उत्तर प्रदेश

धागा मिल की कैंटीन का खाना खाने के बाद 21 महिला कर्मी बीमार, 17 अस्पताल में भर्ती

Kavita2
30 Sept 2026 2:28 PM IST
धागा मिल की कैंटीन का खाना खाने के बाद 21 महिला कर्मी बीमार, 17 अस्पताल में भर्ती
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अंबेडकरनगर। पार्थ ट्रेड धागा मिल की कैंटीन में भोजन करने के बाद 21 महिला कर्मियों और प्रशिक्षु युवतियों की तबीयत बिगड़ गई। सभी को फूड प्वाइजनिंग की आशंका में मेडिकल कॉलेज के अस्पताल लाया गया, जहां 17 युवतियों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। बीमार हुई अधिकांश युवतियों की उम्र 18 से 22 वर्ष के बीच बताई गई है।

जानकारी के मुताबिक मिल की कैंटीन में महिला कर्मियों और प्रशिक्षु युवतियों ने नियमित भोजन किया था। भोजन में आलू-बैंगन की सब्जी, रोटी, चावल और दाल परोसी गई थी। खाना खाने के कुछ समय बाद कई युवतियों को अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने लगी।

एक के बाद एक महिला कर्मियों की तबीयत बिगड़ने से मिल परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। शुरुआत में कुछ युवतियों को सामान्य परेशानी समझकर आराम करने के लिए कहा गया, लेकिन जब बीमार होने वालों की संख्या बढ़ने लगी तो सभी को अस्पताल पहुंचाने का फैसला लिया गया।

कुल 21 महिला कर्मियों और प्रशिक्षुओं को मेडिकल कॉलेज के अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद 17 युवतियों को भर्ती कर लिया, जबकि अन्य की स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य बताई गई। अस्पताल में भर्ती युवतियों की निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार दवाएं तथा अन्य उपचार दिया जा रहा है।

बीमार हुई कुछ युवतियां कौशल विकास कार्यक्रम के तहत मिल में प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें अधिकांश की उम्र 18 से 22 साल के बीच है। अचानक इतनी बड़ी संख्या में युवतियों के बीमार पड़ने से उनके परिजनों में भी चिंता बढ़ गई।

प्रारंभिक तौर पर मामला फूड प्वाइजनिंग का माना जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि भोजन में परोसी गई आलू-बैंगन की सब्जी में किसी वजह से खराबी आ गई थी। बैंगन पर पेस्टीसाइड का प्रभाव भी एक संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि जांच के बाद ही सही वजह स्पष्ट हो सकेगी।

यह भी देखा जा रहा है कि सब्जी तैयार करने से पहले उसे किस तरह साफ किया गया था और इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता कैसी थी। कैंटीन में भोजन तैयार करने के दौरान साफ-सफाई के मानकों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच की जरूरत बताई जा रही है।

फूड प्वाइजनिंग के मामलों में दूषित भोजन, खराब पानी, बासी सामग्री या रासायनिक पदार्थ का असर प्रमुख कारण हो सकता है। इस मामले में चूंकि एक ही समय में भोजन करने वाली कई युवतियों की तबीयत बिगड़ी, इसलिए कैंटीन में परोसे गए खाने को ही जांच के केंद्र में रखा गया है।

बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने सभी युवतियों की प्राथमिक जांच की। जिनकी हालत ज्यादा खराब थी, उन्हें तत्काल भर्ती किया गया। बाकी युवतियों को भी चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।

मिल प्रबंधन की ओर से भी घटना के बाद कैंटीन में इस्तेमाल खाद्य सामग्री की जानकारी जुटाई जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि सब्जियां कहां से खरीदी गई थीं और उन्हें कब से स्टोर करके रखा गया था।

यदि बैंगन पर पेस्टीसाइड का असर सामने आता है तो यह भी जांच का विषय होगा कि सब्जियों को उपयोग से पहले पर्याप्त रूप से धोया गया था या नहीं। किसानों द्वारा फसल में इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक यदि सब्जियों पर अधिक मात्रा में रह जाएं तो उनका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

हालांकि इस स्तर पर किसी एक कारण को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। भोजन के नमूनों और अन्य सामग्री की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि महिला कर्मियों की तबीयत किस वजह से खराब हुई।

घटना के बाद कैंटीन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों को भोजन उपलब्ध कराने वाली कैंटीनों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, रसोई की सफाई, पीने के पानी और बर्तनों की स्वच्छता की नियमित जांच जरूरी होती है।

बीमार युवतियों के परिजनों को भी अस्पताल बुलाया गया है। परिजन उनकी स्थिति की जानकारी ले रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार भर्ती युवतियों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इस घटना ने कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण लेने वाली युवतियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े इंतजामों की ओर भी ध्यान खींचा है। प्रशिक्षण केंद्र या औद्योगिक इकाई में काम करने वाले युवाओं को सुरक्षित भोजन और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है।

घटना की जानकारी संबंधित प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचने के बाद कैंटीन के भोजन की जांच कराई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम भोजन और कच्ची सामग्री के नमूने भी ले सकती है।

अगर जांच में कैंटीन की लापरवाही या खराब खाद्य सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि सभी बीमार युवतियों को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया गया। 17 युवतियों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं।

अब जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना होगा कि फूड प्वाइजनिंग का वास्तविक कारण क्या था। आलू-बैंगन की सब्जी, भोजन की अन्य सामग्री, पानी या पेस्टीसाइड का प्रभाव—इन सभी संभावनाओं की जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।

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