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20 साल पुरानी जब्त दवाएं खुले में मिलीं, बारिश में हो रहीं खराब; औषधि विभाग ने शुरू की जांच

आगरा। औषधि विभाग द्वारा वर्षों पहले छापेमारी के दौरान जब्त की गईं फिजीशियन सैंपल, हॉस्पिटल सप्लाई समेत अन्य अवैध दवाएं खुले में पड़ी मिली हैं। बताया जा रहा है कि करीब 20 साल पुरानी ये दवाएं बारिश में भीगने के कारण खराब हो रही हैं। मामला सामने आने के बाद औषधि विभाग में हड़कंप मच गया है। अब विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर इन दवाओं को खुले में किसने फेंका।
जानकारी के अनुसार, ये दवाएं लंबे समय से विभाग के कब्जे में थीं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग समय पर स्टोर में रखा गया था। लेकिन अब बड़ी मात्रा में दवाएं खुले स्थान पर मिलने से सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव पर सवाल खड़े हो गए हैं।
छापों में जब्त की गई थीं दवाएं
बताया जा रहा है कि औषधि विभाग ने अलग-अलग समय पर की गई कार्रवाई के दौरान कई अवैध दवाएं जब्त की थीं। इनमें फिजीशियन सैंपल, हॉस्पिटल सप्लाई की दवाएं और अन्य प्रतिबंधित या नियम विरुद्ध रखी गईं दवाएं शामिल थीं।
इन दवाओं को कार्रवाई के बाद विभागीय रिकॉर्ड के तहत सुरक्षित रखा गया था, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक इन्हें संरक्षित रखा जा सके।
लेकिन अब इन दवाओं के खुले में पड़े मिलने से कई सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में जब्त सामग्री को लापरवाही से बाहर कैसे छोड़ दिया गया।
बारिश में भीगकर खराब हो रही दवाएं
मौके पर मिली दवाएं बारिश के कारण भीग रही हैं। खुले में पड़े रहने से दवाओं के पैकेट और सामग्री खराब हो रही है।
दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जरूरत होती है, क्योंकि तापमान, नमी और अन्य परिस्थितियों का असर उनकी गुणवत्ता पर पड़ सकता है। ऐसे में लंबे समय से रखी गई दवाओं का इस तरह खुले में मिलना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।
2007 में बनाए गए थे स्टोर रूम
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2007 में सिकंदरा के कैलाशपुरी स्थित हेल्थ वर्कर ट्रेनिंग सेंटर में औषधि विभाग द्वारा जब्त दवाओं को रखने के लिए तीन कमरे लिए गए थे।
इन कमरों में छापेमारी के दौरान जब्त की गई दवाओं को रखा जाता था। बताया जा रहा है कि वर्ष 2015 तक हुई कार्रवाई में जब्त दवाएं इन्हीं कमरों में रखी हुई थीं।
अब सवाल उठ रहा है कि इन कमरों से दवाएं बाहर कैसे पहुंचीं और किसके निर्देश पर इन्हें खुले में छोड़ा गया।
पहले CMO कार्यालय के अधीन था विभाग
करीब 15 साल पहले औषधि विभाग भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के अधीन संचालित होता था। उस समय साईं की तकिया स्थित जिला अस्पताल परिसर में ही CMO कार्यालय और औषधि विभाग का संचालन होता था।
बाद में विभागीय व्यवस्था में बदलाव हुआ, लेकिन पुराने समय में जब्त की गई सामग्री और रिकॉर्ड की जिम्मेदारी को लेकर अब जांच की जा रही है।
विभाग ने शुरू कराई जांच
मामला सामने आने के बाद औषधि विभाग ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दवाएं किसने बाहर निकालीं और उन्हें खुले में क्यों फेंका गया।
जांच में स्टॉक रजिस्टर, पुराने रिकॉर्ड और दवाओं की जब्ती से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा और निपटान प्रक्रिया पर सवाल
नियमों के अनुसार, जब्त की गई दवाओं का निपटारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है। उन्हें लंबे समय तक खुले में या असुरक्षित स्थान पर नहीं छोड़ा जा सकता।
ऐसे में 20 साल पुरानी दवाओं का इस तरह बाहर मिलना विभागीय प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब्त दवाओं को नष्ट करने के लिए भी निर्धारित नियम और प्रक्रिया होती है, ताकि उनका गलत इस्तेमाल न हो सके।
लोगों में चिंता
मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता है। लोगों का कहना है कि दवाएं अगर खुले में पड़ी हैं तो यह सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर विषय है।
लोगों ने मांग की है कि जल्द जांच कर जिम्मेदारों की पहचान की जाए और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।





