
Tripura त्रिपुरा: हाई कोर्ट ने 292 किलोग्राम गांजा ज़ब्ती से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा राजस्थान के एक आरोपी को बरी किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने मामले में नए सिरे से ट्रायल कराने का निर्देश दिया है। यह फैसला राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई के बाद दिया गया।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस टी. अमरनाथ गौड़ और जस्टिस एस. दत्ता पुरकायस्थ शामिल थे, ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जरूरी गवाहों से पूछताछ किए बिना ही सरकारी सबूतों को बंद कर दिया था, जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि है। अदालत ने माना कि इस तरह का निर्णय मामले की गहराई से जांच किए बिना लिया गया था, इसलिए इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।
यह अपील खोवाई ज़िले के स्पेशल जज, कोर्ट नंबर 2 के 19 मई 2025 के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें राजस्थान के अजमेर ज़िले के रहने वाले आरोपी जम्मू बेग को बरी कर दिया गया था। आरोपी पर एनडीपीएस एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे।
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में मालखाना रजिस्टर पेश न किए जाने और एनडीपीएस एक्ट के सेक्शन 52A और 57 के कथित पालन न होने का हवाला देते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। लेकिन हाई कोर्ट ने इस आधार को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि केवल प्रक्रियात्मक खामियों के आधार पर इतने गंभीर मामले में बरी करना उचित नहीं था, खासकर तब जब बरामदगी के ठोस सबूत मौजूद हों।
मामले के अनुसार, 8 मार्च 2022 को NH-08 पर सालबागान इलाके में पुलिस टीम नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान राजस्थान रजिस्ट्रेशन नंबर RJ-51-GA-0392 वाले एक मल्टी-एक्सल ट्रेलर को रोका गया। जांच के दौरान ट्रेलर में बनाए गए गुप्त डिब्बों से 292 किलोग्राम संदिग्ध सूखा गांजा बरामद किया गया, जो 30 पैकेटों में रखा हुआ था।
प्रॉसिक्यूशन का दावा है कि यह खेप अवैध रूप से परिवहन की जा रही थी और इसमें कई लोगों की संलिप्तता हो सकती है। इसी आधार पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C), 25 और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
हाई कोर्ट ने कहा कि इस तरह के गंभीर मामलों में साक्ष्यों की पूरी तरह जांच जरूरी है और केवल रिकॉर्ड में कमी या तकनीकी खामियों के आधार पर निर्णय नहीं दिया जा सकता। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह सभी जरूरी गवाहों को फिर से बुलाकर मामले की नए सिरे से सुनवाई करे।
इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर से निचली अदालत में वापस जाएगा, जहां पूरे साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर नए सिरे से ट्रायल किया जाएगा।





