उत्तर प्रदेश

सेप्टिक टैंक में गिरा 7 साल का बच्चा, दो घंटे बाद मिला शव

Rajeshwari Nishad
21 Oct 2026 11:54 PM IST
सेप्टिक टैंक में गिरा 7 साल का बच्चा, दो घंटे बाद मिला शव
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फतेहपुर : फतेहपुर रोड के मीरापुर मोड़ के पास एक दर्दनाक हादसे में सात वर्षीय मासूम की सेप्टिक टैंक में डूबने से मौत हो गई। घर के सामने बने चबूतरे में सेप्टिक टैंक को प्लाईवुड से ढककर रखा गया था। बताया जा रहा है कि प्लाईवुड सड़कर कमजोर हो चुका था। इसी दौरान बालक का पैर उस पर पड़ा और वह सीधे टैंक में जा गिरा। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद बालक का शव बाहर निकाला गया।
घर के सामने हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, फतेहपुर रोड पर मीरापुर मोड़ के पास एक घर के सामने बने चबूतरे में सेप्टिक टैंक था। टैंक को सुरक्षित ढंग से ढकने के बजाय उसके ऊपर प्लाईवुड रखा गया था। समय के साथ प्लाईवुड सड़कर कमजोर हो गया था, जिससे वह किसी व्यक्ति का वजन सहन करने की स्थिति में नहीं रहा।
इसी दौरान सात वर्षीय बालक वहां पहुंचा। जैसे ही उसका पैर कमजोर प्लाईवुड पर पड़ा, वह टूट गया और बच्चा टैंक के भीतर गिर गया। अचानक हुए इस हादसे से आसपास मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बालक के टैंक में गिरने की जानकारी मिलते ही परिजनों और आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया।
ग्रामीणों ने शुरू किए बचाव के प्रयास
बालक के टैंक में गिरने की सूचना मिलने के बाद ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों ने अपने स्तर पर बच्चे को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन टैंक की स्थिति और गहराई के कारण बचाव कार्य में मुश्किलें आईं। इसके बाद फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम घटनास्थल पर पहुंची। बचावकर्मियों ने ग्रामीणों के सहयोग से बच्चे की तलाश शुरू की। टैंक के भीतर बालक का पता लगाने और उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जाल का इस्तेमाल किया गया। बचाव अभियान के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जुटी रही और सभी को बच्चे के सुरक्षित निकलने की उम्मीद थी।
दो घंटे की मशक्कत के बाद निकाला गया शव
फायर ब्रिगेड के जवानों और ग्रामीणों ने मिलकर करीब दो घंटे तक बचाव अभियान चलाया। काफी प्रयासों के बाद बालक का शव टैंक से बाहर निकाला जा सका। हालांकि, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस खबर से परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और घटना से आसपास का माहौल गमगीन हो गया।
सात साल की उम्र में बच्चे की इस तरह दर्दनाक मौत ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया। जिस जगह पर बच्चे का आना-जाना संभव था, वहां खुले या कमजोर ढक्कन वाले सेप्टिक टैंक का होना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
सुरक्षा में लापरवाही बन सकती है बड़े हादसे की वजह
यह हादसा एक बार फिर घरों के आसपास बने सेप्टिक टैंकों और अन्य गड्ढों को सुरक्षित तरीके से ढककर रखने की जरूरत को सामने लाता है। कई बार अस्थायी ढक्कन के रूप में प्लाईवुड, लकड़ी या कमजोर सामग्री का इस्तेमाल कर लिया जाता है। शुरुआत में यह ढक्कन ठीक दिखाई दे सकता है, लेकिन नमी और मौसम के असर से धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है। ऐसे में उसके ऊपर पैर पड़ने पर दुर्घटना हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सेप्टिक टैंक का ढक्कन मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित तरीके से बंद होना चाहिए। बच्चों की पहुंच वाले स्थानों पर विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। यदि किसी टैंक का ढक्कन टूट गया हो या कमजोर हो चुका हो, तो उसे तुरंत बदलना चाहिए। टैंक के आसपास सुरक्षा घेरा लगाना और बच्चों को ऐसी जगहों से दूर रखना भी आवश्यक है।
अभिभावकों और मकान मालिकों के लिए जरूरी सबक
मीरापुर मोड़ के पास हुई यह घटना परिवारों और मकान मालिकों के लिए गंभीर चेतावनी है। घर के सामने, आंगन या चबूतरे के आसपास बने सेप्टिक टैंक, पानी की टंकियों, बोरवेल और अन्य गहरे गड्ढों की नियमित जांच की जानी चाहिए। केवल प्लाईवुड या कमजोर लकड़ी से ढक देना पर्याप्त सुरक्षा नहीं है।
बच्चे खेलते समय अक्सर आसपास की जगहों पर ध्यान नहीं दे पाते। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए वयस्कों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी खुले या असुरक्षित गड्ढे को तुरंत बंद करना और मजबूत ढक्कन लगाना जरूरी है, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
फतेहपुर रोड के मीरापुर मोड़ के पास सात वर्षीय मासूम की मौत ने पूरे इलाके को दुखी कर दिया है। यह हादसा याद दिलाता है कि सुरक्षा से जुड़ी छोटी-सी लापरवाही भी किसी परिवार की जिंदगी में कभी न भरने वाला दुख ला सकती है।
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