
Tripura त्रिपुरा: वन मंत्री Animesh Debbarma ने शुक्रवार को जानकारी दी कि राज्य में सक्रिय संगठित लकड़ी तस्करी नेटवर्क के खिलाफ एनफोर्समेंट कार्रवाई को और मजबूत करने के लिए वन विभाग 200 फायरआर्म्स खरीदने की प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि राज्य में अवैध लकड़ी व्यापार लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है और इससे निपटने के लिए अब अधिक सख्त और संगठित कार्रवाई की आवश्यकता है। मंत्री ने यह बयान अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिया। उन्होंने कहा कि सरकार वन विभाग के कर्मचारियों और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी कर रही है, ताकि जंगलों में हो रही अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
मंत्री ने कहा कि तस्करी के नेटवर्क काफी संगठित हो चुके हैं और कई इलाकों में यह गतिविधियां छिपे हुए तरीके से चल रही हैं, जिससे वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि इन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विभाग न केवल हथियारों की खरीद कर रहा है बल्कि मानव संसाधन को भी मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में 167 नए वन रक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इन नए कर्मचारियों को वन प्रबंधन के साथ-साथ फायरआर्म्स के उपयोग की विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि वे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
मंत्री ने आगे कहा कि भर्ती होने वाले नए वन रक्षक कमजोर वन क्षेत्रों में एंटी-स्मगलिंग अभियानों के दौरान Tripura State Rifles के साथ समन्वय में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि इस संयुक्त कार्य प्रणाली से निगरानी व्यवस्था और प्रवर्तन गतिविधियां और मजबूत होंगी, जिससे अवैध लकड़ी तस्करी पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य वन क्षेत्रों की सुरक्षा को बेहतर बनाना और वन संसाधनों के संरक्षण को सुनिश्चित करना है।
वन विभाग का मानना है कि बढ़ती तस्करी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए तकनीकी और मानवीय दोनों संसाधनों का उपयोग जरूरी है। हथियारों की उपलब्धता और प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती से जंगल क्षेत्रों में गश्त और कार्रवाई की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही सुरक्षा बलों के साथ तालमेल से अभियान अधिक प्रभावी और तेज होंगे। मंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में इन कदमों से राज्य में अवैध लकड़ी कारोबार पर काफी हद तक रोक लगेगी और वन क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत होगी।
इस योजना को राज्य की वन नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसमें वन संरक्षण के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले महीनों में भर्ती और हथियार खरीद प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की योजना है ताकि फील्ड स्तर पर जल्द से जल्द प्रभावी कार्रवाई शुरू की जा सके।





