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Khatauli में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, मुनिश्री के प्रवचन से भावविभोर हुए श्रद्धालु

Khatauli खतौली : खतौली (मुजफ्फरनगर)। स्थानीय फलावदा रोड क्षेत्र के जक्की वाला स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर परिसर में मंगलवार की सुबह आध्यात्मिक वातावरण के बीच भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री 108 अनुपम सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 निर्मोह सागर जी महाराज के सानिध्य में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। धर्मसभा में मुनिश्री ने आत्मचिंतन, संयम, सद्भाव और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।
धर्मसभा का मुख्य विषय "समझ अच्छी तो समय अच्छा" रहा। मुनि श्री अनुपम सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में जीवन के गहरे रहस्यों को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि समय कभी अच्छा या बुरा नहीं होता, बल्कि मनुष्य की सोच और समझ ही परिस्थितियों को सुखद या दुखद बनाती है। उन्होंने कहा कि सही दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और संयम बनाए रखता है, जबकि नकारात्मक सोच रखने वाला व्यक्ति सुख-सुविधाओं के बीच भी परेशान रहता है।
मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि बाहरी परिस्थितियों को बदलने से पहले मनुष्य को अपनी आंतरिक सोच में सुधार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाले अधिकांश दुख बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि मनुष्य की अत्यधिक इच्छाओं, अपेक्षाओं, ईर्ष्या और अहंकार के कारण उत्पन्न होते हैं। यदि व्यक्ति संयम, संतोष और समभाव का मार्ग अपनाए तो जीवन में शांति और आनंद स्वत: आने लगता है।
प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने भौतिक संसाधनों की सीमाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धन, पद, प्रतिष्ठा और सांसारिक वैभव स्थायी नहीं होते, बल्कि समय के साथ बदल जाते हैं। इसके विपरीत आत्मज्ञान, विवेक और अच्छे संस्कार जीवन की वास्तविक पूंजी हैं, जो हमेशा साथ रहते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने व्यवहार और विचारों में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। मुनिश्री ने कहा कि जीवन में शिकायतों की जगह कृतज्ञता, क्रोध की जगह क्षमा, ईर्ष्या की जगह मैत्री और अहंकार की जगह विनम्रता का भाव अपनाना चाहिए। यही भाव मनुष्य को आत्मिक शांति और सच्चे सुख की ओर ले जाते हैं।
धर्मसभा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिभाव से सराबोर रहा। प्रवचन समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला, पुरुष, युवा और बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
आयोजकों ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं। धर्मसभा के सफल आयोजन में जैन समाज के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा।





