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कानपुर में बारिश के बीच जर्जर मकान ढहा सड़क पर फैला मलबा बड़ा हादसा टला

कानपुर। लगातार हो रही बारिश अब शहर के पुराने और जर्जर मकानों के लिए खतरा बनती जा रही है। कानपुर के मूलगंज थाना क्षेत्र के चौबे गोला इलाके में गुरुवार सुबह एक करीब आठ दशक पुराना मकान अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के बाद मकान का मलबा सड़क पर फैल गया, जिससे रास्ता बाधित हो गया।
गनीमत रही कि जिस समय मकान गिरा, उस वक्त आसपास से कोई राहगीर नहीं गुजर रहा था। इसके चलते बड़ा हादसा होने से बच गया। हालांकि, अचानक मकान गिरने की तेज आवाज से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
जानकारी के अनुसार, चौबे गोला क्षेत्र में एमपी निगम का यह पुराना मकान काफी समय से बंद पड़ा हुआ था। लगातार बारिश के कारण मकान की हालत पहले से कमजोर हो गई थी। गुरुवार सुबह अचानक भवन का बड़ा हिस्सा ढह गया और देखते ही देखते पूरा मकान मलबे में बदल गया।
मकान गिरने की आवाज सुनकर आसपास रहने वाले लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए। लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही मूलगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
मकान का मलबा सड़क पर फैल जाने के कारण कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित रहा। पुलिस और संबंधित विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और मलबा हटाने की प्रक्रिया शुरू की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई पुराने और जर्जर मकान मौजूद हैं, जो बारिश के मौसम में खतरा बन सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से ऐसे भवनों की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
बारिश के कारण पुराने भवनों की दीवारों और छतों में नमी बढ़ जाती है, जिससे उनकी मजबूती प्रभावित होती है। ऐसे में लंबे समय से बंद पड़े मकानों के गिरने का खतरा और बढ़ जाता है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि हादसे के समय अगर सड़क पर लोगों की आवाजाही होती तो बड़ा नुकसान हो सकता था। उन्होंने कहा कि प्रशासन को समय रहते जर्जर भवनों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करने की जरूरत है।
शहरों में पुराने मकानों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। लगातार बारिश के दौरान ऐसे भवनों के गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। प्रशासन की ओर से समय-समय पर जर्जर भवनों का सर्वे कराया जाता है, लेकिन कई बार कार्रवाई में देरी होने से खतरा बना रहता है।
अधिकारियों के अनुसार, घटना के बाद भवन की स्थिति और आसपास के क्षेत्र की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि आसपास मौजूद अन्य पुराने भवनों से कोई खतरा तो नहीं है।
बारिश के मौसम में नगर निगम और प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। खासकर पुराने शहर के इलाकों में बने दशकों पुराने मकानों की निगरानी जरूरी हो जाती है।
लोगों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही कमजोर भवनों को चिन्हित कर जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि जान-माल के नुकसान से बचा जा सके।
फिलहाल चौबे गोला में हुए इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रशासन ने राहत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कदम उठाए हैं।
इस घटना ने एक बार फिर शहर के जर्जर भवनों की समस्या को सामने ला दिया है। लगातार बारिश के बीच ऐसे मकानों को लेकर सतर्कता बरतना बेहद जरूरी हो गया है।





