊ एसटीएफ के सामने जांच के कई पहलू
मथुरा के मोतीकुंज से जुड़े कथित नेटवर्क की कड़ियां सामने आने के बाद लखनऊ एसटीएफ के लिए भी मामला ध्यान देने योग्य बन गया। इस प्रकरण में डिजिटल आईडी, लाइव होस्टिंग, वर्चुअल क्वाइन और बैंक खातों के जरिए भुगतान जैसे कई पहलू शामिल बताए गए हैं।
जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि नेटवर्क किस तरह काम करता था, फर्जी आईडी किसने तैयार कीं, लाइव होस्टिंग के लिए लड़कियों को कैसे जोड़ा गया और विदेशी कंपनी के माध्यम से भुगतान किस प्रक्रिया से होता था। इसके साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि प्रवीन कुमार के अलावा इस व्यवस्था में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार, चमेट ऐप पर फर्जी आईडी बनाकर लाइव होस्टिंग कराने और गिफ्टिंग तथा वीडियो कॉलिंग से कमाई का कथित नेटवर्क मथुरा के मोतीकुंज से संचालित हो रहा था। 300 रुपये के रिचार्ज से लेकर हजारों क्वाइन और बैंक खातों में भुगतान तक की कड़ियों ने मामले को चर्चा में ला दिया है। अब पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली, लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है।





