त्रिपुरा

अगरतला में अनिल सरकार को श्रद्धांजलि, रचनाओं को किया याद

nidhi
5 Oct 2026 1:21 PM IST
अगरतला में अनिल सरकार को श्रद्धांजलि, रचनाओं को किया याद
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कवि और नेता अनिल सरकार की विरासत पर हुई चर्चा
अगरतला: त्रिपुरा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अनिल सरकार को उनकी 88वीं जयंती के अवसर पर आयोजित स्मृति कार्यक्रम में गीतों, कविताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए याद किया गया। अगरतला में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके राजनीतिक जीवन, सामाजिक सरोकारों और साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया। साथ ही सामाजिक भेदभाव और जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन त्रिपुरा अनुसूचित जाति समन्वय समिति की ओर से किया गया। इसमें पूर्व उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुभाषिस तालापात्रा, पूर्व टीसीएस अधिकारी सुभाष दास, त्रिपुरा दर्पण के संपादक समीरन राय, वरिष्ठ पत्रकार समीर धर और वरिष्ठ माकपा नेता सुधन दास समेत कई लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि अनिल सरकार को केवल भाषणों और औपचारिक श्रद्धांजलियों के जरिए याद करना पर्याप्त नहीं है। न्यायमूर्ति सुभाषिस तालापात्रा ने कहा कि उनके विचारों और सामाजिक सरोकारों को व्यवहार में उतारने के लिए सामाजिक असमानता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष को मजबूत करने की जरूरत है।
अनिल सरकार का राजनीतिक जीवन वामपंथी आंदोलन से जुड़ा रहा। उपलब्ध विवरण के अनुसार उन्होंने 1956 में कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ली थी। बाद में वह दलितों, सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय रहे।
अनिल सरकार केवल राजनेता नहीं थे, बल्कि कवि और गीतकार के रूप में भी उनकी पहचान रही। उनके लेखन में समानता, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय जैसे विषय प्रमुख रहे। कार्यक्रम में उनके लिखे गीत और कविताएं प्रस्तुत की गईं। इनमें उनका चर्चित गीत ‘Jibon tumi Agun hou, Lal Palasher Fagun hou’ भी शामिल था। आयोजकों ने कहा कि उनकी रचनाएं सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच लंबे समय से प्रभाव छोड़ती रही हैं।
अनिल सरकार ने त्रिपुरा में सांस्कृतिक संगठनों और जन आंदोलनों से जुड़े काम में भी भूमिका निभाई थी। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक वह अनुसूचित जाति समन्वय समिति के संस्थापक अध्यक्ष रहे और राज्य की सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े संगठनों में भी सक्रिय थे। साहित्य और संस्कृति के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक विचारों को आम लोगों तक पहुंचाना उनके काम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
उनके राजनीतिक जीवन में शिक्षा और संस्कृति से जुड़े विभागों की जिम्मेदारियां भी रहीं। 1972 से वह त्रिपुरा विधानसभा के सदस्य रहे और अलग-अलग समय में शिक्षा, उच्च शिक्षा, सूचना एवं संस्कृति तथा उद्योग जैसे विभागों का दायित्व संभाला।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने अनिल सरकार के सामाजिक योगदान को याद करते हुए वंचित और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए उनके काम का उल्लेख किया। उनके साहित्यिक योगदान पर भी चर्चा हुई और कहा गया कि उन्होंने कविता, गीत और अन्य रचनात्मक माध्यमों का इस्तेमाल सामाजिक मुद्दों को सामने रखने के लिए किया।
अनिल सरकार का निधन 9 फरवरी 2015 को नई दिल्ली के एम्स में हुआ था। उस समय उनकी उम्र 76 वर्ष थी। उनके निधन के बाद भी त्रिपुरा में हर वर्ष विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से उन्हें याद किया जाता रहा है।
सोमवार के स्मृति कार्यक्रम में भी यही प्रयास दिखाई दिया कि अनिल सरकार की याद को उनकी रचनाओं और सामाजिक विचारों के साथ जोड़ा जाए। गीतों और कविताओं के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ वक्ताओं ने जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष को मजबूत करने की बात कही।
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