उत्तर प्रदेश

जलभराव से राहत के लिए 55 करोड़ की कार्ययोजना, नौ प्रस्तावों को मिली मंजूरी

Kavita2
13 Sept 2026 5:12 PM IST
जलभराव से राहत के लिए 55 करोड़ की कार्ययोजना, नौ प्रस्तावों को मिली मंजूरी
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प्रयागराज। शहर में वर्षा के दौरान होने वाले जलभराव और सीवर निकासी की समस्या से निपटने के लिए जलकल विभाग ने करीब 55 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है। नगर निगम सदन ने बाढ़ पंपिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने और सीवर लाइनों में सुधार से संबंधित नौ प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी है। इन परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

महापौर ने बताया कि स्वीकृत योजनाओं को लागू करने में लगभग 55 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। नगर निगम सदन से स्वीकृति मिलने के बाद अब वित्तीय संसाधन जुटाने और शासन स्तर से बजट मंजूर कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। पर्याप्त बजट मिलने पर जलकल विभाग अलग-अलग स्थानों पर प्रस्तावित कार्य शुरू कर सकेगा।

स्वीकृत प्रस्तावों में सबसे बड़ा काम मेडिकल कॉलेज चौराहे पर नई सीवर पाइप लाइन बिछाने का है। इस परियोजना पर करीब 12.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नई लाइन कुलभास्कर आश्रम स्कूल के पास से रेलवे लाइन के नीचे होते हुए आगे ले जाई जाएगी। रेलवे ट्रैक और आसपास की आवाजाही को कम से कम प्रभावित करने के लिए पाइप लाइन ट्रेंचलेस तकनीक से डालने की योजना है।

बताया गया कि रामबाग फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान इलाके में पहले से मौजूद पुरानी सीवर लाइन ध्वस्त हो गई थी। सीवर लाइन प्रभावित होने के बाद वर्षा और सीवर के पानी की निकासी ठीक तरीके से नहीं हो पा रही है। इसके कारण मेडिकल कॉलेज चौराहे और आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा होने की समस्या बनी रहती है। नई पाइप लाइन से निकासी व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित करने का प्रयास किया जाएगा।

मेडिकल कॉलेज चौराहा शहर के व्यस्त क्षेत्रों में शामिल है। यहां अस्पताल, शिक्षण संस्थान, बाजार और प्रमुख संपर्क मार्ग होने के कारण बड़ी संख्या में वाहनों तथा लोगों की आवाजाही रहती है। बारिश के समय जलभराव होने से यातायात प्रभावित होता है और पैदल चलने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। सीवर का पानी सड़क पर आने की स्थिति में स्थानीय दुकानदारों और निवासियों की समस्या बढ़ जाती है।

नई पाइप लाइन की क्षमता और मार्ग को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वर्षा तथा सीवर के पानी को बेहतर तरीके से आगे पहुंचाया जा सके। कुलभास्कर आश्रम स्कूल के पास रेलवे लाइन होने के कारण पारंपरिक तरीके से सड़क या जमीन की लंबी खुदाई करना कठिन हो सकता है। इसीलिए ट्रेंचलेस विधि अपनाने का प्रस्ताव बनाया गया है।

ट्रेंचलेस तकनीक में पूरी सतह को खोदे बिना भूमिगत पाइप लाइन डाली जा सकती है। मशीनों के माध्यम से जमीन के भीतर निर्धारित गहराई पर रास्ता बनाकर पाइप को एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचाया जाता है। इससे रेलवे परिचालन, सड़क यातायात और आसपास की संरचनाओं पर पड़ने वाला प्रभाव कम किया जा सकता है। हालांकि काम शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति और तकनीकी समन्वय जरूरी होगा।

55 करोड़ रुपये की कार्ययोजना में बाढ़ पंपिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव भी शामिल हैं। बारिश के दौरान निचले इलाकों में जमा पानी को निकालने में इन स्टेशनों की प्रमुख भूमिका रहती है। यदि पंपों की क्षमता कम हो या मशीनें अपेक्षित गति से काम न करें तो तेज वर्षा के समय पानी की निकासी में देरी होती है। क्षमता बढ़ने से अधिक मात्रा में पानी को कम समय में बाहर निकालने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सीवर लाइनों में गाद, कचरा या अन्य अवरोध जमा होने से उनकी जल निकासी क्षमता प्रभावित होती है। कई स्थानों पर पुरानी पाइप लाइनें बढ़ती आबादी और वर्तमान जल प्रवाह के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गई हैं। नगर निगम की योजना में ऐसी लाइनों को सुधारने और आवश्यक स्थानों पर उनकी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है।

महापौर के अनुसार, नौ प्रस्तावों को सदन की मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि इन सभी कार्यों का क्रियान्वयन बजट की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। शासन से धनराशि मंजूर होने के बाद परियोजनाओं की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद निविदा जारी कर निर्माण एजेंसी का चयन किया जा सकता है।

शहर में जलभराव केवल यातायात की समस्या नहीं है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से सड़कें क्षतिग्रस्त होती हैं और आसपास गंदगी फैलने का खतरा बढ़ता है। सीवर का पानी वर्षा के पानी में मिल जाने पर लोगों को दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण का सामना करना पड़ता है। इसलिए नई पाइप लाइन तथा पंपिंग स्टेशन की क्षमता वृद्धि को बुनियादी शहरी सुविधाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण काम माना जा रहा है।

परियोजनाओं को लागू करते समय विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता होगी। मेडिकल कॉलेज चौराहे की पाइप लाइन रेलवे क्षेत्र के नीचे से गुजरनी है। ऐसे में रेलवे, नगर निगम, जलकल विभाग और यातायात से संबंधित अधिकारियों को मिलकर काम करना होगा। तकनीकी मानकों का पालन नहीं होने पर पाइप लाइन या आसपास की संरचनाओं पर भविष्य में असर पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि योजनाएं केवल कागज तक सीमित नहीं रहेंगी और शासन से बजट मिलने के बाद निर्धारित समय में काम पूरा कराया जाएगा। निर्माण के दौरान गुणवत्ता की नियमित निगरानी भी आवश्यक होगी। पाइप लाइन बिछाने के बाद उसका परीक्षण और निकासी क्षमता की जांच की जानी चाहिए, ताकि बारिश आने पर किसी प्रकार की परेशानी न हो।

नगर निगम सदन की स्वीकृति के बाद 55 करोड़ रुपये की कार्ययोजना ने शहर की जल निकासी व्यवस्था में व्यापक सुधार की उम्मीद जगाई है। अब अगला महत्वपूर्ण चरण शासन से बजट प्राप्त करना है। धनराशि मिलने और सभी नौ परियोजनाएं पूरी होने के बाद जलभराव तथा सीवर निकासी से प्रभावित इलाकों को राहत मिलने की संभावना है।

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