उत्तर प्रदेश

मोबाइल हैक कर 75 लाख की ठगी, 3 गिरफ्तार

Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 5:19 PM IST
मोबाइल हैक कर 75 लाख की ठगी, 3 गिरफ्तार
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उत्तर प्रदेश। साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मैनेजर का वाट्सएप हैक कर चैटिंग के जरिए 75 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। साइबर क्राइम थाना और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में आरोपितों के कब्जे से तीन एंड्रायड मोबाइल फोन, नेपाली मोबाइल नंबर और एक चेकबुक बरामद की गई है। पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े बैंक खातों में करीब एक करोड़ 55 लाख रुपये की धनराशि होल्ड कराई है। इस रकम को वापस कराने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस की इस कार्रवाई से डिजिटल माध्यम से की जा रही धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपितों की पहचान महराजगंज जिले के सोनौली निवासी विनोद कुमार मिश्रा, बाराबंकी जिले के रामनगर थाना क्षेत्र के सेमरा निवासी लवकेश कुमार सिंह और महराजगंज जिले के चौक क्षेत्र स्थित नक्सा बक्सा गांव निवासी कमल यादव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपित साइबर ठगी के मामले में शामिल थे।
वाट्सएप हैक कर दिया 75 लाख की ठगी को अंजाम
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने एक मैनेजर का वाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया था। इसके बाद चैटिंग के माध्यम से धोखाधड़ी करते हुए 75 लाख रुपये की ठगी की गई।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें किसी व्यक्ति के वाट्सएप अकाउंट का गलत इस्तेमाल कर बड़ी रकम की धोखाधड़ी की गई। वाट्सएप जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर होने वाली बातचीत का उपयोग साइबर अपराधियों ने अपने फायदे के लिए किया।
हालांकि, आरोपितों ने मैनेजर का वाट्सएप किस तकनीक से हैक किया और ठगी की रकम किस तरह ट्रांसफर कराई गई, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
साइबर क्राइम और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई
इस मामले में साइबर क्राइम थाना और सर्विलांस टीम ने मिलकर कार्रवाई की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन में पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया।
संयुक्त टीम की कार्रवाई में घटना में इस्तेमाल किए गए तीन एंड्रायड मोबाइल फोन बरामद किए गए। इसके अलावा नेपाली मोबाइल नंबर और एक चेकबुक भी पुलिस के हाथ लगी है।
बरामद मोबाइल फोन और अन्य सामग्री इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। पुलिस इनके माध्यम से साइबर ठगी से जुड़ी गतिविधियों और आरोपितों की भूमिका की जांच कर सकती है।
तीन अलग-अलग स्थानों के रहने वाले हैं आरोपी
पुलिस ने जिन तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है, वे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं। पहला आरोपित विनोद कुमार मिश्रा महराजगंज जिले के सोनौली क्षेत्र का निवासी है।
दूसरा आरोपित लवकेश कुमार सिंह बाराबंकी जिले के रामनगर थाना क्षेत्र के सेमरा गांव का रहने वाला है। तीसरा आरोपित कमल यादव महराजगंज जिले के चौक क्षेत्र स्थित नक्सा बक्सा गांव का निवासी है।
पुलिस ने तीनों को अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का सदस्य बताया है। हालांकि, इस गिरोह के अन्य सदस्यों और गतिविधियों के विस्तार से संबंधित पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
बैंक खातों में 1.55 करोड़ रुपये कराए होल्ड
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई बैंक खातों में मौजूद करीब एक करोड़ 55 लाख रुपये की धनराशि होल्ड कराना है।पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से संबंधित खातों में इस धनराशि को होल्ड कराया गया है। यह रकम 75 लाख रुपये की बताई गई ठगी की राशि से अधिक है।
इससे संबंधित खातों और उनमें हुए वित्तीय लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, होल्ड कराई गई पूरी रकम इसी एक घटना से संबंधित है या अन्य संदिग्ध लेनदेन भी इसमें शामिल हैं, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।पुलिस ने बताया कि धनराशि वापस कराने की प्रक्रिया जारी है। अभी रकम पीड़ित को वापस मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
नेपाली मोबाइल नंबर की बरामदगी भी महत्वपूर्ण
आरोपितों के कब्जे से मिले नेपाली मोबाइल नंबर की जानकारी भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। पुलिस ने मोबाइल नंबर के साथ तीन एंड्रायड फोन और एक चेकबुक बरामद की है।
हालांकि, केवल नेपाली मोबाइल नंबर मिलने से आरोपितों के किसी विदेशी साइबर गिरोह से जुड़े होने की पुष्टि नहीं होती। यह जांच का विषय है कि नंबर का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया था।बरामद चेकबुक से संबंधित बैंक खाते की भूमिका और मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड भी मामले की जांच में उपयोगी हो सकते हैं।
वाट्सएप के जरिए साइबर ठगी का बढ़ता खतरा
डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बातचीत का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर ठगी के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। अपराधी कई मामलों में किसी परिचित व्यक्ति या अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करके लोगों को धोखा देते हैं।
ऐसी धोखाधड़ी में पीड़ित को विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती है कि संदेश किसी विश्वसनीय व्यक्ति ने भेजा है। इसके बाद पैसों के लेनदेन से संबंधित निर्देश देकर ठगी की जा सकती है।
इस मामले में भी मैनेजर का वाट्सएप हैक कर चैटिंग के जरिए 75 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप सामने आया है। हालांकि, घटना में इस्तेमाल की गई तकनीकी प्रक्रिया का विस्तृत खुलासा अभी उपलब्ध नहीं है।
रकम वापस कराने की प्रक्रिया जारी
पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े खातों में करीब 1.55 करोड़ रुपये होल्ड कराए हैं। अब इस रकम को वापस कराने की प्रक्रिया चल रही है।बैंक खातों में धनराशि होल्ड होने का अर्थ है कि संबंधित रकम के आगे के लेनदेन को रोका गया है। हालांकि, यह पीड़ित के खाते में धनराशि वापस आने के बराबर नहीं है। रकम की वापसी संबंधित बैंकिंग और कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन होती है।इस कार्रवाई के बाद पीड़ित को धनराशि वापस मिलने की संभावना बनी है, लेकिन वास्तविक वापसी की पुष्टि होना अभी बाकी है।
साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी
साइबर अपराधों से बचने के लिए अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध फाइल डाउनलोड करने और किसी के साथ ओटीपी या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।यदि किसी परिचित या वरिष्ठ अधिकारी के वाट्सएप से बड़ी रकम भेजने का संदेश मिले, तो भुगतान करने से पहले दूसरे माध्यम से उसकी पुष्टि करना जरूरी है।किसी व्यक्ति के वाट्सएप अकाउंट से संदेश आने का मतलब यह नहीं है कि संदेश उसी व्यक्ति ने भेजा है।
साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत की सुविधा उपलब्ध है।
तीन आरोपितों की गिरफ्तारी से जांच को मिली दिशा
साइबर क्राइम थाना और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में तीन आरोपितों की गिरफ्तारी तथा मोबाइल फोन, नेपाली नंबर और चेकबुक की बरामदगी महत्वपूर्ण है।इस मामले में पुलिस के सामने अब गिरोह की गतिविधियों, डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की पूरी जानकारी जुटाने की चुनौती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 75 लाख रुपये की ठगी के मामले में तीन आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं और करीब 1.55 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड कराई गई है। आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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