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Upadhyaya उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 30% सीट वृद्धि से कॉलेजों की चिंता बढ़ी

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों में 30 प्रतिशत सीटें बढ़ाने के निर्णय ने शहर और आसपास के कॉलेजों में चिंता बढ़ा दी है। हर वर्ष सीमित सीटों को भरने के लिए संघर्ष करने वाले वित्तपोषित और स्व-वित्तपोषित कॉलेज प्रबंधन को आशंका है कि विश्वविद्यालय परिसर में सीटें बढ़ने से उनके संस्थानों में प्रवेश प्रभावित हो सकता है।
कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि इस निर्णय से विशेष रूप से स्व-वित्तपोषित संस्थानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है, क्योंकि छात्रों का रुझान विश्वविद्यालय की बढ़ी हुई सीटों की ओर जा सकता है। कई कॉलेज इसे अपने अस्तित्व और संचालन के लिए चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए स्नातक और परास्नातक स्तर पर सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इस विस्तार के तहत विभिन्न पाठ्यक्रमों में न केवल नियमित सीटें बढ़ाई गई हैं, बल्कि स्ववित्तपोषित सीटों का भी बड़ा विस्तार किया गया है।
बीए ऑनर्स में नियमित सीटों के साथ 731 स्ववित्तपोषित सीटें जोड़कर कुल सीटों की संख्या 3169 कर दी गई है। इसके अलावा बीएससी गणित में 60 सीटें, जीव विज्ञान में 30 सीटें, गृह विज्ञान में 10 सीटें और बीए जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (JMC) में 20 सीटों की बढ़ोतरी की गई है।
प्रशासन का कहना है कि यह कदम छात्रों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने और उच्च शिक्षा में बढ़ती मांग को पूरा करने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ तकनीकी और रोजगारपरक कोर्सों में भी स्ववित्तपोषित सीटों का विस्तार किया गया है।
हालांकि, कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि इस फैसले से विश्वविद्यालय और निजी कॉलेजों के बीच प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी, जिससे छोटे संस्थानों की स्थिति कमजोर हो सकती है। कई प्रबंधकों ने इस फैसले को लेकर समीक्षा और संतुलन की मांग की है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कॉलेजों के बीच इस बढ़ी हुई सीट नीति को लेकर क्या संतुलन बनता है और इसका आगामी शैक्षणिक सत्र में प्रवेश प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ता है।





