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उत्तर प्रदेश
3000 की बंदूक के लिए 50 हजार खर्च, 26 साल बाद भी नहीं मिली वापसी
Saba Naaz
29 Jun 2025 3:55 PM IST

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Aligarh अलीगढ : आज से 26 वर्ष पहले लूटी गई तीन हजार की बंदूक की बरामदगी के लिए भागदौड़ में पुलिस ने 50 हजार रुपये खर्च कर दिए, उसके बावजूद बंदूक नहीं मिल सकी।
पुलिस ने लूट के आरोप में तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया। उन पर लूट की चार्जशीट भी दे दी, लेकिन आज तक बंदूक का पता नहीं चल सका। अकराबाद के गांव जुझारपुर के ग्रामीण योगेंद्र प्रताप यादव संग नवंबर 1999 में लाइसेंसी इकनाली बंदूक की लूट हुई थी। योगेंद्र बताते हैं कि वे घटना वाली शाम अपने तहेरे भाई सुनहरी सिंह के साथ बरला के गांव पहाड़ीपुर स्थित अपनी ससुराल से साले की शादी से वापस लौट रहे थे।
उनकी लाइसेंसी बंदूक कंधे पर लटकी थी। आधी रात में करहला रोड पर कुआं गांव के रजबहे के पुल पर पहले से घात लगाकर बैठे सात-आठ बदमाशों ने उन्हें बंधक बनाकर बंदूक के साथ जेब में रखे रुपये व कागजात लूटकर ले गए। उन्होंने एक बदमाश को पहचान लिया, जो पास के ही गांव का था। पुलिस ने उसे पकड़ लिया। रात तक पूछताछ हुई, लेकिन पुलिस बंदूक बरामद नहीं कर पाई। अगली सुबह सियासी दबाव में पुलिस ने जेल भेजने के बजाय उसे छोड़ दिया।
उस समय क्या हालात रहे ये तो कहना मुश्किल है। ये काफी पुराना प्रकरण है। फिर भी ऐसे मामलों में माल बरामदगी के लिए सुराग का तस्करा जीडी में डाला जाता है, ताकि कहीं कोई माल मिले तो उसकी पहचान कराई जा सके। मामले में समीक्षा की जाएगी
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