उत्तर प्रदेश

53 गांवों को मिलेगी पक्की सड़क की सौगात

Kavita2
3 Sept 2026 2:35 PM IST
53 गांवों को मिलेगी पक्की सड़क की सौगात
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फतेहपुर। आजादी के बाद से विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जिले के 53 गांव और मजरे ऐसे भी रहे, जहां अब तक पक्की सड़क की सुविधा नहीं पहुंच सकी थी। लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे इन गांवों के लोगों के लिए अब राहत की खबर आई है। शासन ने सड़क निर्माण के लिए आबादी का मानक कम करने के बाद इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मंजूरी दे दी है।

शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए निर्धारित आबादी के मानक को 250 से घटाकर 125 कर दिया है। इसके बाद जिले के वे गांव भी सड़क सुविधा के दायरे में आ गए हैं, जो अब तक कम आबादी के कारण योजनाओं से बाहर रह जाते थे।

सरकार की ओर से जिले में 41.22 किलोमीटर लंबी 23 नई सड़कों के निर्माण के लिए 32.25 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन सड़कों के बनने से 53 गांव और मजरों की करीब 10 हजार की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा।

इन गांवों के लोगों के लिए पक्की सड़क का इंतजार कई वर्षों से बना हुआ था। बरसात के दिनों में कच्चे रास्तों पर चलना ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता था। सड़क खराब होने के कारण मरीजों को अस्पताल ले जाने, बच्चों को स्कूल पहुंचाने और जरूरी कामों के लिए आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा नहीं होने के कारण विकास की अन्य योजनाओं का लाभ भी पूरी तरह नहीं मिल पाता था। कई बार बारिश के मौसम में रास्ते खराब हो जाते थे और गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाता था।

अब नई सड़कों के निर्माण की मंजूरी मिलने के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। लोगों का कहना है कि पक्की सड़क बनने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी बेहतर होगी।

प्रशासन के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत बजट से चिन्हित क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से कार्य कराया जाएगा। संबंधित विभाग को निर्माण कार्यों की तैयारी और प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

ग्रामीण विकास के लिए सड़क को सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत सुविधा माना जाता है। सड़क बनने से गांवों को बाजार, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं से जोड़ने में मदद मिलती है।

अधिकारियों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य ऐसे सभी गांवों को बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध कराना है, जो अब तक मुख्य सड़कों से नहीं जुड़ पाए हैं। आबादी के मानक में बदलाव के बाद कई छोटे गांवों को भी सड़क योजनाओं में शामिल किया जा रहा है।

इन 53 गांवों में रहने वाले लोगों के लिए सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि विकास की नई शुरुआत मानी जा रही है। लंबे समय से उपेक्षित रहे इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण से आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद बच्चों को स्कूल जाने, किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने और मरीजों को समय पर इलाज मिलने में सुविधा होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत होने से पलायन को रोकने में भी मदद मिलती है। जब गांवों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचती हैं तो स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ते हैं।

हालांकि, ग्रामीणों की नजर अब सड़क निर्माण कार्य शुरू होने पर है। लोगों का कहना है कि वर्षों के इंतजार के बाद मंजूरी मिली है, इसलिए काम समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा होना चाहिए।

प्रशासन की ओर से भी निर्माण कार्यों की निगरानी की जरूरत होगी, ताकि सड़कों की गुणवत्ता बनी रहे और ग्रामीणों को लंबे समय तक इसका लाभ मिल सके।

आजादी के बाद विकास की मुख्यधारा से दूर रहे इन गांवों के लिए सड़क निर्माण की यह योजना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 41.22 किलोमीटर लंबी नई सड़कों के निर्माण से न केवल रास्ते बेहतर होंगे, बल्कि इन क्षेत्रों के विकास की रफ्तार भी बढ़ने की उम्मीद है।

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