उत्तर प्रदेश

सहमति से बने संबंध पर case नहीं बन सकता अपराध,

Ratna Netam
26 Jun 2026 8:39 PM IST
सहमति से बने संबंध पर case नहीं बन सकता अपराध,
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हाईकोर्ट का फैसला

Prayagraj प्रयागराज : से एक अहम कानूनी फैसला सामने आया है, जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कानपुर के युवक उदित शुक्ला के खिलाफ दर्ज बलात्कार मामले में दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने सुनाया।

मामले के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। दोनों एक ही कोचिंग सेंटर में पढ़ाई करते थे और इसी दौरान उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। शिकायत में कहा गया था कि बाद में जब आरोपी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी मिली और उसके परिवार ने शादी से इनकार कर दिया, तो पीड़िता ने दिसंबर 2024 में एफआईआर दर्ज कराई।

इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर गौर किया। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता लगभग 28 वर्ष की एक समझदार और वयस्क महिला थी। अदालत ने यह भी देखा कि तीन वर्षों तक कथित संबंधों के दौरान उसने किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।

न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों में फोटोग्राफ्स और गवाहों के बयान भी शामिल थे, जिनमें यह संकेत मिला कि संबंध सहमति से बने थे। स्वतंत्र गवाहों ने मारपीट या धमकी के आरोपों का समर्थन नहीं किया और उन्हें निराधार बताया।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि यह मामला लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध का प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि केवल शादी न होने को आधार बनाकर इसे बलात्कार का मामला नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में जब दोनों वयस्कों के बीच सहमति से संबंध बने हों, तो बाद में रिश्ते के टूटने को आपराधिक रूप देना उचित नहीं है।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और हर टूटे हुए रिश्ते को आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। न्यायालय ने यह भी माना कि एफआईआर दर्ज करना इस मामले में “टूटे रिश्ते का बदला” प्रतीत होता है।

इस फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सहमति से बने संबंधों और उनके बाद उत्पन्न विवादों को लेकर स्पष्ट दिशा देता है। वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े मामलों में न्यायिक संतुलन के रूप में देख रहे हैं।

फिलहाल अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी उदित शुक्ला के खिलाफ चल रही आपराधिक प्रक्रिया समाप्त हो गई है। यह मामला अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह सहमति, रिश्तों और कानून के दायरे को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।

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