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600 जवान और चार ट्रैफिक थाने फिर भी नो-एंट्री में दौड़ रहे मालवाहक वाहन

गोरखपुर। शहर की सड़कों पर यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए करीब 600 पुलिसकर्मियों और होमगार्ड की तैनाती की गई है। इसके अलावा यातायात व्यवस्था की निगरानी के लिए चार ट्रैफिक थाने भी बनाए गए हैं। इतनी बड़ी व्यवस्था के बावजूद नो-एंट्री के निर्धारित समय में प्रतिबंधित मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह नहीं रुक पा रही है। शहर के व्यस्त मार्गों पर प्रतिबंधित समय में भी मालवाहक वाहन नजर आने से यातायात व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शहर में बढ़ती वाहनों की संख्या के कारण पहले ही प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव रहता है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इसी दबाव को कम करने और आम वाहन चालकों को राहत देने के उद्देश्य से मालवाहक और भारी वाहनों के प्रवेश के लिए समय निर्धारित किया गया है। नो-एंट्री व्यवस्था का उद्देश्य है कि व्यस्त समय में बड़े वाहन शहर के भीतर प्रवेश न करें और यातायात सामान्य बना रहे।
इसके लिए शहर के बाहरी हिस्सों और प्रमुख प्रवेश मार्गों पर पुलिसकर्मियों और होमगार्ड की ड्यूटी लगाई गई है। जिम्मेदारी है कि प्रतिबंधित समय में आने वाले मालवाहक वाहनों को शहर के बाहर ही रोका जाए। इसके बावजूद कई मालवाहक वाहन नो-एंट्री के दौरान शहर की सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे वाहनों के शहर के भीतर आने से सबसे ज्यादा असर उन सड़कों पर पड़ता है जहां पहले से ही वाहनों की संख्या अधिक रहती है। बड़े मालवाहक वाहन सड़क का ज्यादा हिस्सा घेरते हैं। इनके कारण अन्य वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है और चौराहों पर वाहनों की लंबी कतार लगने की स्थिति बन सकती है। संकरी सड़कों पर समस्या और गंभीर हो जाती है।
यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए करीब 600 पुलिसकर्मी और होमगार्ड तैनात होने के बावजूद प्रतिबंधित वाहनों की आवाजाही इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है। यदि शहर के बाहरी मार्गों पर ही इन वाहनों को रोकने की व्यवस्था की गई है तो फिर वे प्रतिबंधित समय में अंदर तक कैसे पहुंच रहे हैं, यह महत्वपूर्ण सवाल है।
शहर में चार यातायात थानों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। ट्रैफिक पुलिस की टीमें प्रमुख चौक-चौराहों, बाजार क्षेत्रों और व्यस्त मार्गों पर यातायात संभालती हैं। इसके बावजूद नो-एंट्री नियम का उल्लंघन सामने आना बताता है कि प्रवेश मार्गों पर निगरानी को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
नो-एंट्री के दौरान मालवाहक वाहनों के प्रवेश से केवल ट्रैफिक जाम की समस्या ही नहीं बढ़ती, बल्कि दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है। व्यस्त समय में सड़कों पर दोपहिया वाहन, कार, ऑटो, ई-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन के वाहनों की संख्या अधिक रहती है। इनके बीच बड़े मालवाहक वाहनों की आवाजाही से सड़क पर उपलब्ध जगह कम हो जाती है।
स्कूल, कार्यालय और बाजार के व्यस्त समय में ट्रैफिक का दबाव सबसे अधिक रहता है। ऐसे समय में यदि भारी या मालवाहक वाहन भी सड़कों पर पहुंच जाएं तो छोटे वाहनों को निकलने में परेशानी होती है। कई बार एक बड़े वाहन के किसी चौराहे या संकरे मार्ग पर फंसने से पीछे वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।
नो-एंट्री व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए शहर के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर लगातार निगरानी जरूरी है। केवल जवानों की तैनाती पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रतिबंधित समय में बिना अनुमति कोई मालवाहक वाहन प्रवेश न कर सके। इसके लिए वाहनों की जांच और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाना जरूरी माना जा रहा है।
शहर के बाहरी मार्गों पर तैनात जवानों की भूमिका इस व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण है। यदि प्रतिबंधित वाहन बाहरी चेकिंग प्वाइंट को पार कर शहर में प्रवेश कर रहे हैं तो यह देखना जरूरी है कि इसके पीछे क्या कारण हैं। क्या कुछ वाहनों को आवश्यक सेवाओं या विशेष अनुमति के तहत प्रवेश दिया जा रहा है या नियमों का उल्लंघन कर वाहन शहर के अंदर पहुंच रहे हैं, इसकी स्पष्ट निगरानी जरूरी है।
तकनीक का इस्तेमाल भी इस समस्या को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों और चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए प्रतिबंधित समय में प्रवेश करने वाले मालवाहक वाहनों की पहचान की जा सकती है। वाहन नंबर के आधार पर नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की व्यवस्था प्रभावी होने से उल्लंघन कम किया जा सकता है।
इसके साथ ही नो-एंट्री के समय और प्रतिबंधित मार्गों की स्पष्ट जानकारी वाहन चालकों तक पहुंचाना भी जरूरी है। शहर के प्रवेश मार्गों पर बड़े और स्पष्ट संकेतक लगाए जाने चाहिए, ताकि बाहर से आने वाले वाहन चालकों को पहले ही पता चल सके कि किस समय शहर में प्रवेश प्रतिबंधित है और उन्हें कहां रुकना है।
यातायात व्यवस्था में लगे करीब 600 पुलिसकर्मियों और होमगार्ड के साथ चार ट्रैफिक थानों की मौजूदगी शहर के ट्रैफिक प्रबंधन के लिए बड़ा अमला है। ऐसे में लोगों की अपेक्षा है कि नो-एंट्री जैसे महत्वपूर्ण नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
फिलहाल प्रतिबंधित समय में मालवाहक वाहनों के शहर में नजर आने से व्यवस्था पर सवाल बने हुए हैं। यातायात का दबाव कम करने के लिए जरूरी है कि नो-एंट्री नियम केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि शहर के सभी प्रवेश मार्गों पर इसका प्रभावी तरीके से पालन कराया जाए। लगातार निगरानी और नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई से ही व्यस्त मार्गों पर यातायात का दबाव कम किया जा सकता है।





