उत्तर प्रदेश

गंगा पर बनेगा 1600 करोड़ का फोरलेन पुल

Saba Naaz
4 July 2026 9:48 PM IST
गंगा पर बनेगा 1600 करोड़ का फोरलेन पुल
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उत्तर प्रदेश: बलिया और बिहार के आरा-पटना क्षेत्र के बीच आवागमन को सुगम बनाने के लिए गंगा नदी पर एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। बलिया के महुली घाट पर करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फोरलेन पुल का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है और इसकी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) भी लगभग तैयार हो चुकी है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के तहत पूरी की जाएगी। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को राष्ट्रीय राजमार्ग-922 से जोड़ने के लिए लगभग 27 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क और आधुनिक पुल का निर्माण प्रस्तावित है। इस पुल के बनने से उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा।

इस पुल के बनने के बाद यात्रा दूरी में बड़ी कमी आएगी। वर्तमान में बलिया से बिहार के आरा पहुंचने के लिए लोगों को लगभग 80 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। लेकिन नए पुल के निर्माण के बाद यह दूरी घटकर करीब 40 किलोमीटर रह जाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन खर्च भी कम होगा। यात्रियों के साथ-साथ व्यापारिक वाहनों को भी इससे बड़ा लाभ मिलेगा। यह परियोजना पूर्वांचल और बिहार के लाखों लोगों के लिए राहत लेकर आएगी। इस पुल से बलिया, आरा, छपरा, सिवान, भोजपुर, बक्सर, गाजीपुर, मऊ और देवरिया जैसे जिलों की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। इसके अलावा दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे बड़े शहरों तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा। इससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पुल लंबे समय से लंबित मांग थी। वर्षों से इस क्षेत्र के लोग गंगा पर एक मजबूत पुल की आवश्यकता महसूस कर रहे थे। अब यह परियोजना जमीन पर उतरने जा रही है, जिससे लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। इस पुल को केवल एक यातायात परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का माध्यम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से इस क्षेत्र में नए उद्योगों के आने की संभावना बढ़ेगी। व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। किसानों को अपनी उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी, जिससे उनकी आमदनी में भी सुधार होने की उम्मीद है।

इस परियोजना को ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के उस सपने से जोड़ा जा रहा है, जिसमें गंगा के दोनों किनारों को विकास की एक मजबूत धारा से जोड़ने की कल्पना की गई थी। इस दिशा में पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त की भूमिका भी अहम बताई जा रही है। कुल मिलाकर यह फोरलेन पुल पूर्वांचल और बिहार के बीच विकास की नई राह खोलेगा। यह न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक संरचना को भी मजबूत करेगा। आने वाले समय में यह परियोजना क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित हो सकती है।

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