
x
त्रिपुरा हाई कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
अगरतला: त्रिपुरा हाई कोर्ट ने आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने Tripura Tribal Areas Autonomous District Council (TTAADC) को निर्देश दिया है कि वह सिंगल-टीचर हाई स्कूलों और हायर सेकेंडरी स्कूलों, खाली शिक्षक पदों तथा नियमित भर्ती के बजाय कॉन्ट्रैक्ट पर शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े सवालों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी।
यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति एस. दत्ता पुरकायस्थ की खंडपीठ ने 1 अक्टूबर 2026 को स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका में दिया। कोर्ट ने पाया कि बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल TTAADC के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, इसलिए परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।
हाई कोर्ट ने TTAADC से खास तौर पर यह बताने को कहा है कि उसके क्षेत्र में कितने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत है। इसके साथ ही इन स्कूलों में स्वीकृत और खाली शिक्षक पदों की पूरी जानकारी भी मांगी गई है।
कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया है कि जब नियमित पद खाली हैं तो उन पर स्थायी भर्ती करने के बजाय शिक्षकों को कॉन्ट्रैक्ट आधार पर क्यों नियुक्त किया जा रहा है। अब परिषद को अपने हलफनामे में इस व्यवस्था का कारण स्पष्ट करना होगा।
मामला केवल TTAADC क्षेत्र तक सीमित नहीं है। त्रिपुरा हाई कोर्ट राज्य के सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर शिक्षक पद खाली रहने को लेकर पहले भी चिंता जता चुका है। राज्य सरकार के अतिरिक्त हलफनामे के अनुसार विभिन्न कारणों से कुल 15,449 शिक्षक पद खाली हुए थे। इसके मुकाबले 6,659 नियुक्तियां की गईं, जिससे लगभग 9 हजार पदों का बैकलॉग बना रहा।
इससे पहले 9 सितंबर 2026 को हाई कोर्ट ने 1,116 पोस्ट ग्रेजुएट टीचर पदों पर भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने 700 ग्रेजुएट टीचर पदों की भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने और हाई स्कूल तथा हायर सेकेंडरी स्कूलों में खाली प्रधानाध्यापक एवं सहायक प्रधानाध्यापक पद भरने के निर्देश भी दिए थे।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली रहने का सीधा असर सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ेगा। कोर्ट के मुताबिक केवल स्कूलों में नामांकन और बुनियादी ढांचा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, जब तक विद्यार्थियों को पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध न हों।
अब 16 नवंबर की सुनवाई में TTAADC की ओर से दाखिल जवाब महत्वपूर्ण होगा। परिषद को यह स्पष्ट करना होगा कि सिंगल-टीचर स्कूलों की वास्तविक संख्या कितनी है, कितने शिक्षक पद खाली हैं और स्थायी नियुक्तियों की जगह कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था पर निर्भरता क्यों बनी हुई है।
Next Story





