उत्तर प्रदेश

बरसाती नाले में मिला नवजात 15 दिन बाद जिंदगी की जंग हारा, 57 हजार दंपती की उम्मीदें टूटीं

Kavita2
22 Aug 2026 2:14 PM IST
बरसाती नाले में मिला नवजात 15 दिन बाद जिंदगी की जंग हारा, 57 हजार दंपती की उम्मीदें टूटीं
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लखनऊ। मां की ममता और परिस्थितियों के बीच न जाने क्या हुआ होगा कि एक मां ने अपने जिगर के टुकड़े को बरसाती नाले में फेंक दिया। दुनिया में आए उस अबोध नवजात को यह भी नहीं मालूम था कि उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। जन्म के तुरंत बाद ही उसे अपनों से दूर कर दिया गया, लेकिन जब उसके बारे में लोगों को पता चला तो उसके चाहने वालों की संख्या हजारों में पहुंच गई।

एक-दो नहीं, बल्कि करीब 57 हजार दंपती ऐसे थे, जिन्होंने इस नवजात को अपनाने की इच्छा जताई थी। कई परिवारों को उसमें अपने सूने घर में किलकारी लौटने की उम्मीद नजर आई थी। दूसरी ओर डॉक्टरों ने भी उसे बचाने के लिए पूरी कोशिश की। चिकित्सकों ने करीब 15 दिनों तक उसकी जिंदगी बचाने की जंग लड़ी, लेकिन अंतत: नियति के आगे कोशिशें हार गईं। नवजात ने दुनिया से आंखें बंद कर लीं और उसके इंतजार में बैठे हजारों दंपती की उम्मीदें भी टूट गईं।

नाले में मिला था अबोध

नवजात के मिलने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया था। बरसाती नाले में फेंके गए बच्चे को जब लोगों ने देखा तो तत्काल उसे बचाने की कोशिश शुरू की गई। अबोध की हालत गंभीर थी। सूचना मिलने पर उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

नवजात को बचाने के लिए चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया। जन्म के बाद ही विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे बच्चे के लिए शुरुआती दिन बेहद महत्वपूर्ण थे। डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

बच्चे की हालत की जानकारी धीरे-धीरे लोगों तक पहुंची तो उसके लिए दुआओं का दौर भी शुरू हो गया। जिसने भी उसके बारे में सुना, उसके स्वस्थ होने की कामना करने लगा।

57 हजार दंपती ने जताई अपनाने की इच्छा

इस मासूम की कहानी का सबसे भावुक पहलू यह रहा कि जिसे जन्म देने वाली मां ने बरसाती नाले में छोड़ दिया, उसे अपनाने के लिए हजारों परिवार आगे आ गए।

बताया गया कि करीब 57 हजार दंपती ने नवजात को अपनाने की इच्छा जताई थी। यह संख्या अपने आप में बताती है कि बच्चे की कहानी ने कितने लोगों के दिल को छुआ था। अनेक दंपती ऐसे रहे होंगे, जो लंबे समय से अपने घर में बच्चे की किलकारी का इंतजार कर रहे थे और उन्हें इस मासूम में अपने परिवार को पूरा करने की उम्मीद दिखाई दी।

बच्चे की जिंदगी के लिए चल रही चिकित्सकीय जंग के साथ-साथ उसके भविष्य को लेकर भी लोगों की उम्मीदें जुड़ गई थीं। हालांकि, कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किसी बच्चे को दत्तक लिया जा सकता है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोगों का उसके प्रति भावनात्मक जुड़ाव इस घटना को और मार्मिक बना रहा।

डॉक्टरों ने बचाने की पूरी कोशिश की

अस्पताल में डॉक्टरों ने नवजात के उपचार में पूरी ताकत झोंक दी। नाजुक हालत के बावजूद चिकित्सकों ने उम्मीद नहीं छोड़ी। करीब 15 दिनों तक उसका उपचार चलता रहा।

चिकित्सकों के लिए भी यह मामला सामान्य नहीं था। एक ओर उन्हें गंभीर हालत में पहुंचे नवजात को चिकित्सकीय सहायता देनी थी, वहीं दूसरी ओर उसके जीवन को लेकर लगातार उम्मीद बनी हुई थी।

इलाज के दौरान उसकी हालत को संभालने और उसे जिंदगी की ओर वापस लाने के प्रयास किए गए। लेकिन लंबे उपचार के बावजूद उसकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।

15 दिन बाद थम गई सांसें

करीब 15 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद आखिरकार नवजात ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर सामने आते ही उस बच्चे के लिए उम्मीद लगाए बैठे लोगों में निराशा छा गई।

जिस मासूम के लिए हजारों दंपती अपने घर में किलकारी सुनने का सपना देख रहे थे, वह सपना अचानक टूट गया। बच्चे की जिंदगी बचाने में जुटे डॉक्टरों की कोशिशें भी सफल नहीं हो सकीं।

जन्म देने वाली मां से ज्यादा मिले चाहने वाले

इस घटना की सबसे बड़ी विडंबना यही रही कि जन्म देने वाली मां ने किन परिस्थितियों में बच्चे को नाले में छोड़ा, यह अलग सवाल है, लेकिन उसके बाद उस मासूम को अपनाने और उसके लिए दुआ करने वालों की लंबी कतार लग गई।

परिस्थितियां जो भी रही हों, बच्चे को इस दुनिया में आने के बाद एक सुरक्षित और प्यार भरे जीवन की जरूरत थी। उसे बचाने वाले लोग मिले, डॉक्टरों ने इलाज किया और हजारों परिवारों ने उसे अपने घर का हिस्सा बनाने की इच्छा जताई। लेकिन जिंदगी ने उसे केवल 15 दिन का समय दिया।

घटना ने उठाए कई सवाल

नवजात की मौत ने एक बार फिर परित्यक्त बच्चों की सुरक्षा और उनके संरक्षण से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। किसी भी नवजात के लिए जीवन के शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में उसे असुरक्षित स्थान पर छोड़ देना उसके जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

यह घटना उन परिवारों के लिए भी भावनात्मक झटका है, जिन्होंने बच्चे को अपनाने की इच्छा जताई थी। 57 हजार दंपती का आंकड़ा इस बात का संकेत है कि समाज में ऐसे बच्चों को अपनाने की इच्छा रखने वाले परिवारों की बड़ी संख्या मौजूद है।

मासूम की जिंदगी भले ही 15 दिन में खत्म हो गई, लेकिन उसकी कहानी ने समाज के सामने एक गहरी तस्वीर छोड़ दी है—एक ऐसा बच्चा जिसे जन्म के बाद अपनों ने छोड़ दिया, मगर दुनिया में हजारों लोग उसे अपना बनाने के लिए तैयार थे। दुर्भाग्य से डॉक्टरों की कोशिशों और हजारों लोगों की उम्मीदों के बावजूद वह जिंदगी की यह जंग नहीं जीत सका।

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