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प्रयागराज। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) का 21वां दीक्षांत समारोह शनिवार को आयोजित हुआ। समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल 728 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 22 मेधावियों को विभिन्न पदकों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2026 में उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि के लिए दिव्यांश ओमर को अध्यक्ष स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव और उनके जीवन में नई शुरुआत का अवसर बना।
समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. अरविंद पी. नातू रहे। उन्होंने अपने संबोधन में विज्ञान और तकनीक के विकास से समाज में आए व्यापक बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में विज्ञान और तकनीक ने समाज तथा मानव जीवन को जिस तरह बदला है, वह अभूतपूर्व है। उनके संबोधन में बीते समय के अनुभवों और आज उपलब्ध सुविधाओं के बीच का अंतर प्रमुख रूप से सामने आया।
प्रो. नातू ने अपनी पीढ़ी के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने ऐसा समय देखा है, जब रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के लिए भी लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। उस दौर में सामान्य जरूरतों को पूरा करने के लिए समय और धैर्य दोनों की आवश्यकता होती थी। रेफ्रिजरेटर, स्कूटर और टेलीफोन जैसी सुविधाएं भी विलासिता की वस्तुएं मानी जाती थीं। इन उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि तकनीकी प्रगति ने दैनिक जीवन की परिस्थितियों को कितनी तेजी से बदल दिया है।
मुख्य अतिथि ने कहा कि कंप्यूटर, इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी सुविधाएं उस समय की कल्पना से भी बाहर थीं। आज इन्हीं तकनीकों के माध्यम से शिक्षा, संवाद और जानकारी तक पहुंच के नए रास्ते खुले हैं। उनके संबोधन ने विद्यार्थियों के सामने उस बदलाव की तस्वीर रखी, जिसमें कभी दुर्लभ मानी जाने वाली सुविधाएं समय के साथ जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गईं। विज्ञान और तकनीक की उपलब्धियों को उन्होंने मानव जीवन में आए परिवर्तन के संदर्भ में प्रस्तुत किया।
दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर के छात्र-छात्राएं शामिल रहे। कुल 728 विद्यार्थियों को विभिन्न उपाधियां प्रदान किया जाना संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों और अलग-अलग स्तरों पर संचालित अध्ययन की व्यापकता को दर्शाता है। इन विद्यार्थियों के लिए समारोह अपनी पढ़ाई के दौरान किए गए प्रयासों को औपचारिक पहचान मिलने का अवसर रहा। उपाधि प्राप्त करने के साथ उनकी शैक्षणिक यात्रा का यह चरण पूरा हुआ और आगे के अवसरों की दिशा में नया पड़ाव जुड़ा।
शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 22 मेधावियों को विभिन्न पदकों से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पढ़ाई में उनके प्रदर्शन और उपलब्धियों की पहचान के रूप में प्रदान किया गया। समारोह में उपाधि वितरण के साथ मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान भी प्रमुख आकर्षण रहा। पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों ने इस आयोजन को विशेष बनाया। अध्ययन के विभिन्न चरणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह अवसर उनकी मेहनत और निरंतर प्रयासों को संस्थागत सम्मान मिलने का क्षण रहा।
वर्ष 2026 में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए दिव्यांश ओमर को अध्यक्ष स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। समारोह में उनकी उपलब्धि को विशेष पहचान मिली। अध्यक्ष स्वर्ण पदक प्राप्त करना उनके लिए महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि रहा। उपाधियों और अन्य पदकों के वितरण के बीच दिव्यांश का सम्मान समारोह की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। यह सम्मान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर दिया गया। उपलब्ध जानकारी में अन्य पदक विजेताओं के नाम और उनकी श्रेणियों का विवरण नहीं दिया गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों के सामने विज्ञान और तकनीक के बदलावों पर मुख्य अतिथि का संबोधन विशेष प्रासंगिकता रखता था। जिस क्षेत्र में उन्होंने अध्ययन किया है, उसका संबंध आज शिक्षा, संचार, सेवाओं और कामकाज की अनेक प्रक्रियाओं से जुड़ता है। प्रो. नातू के अनुभवों ने तकनीक को केवल उपकरणों और सुविधाओं तक सीमित रखने के बजाय उसके सामाजिक प्रभाव को समझने का संदर्भ दिया। पुराने समय की कठिनाइयों और वर्तमान सुविधाओं का उल्लेख इस परिवर्तन को सहज ढंग से स्पष्ट करता है।
दीक्षांत समारोह किसी संस्थान के लिए केवल उपाधियां प्रदान करने का आयोजन नहीं होता, बल्कि उसके विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सामने लाने का अवसर भी होता है। आईआईआईटी के 21वें दीक्षांत समारोह में उपाधि वितरण और मेधावियों के सम्मान ने इसी महत्व को रेखांकित किया। स्नातक से लेकर शोध स्तर तक विद्यार्थियों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया। मुख्य अतिथि के संबोधन ने इस शैक्षणिक उपलब्धि के साथ विज्ञान और तकनीक की विकास यात्रा का संदर्भ भी जोड़ा।
समारोह में 728 विद्यार्थियों को उपाधियां और 22 मेधावियों को पदक प्रदान किए जाने के साथ संस्थान की एक और शैक्षणिक उपलब्धि दर्ज हुई। दिव्यांश ओमर को अध्यक्ष स्वर्ण पदक मिलने से उनकी उत्कृष्टता को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ। वहीं प्रो. अरविंद पी. नातू के संबोधन ने नई पीढ़ी को पिछले कुछ दशकों के व्यापक तकनीकी परिवर्तन से परिचित कराया। दैनिक जरूरतों के लिए कतारों से लेकर इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक संचार तक की यात्रा उनके वक्तव्य का केंद्रीय विषय रही।





