
Tripura त्रिपुरा: त्रिपुरा ने बाल विवाह के खिलाफ अपनी लड़ाई में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। राज्य सरकार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 9,982 बाल विवाह मामलों को समय रहते रोक दिया गया है। यह जानकारी सामाजिक कल्याण और सामाजिक शिक्षा मंत्री टिंकू रॉय ने मंगलवार को अगरतला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।
मंत्री टिंकू रॉय ने इस उपलब्धि का श्रेय जिला प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, स्थानीय स्वशासन संस्थाओं और बाल संरक्षण संस्थानों के संयुक्त प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सक्रिय निगरानी के कारण राज्य में बाल विवाह के मामलों को रोकने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने यह भी बताया कि लगातार बढ़ती रोकथाम की संख्या इस बात का संकेत है कि राज्य में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे सभी हितधारकों के बीच मजबूत तालमेल विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ी है, जिसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
हालांकि, मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि राज्य के कुछ हिस्सों में बाल विवाह की समस्या अभी भी बनी हुई है। विशेष रूप से सोनामुरा उपखंड (सिपाहीजला जिला) और कैलाशहर (उनाकोटी जिला) जैसे क्षेत्रों में यह सामाजिक चुनौती अभी भी देखने को मिलती है।
उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और बाल विवाह रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सरकार का फोकस केवल रोकथाम पर ही नहीं, बल्कि लोगों को शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से इस सामाजिक कुरीति के खिलाफ तैयार करना भी है।
बाल कल्याण समितियां, त्रिपुरा चाइल्ड राइट्स कमीशन और कई गैर-सरकारी संगठन मिलकर इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं। इन संस्थाओं द्वारा समय-समय पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बाल अधिकारों, शिक्षा के महत्व और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाती है।
अधिकारियों के अनुसार, बाल विवाह रोकने के लिए त्वरित हस्तक्षेप प्रणाली को मजबूत किया गया है, जिससे किसी भी संभावित मामले की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा, समुदाय स्तर पर निगरानी तंत्र को भी सक्रिय किया गया है।
सरकार का मानना है कि शिक्षा का विस्तार और सामाजिक जागरूकता बढ़ने से आने वाले वर्षों में बाल विवाह के मामलों में और कमी आएगी। इसके साथ ही प्रशासन का लक्ष्य है कि राज्य को पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा जाए।
इस उपलब्धि को राज्य के सामाजिक ढांचे के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि संगठित प्रयासों से सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।





