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त्रिपुरा: अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल (AGMC & GBPH) के डॉक्टरों ने जन्म से ही एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही दो दिन की बच्ची का सफल ऑपरेशन किया है। समय रहते बीमारी का पता चलने और इमरजेंसी सर्जरी की मदद से डॉक्टरों ने उसकी जान बचा ली।
यह नवजात बच्ची दक्षिण त्रिपुरा के P.R. बारी पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गाबताली के एक दंपति की बेटी है। 5 अक्टूबर की आधी रात को उसे एक प्राइवेट क्लिनिक से गंभीर हालत में इस अस्पताल में रेफर किया गया था।
जन्म के तुरंत बाद ही बच्ची को कुछ भी निगलने में दिक्कत होने लगी, उसके मुंह से बहुत ज्यादा झाग निकलने लगा और सांस लेने की समस्या लगातार गंभीर होती गई। उसे तुरंत बाल चिकित्सा विभाग के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में भर्ती कराया गया।
जांच और चेस्ट एक्स-रे के बाद डॉक्टरों को 'ट्रैकियो-इसोफेजियल फिस्टुला' (TEF) का संदेह हुआ। यह जन्म से होने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सांस की नली और भोजन की नली के बीच एक असामान्य जुड़ाव बन जाता है।
बच्ची की हालत को थोड़ा स्थिर करने के बाद, मेडिकल टीम ने उसे इमरजेंसी सर्जरी के लिए तैयार किया। 7 अक्टूबर को, AGMC & GBPH में कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी के कंसल्टेंट, डॉ. कनक नारायण भट्टाचार्य के नेतृत्व में यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।
इस ऑपरेशन को 'राइट-साइडेड थोराकोटोमी' और 'ट्रैकियो-इसोफेजियल फिस्टुला की मरम्मत' कहा जाता है। इसे कार्डियक एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. रिमझिम चकमा और डॉ. मणिमोय देबबर्मा की मदद से पूरा किया गया।
शुरुआती इलाज और बच्ची की हालत को स्थिर करने का काम बाल चिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और यूनिट इंचार्ज, डॉ. श्रीबास दास की देखरेख में हुआ।
12 दिनों की सघन देखभाल के बाद नवजात बच्ची स्वस्थ हो गई।
सर्जरी के बाद, बच्ची को NICU में कड़ी निगरानी में रखा गया। जैसे-जैसे उसकी हालत में सुधार हुआ, धीरे-धीरे एक ट्यूब के जरिए उसे खाना (दूध) देना शुरू किया गया।
सात दिन बाद, डॉक्टरों ने फीडिंग ट्यूब हटा दी और उसे सामान्य रूप से मां का दूध पिलाना शुरू किया गया। 12 दिनों की सघन देखभाल के बाद, नवजात बच्ची को नियोनेटल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
फिलहाल वह पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर है, सामान्य रूप से मां का दूध पी रही है और अपनी मां के साथ है। उम्मीद है कि अस्पताल जल्द ही उसे छुट्टी दे देगा। पूरा इलाज मुफ्त में किया गया
अस्पताल प्रशासन ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस सफल सर्जरी के बारे में जानकारी दी। इस कॉन्फ्रेंस में GBP के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. बिधान गोस्वामी, AGMC के प्रिंसिपल डॉ. तपन मजूमदार, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव देबबर्मा और डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. कनक चौधरी मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि 'जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम' (JSSK) के तहत पूरा इलाज मुफ्त में किया गया। यह एक सरकारी पहल है, जिसके जरिए माताओं और नवजात शिशुओं को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इलाज के दौरान परिवार को अपनी जेब से कोई भी मेडिकल खर्च नहीं करना पड़ा।
यह मामला दिखाता है कि जन्मजात जटिल बीमारियों के इलाज में समय पर सही पहचान, नवजात शिशुओं के लिए विशेष सर्जिकल देखभाल और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कितनी महत्वपूर्ण है।
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